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    पश्चिम चंपारण में 94 बच्चों के दिल में था छेद, बाल हृदय योजना ने दी नई जिंदगी, अब मुस्कुरा रहे मासूम

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 07:50 PM (IST)

    पश्चिम चंपारण में बाल हृदय योजना के तहत 14 लाख से अधिक बच्चों की जांच की गई, जिनमें 172 बच्चों में जन्मजात हृदय रोग पाया गया। अब तक 94 बच्चों की सफल स ...और पढ़ें

    बच्चों के स्वास्थ्य जांच करती हुई आरबीएसके की टीम। जागरण

    बच्चों के स्वास्थ्य जांच करती हुई आरबीएसके की टीम। जागरण 

    जागरण संवाददाता, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत संचालित बाल हृदय योजना के तहत जिले में अप्रैल 2021 से मार्च 2026 तक 14 लाख 2 हजार 327 बच्चों की स्वास्थ्य जांच (स्क्रीनिंग) की गई ।

    इस दौरान 29 हजार 223 बच्चों में विभिन्न प्रकार के जन्मजात दोष एवं विकृतियों के लक्षण पाए गए। स्क्रीनिंग के दौरान 172 बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की पहचान हुई।

    इन बच्चों को आगे की जांच के लिए आईजीआईएमएस पटना, आईजीआईसी तथा मेदांता अस्पताल भेजा गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उनकी विस्तृत जांच की। जांच रिपोर्ट के आधार पर 132 बच्चों को हृदय सर्जरी के लिए चिन्हित किया गया।

    इनमें अब तक 94 बच्चों का सफल ऑपरेशन कराया जा चुका है। सर्जरी के बाद सभी बच्चों के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वे सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।

    यह आरबीएसके के जिला समन्वयक रंजन मिश्रा एवं उनकी टीम की ओर से लगातार किए जा रहे प्रयास की देन है।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाल हृदय योजना के तहत पात्र बच्चों का उपचार एवं सर्जरी सरकार द्वारा निःशुल्क कराई जाती है।

    विभाग का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा केवल आर्थिक अभाव के कारण उपचार से वंचित न रहे। इसके लिए स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमित स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जा रहा है, ताकि जन्मजात हृदय रोग सहित अन्य गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान कर इलाज सुनिश्चित किया जा सके।

    बाल हृदय योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए बनी वरदान

    बाल हृदय योजना गंभीर हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। इस योजना के तहत समय पर जांच, इलाज और सर्जरी की सुविधा मिलने से कई बच्चों को नया जीवन मिला है।

    शहर के रामायण साह ने बताया कि उनकी पोती को चलने-फिरने और सांस लेने में काफी परेशानी होती थी। स्कूल में आरबीएसके मेडिकल टीम ने उसकी जांच की।

    जांच में पता चला कि बच्ची के हृदय में छेद है। इसके बाद परिवार को जिला स्वास्थ्य समिति स्थित आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के जिला समन्वयक से संपर्क करने की सलाह दी गई।रामायण साह ने बताया कि उन्होंने बिना देर किए जिला समन्वयक से मुलाकात की।

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    आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर 5 अप्रैल को बच्ची को पटना भेजा गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने विस्तृत जांच की। इसके बाद योजना के तहत हवाई मार्ग से बच्ची को उपचार के लिए अहमदाबाद भेजा गया और सफल हृदय सर्जरी कराई गई।

    सर्जरी के बाद बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रही है। रामायण साह ने राज्य सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बाल हृदय योजना आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने अन्य अभिभावकों से भी अपील की कि यदि किसी बच्चे में हृदय रोग के लक्षण दिखाई दें तो समय रहते जांच कराकर इस योजना का लाभ अवश्य उठाएं।

    बाल हृदय योजना के तहत जांच और इलाज कराया जा रहा है। अब तक 94 बच्चों का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है। अधिक से अधिक बच्चों की जांच और इलाज मिल सके इस पर विभाग का पूरा फोकस है।
    डॉ रमेश चंद्रा, एसीएमओ बेतिया