Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    शौचालय घोटाला: बगहा में 3 सीनियर अफसरों पर गिर सकती है गाज, सब डिवीजनल ऑफिसर ने DM को भेजी रिपोर्ट

    Updated: Fri, 20 Mar 2026 03:04 PM (IST)

    बगहा एक प्रखंड की बांसगांव मंझरिया पंचायत में शौचालय निर्माण योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता उजागर हुई है। अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने त ...और पढ़ें

    अनुमंडल लोक शिकायत निवारण कार्यालय। (जागरण)

    अनुमंडल लोक शिकायत निवारण कार्यालय। (जागरण)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    संवाद सूत्र, बगहा। बगहा एक प्रखंड अंतर्गत बांसगांव मंझरिया पंचायत में शौचालय निर्माण योजना में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है।

    अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी राजीव कुमार ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित तकनीकी सहायक, लेखापाल और पंचायत सचिव के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई तथा मुखिया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की है।

    इसके साथ ही मेसर्स हैदर अली पर फर्जी बिल के जरिए राशि निकासी का आरोप लगाते हुए फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश जिला प्रशासन से की गई है।

    मामले की रिपोर्ट जिला पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी बगहा समेत संबंधित विभागों को अग्रेतर कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।

    मामले में बांसगांव निवासी रामप्रवेश साह ने अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण कार्यालय में परिवाद दर्ज कराया है। परिवाद में मुखिया बृजेश राम और पंचायत सचिव पर मिलीभगत कर सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।

    शिकायत के अनुसार मंझरिया पोखरा स्थित शिव मंदिर के पास बनाए गए शौचालय का निर्माण घटिया सामग्री से कराया गया। शौचालय में पानी की टंकी, मोटर और पाइप की व्यवस्था नहीं की गई है। वहीं, योजना स्थल पर सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

    मापी पुस्तिका में हेराफेरी और भुगतान पर उठे सवाल

    परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया है कि मापी पुस्तिका में हेराफेरी कर योजना की राशि निकाली गई। मास्टर रोल में दर्ज मजदूरों के वास्तविक कार्य करने का कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिससे मजदूरी भुगतान पर भी संदेह गहरा गया है।

    प्रखंड विकास पदाधिकारी, बगहा एक द्वारा पंचायत सचिव के प्रतिवेदन के आधार पर सामग्री चोरी होने की बात कही गई, लेकिन इस संबंध में न तो कोई प्राथमिकी दर्ज कराई गई और न ही किसी अधिकारी को सूचना देने का प्रमाण प्रस्तुत किया गया। इससे प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

    परिवाद के अनुसार 27 फरवरी 2023 को योजना को पूर्ण दिखाकर अभिलेख बंद कर दिया गया था, जबकि बाद में 9 मई 2023 को मेसर्स हैदर अली को 62,515 रुपये का भुगतान किया गया। यह प्रक्रिया भुगतान में अनियमितता और मनमानी की ओर संकेत करती है।

    खबरें और भी

    परिवादी ने आरोप लगाया है कि तकनीकी सहायक, लेखापाल, पंचायत सचिव रामचन्द्र ठाकुर और मुखिया बृजेश राम ने मिलकर बिना टंकी, मोटर और पाइप लगाए ही सरकारी राशि का गबन किया।

    इससे न केवल सरकारी राजस्व को क्षति पहुंची, बल्कि ग्रामीणों को योजना का लाभ भी नहीं मिल सका। मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

    परिवाद में कहा गया है कि उन्होंने मामले की गंभीरता से जांच नहीं कर संबंधित लोगों को बचाने का प्रयास किया। उनके खिलाफ भी कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

    यह भी पढ़ें- 21 साल बाद भी आरोपी को नहीं किया पेश, बगहा कोर्ट ने जेल अधीक्षक का वेतन रोकने का दिया आदेश