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    बेतिया में 9 साल बाद मिला बिछड़ा परिवार, स्क्रीन पर पत्नी को देखते ही छलक पड़े पति के आंसू

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 05:28 PM (IST)

    बेतिया के सखी वन स्टॉप सेंटर की पहल पर नौ साल से बिछड़ा एक परिवार फिर से मिल गया। कर्नाटक में मिली सुषमा को लंबी प्रक्रिया के बाद उनके पति मनोज गिरी क ...और पढ़ें

    सखी सेंटर में स्वजन के साथ महिला। सौ. प्रशासन

    सखी सेंटर में स्वजन के साथ महिला। सौ. प्रशासन 

    जागरण संवाददाता, बेतिया । जिले की सखी वन स्टॉप सेंटर की पहल से नौ वर्षों से बिछड़ा एक परिवार फिर से एक हो गया। वर्ष 2017 से लापता सुषमा का पता कर्नाटक के उडुपी स्थित वन स्टॉप सेंटर में चलने के बाद दोनों राज्यों के प्रशासनिक समन्वय और लंबी प्रक्रिया के जरिए शुक्रवार को उन्हें उनके पति मनोज गिरी के सुपुर्द कर दिया गया।

    पुनर्मिलन के दौरान पति-पत्नी की आंखें नम हो गईं और परिवार के सदस्यों ने प्रशासन के प्रति आभार जताया।वरीय उप समाहर्ता सह नोडल पदाधिकारी रोचना माद्री की मौजूदगी में सखी वन स्टॉप सेंटर में सभी औपचारिकताएं पूरी कर महिला को उनके पति के हवाले किया गया।

    इस अवसर पर रोचना माद्री ने कहा कि सखी वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य केवल संकटग्रस्त महिलाओं को आश्रय देना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षा, सम्मान और उनके परिवार व समाज से पुनः जोड़ना भी है।

    पति और गांव का नाम बता रही महिला

    केंद्र प्रशासक रश्मि कुमारी ने बताया कि कर्नाटक के वन स्टॉप सेंटर से सूचना मिली थी कि वहां रह रही महिला केवल अपने पति और गांव का नाम बता पा रही थी। जांच में महिला की पहचान सिकटा प्रखंड के गोपालपुर थाना क्षेत्र के विशम्भरा गांव निवासी सुषमा के रूप में हुई।

    इसके बाद फरवरी 2026 में उनके पति मनोज गिरी की वीडियो कॉल के माध्यम से पहचान कराई गई। स्क्रीन पर पत्नी को देखते ही उन्होंने उनकी पहचान की पुष्टि करते हुए उन्हें सुरक्षित वापस लाने का अनुरोध किया।

    जीवित होने की उम्मीद छोड़ चुके थे स्वजन

    मनोज गिरी ने बताया कि 28 फरवरी 2005 को उनका विवाह सुषमा से हुआ था। वर्ष 2017 में वह एक बच्चे के साथ घर से चली गई थीं। उस समय परिवार में चार बच्चे थे और वह गर्भवती भी थीं।

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    काफी खोजबीन के बाद भी उनका कोई पता नहीं चला, जिससे परिवार ने उनके जीवित होने की उम्मीद छोड़ दी थी। ऐसे में सखी वन स्टॉप सेंटर से पत्नी के जीवित होने की सूचना मिलना उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था।

    कर्नाटक से सुरक्षित बेतिया लाया

    पहचान की पुष्टि के बाद सखी वन स्टॉप सेंटर, बेतिया ने कर्नाटक प्रशासन से समन्वय स्थापित कर सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कराईं। इसके बाद सुषमा को सुरक्षित बेतिया लाया गया और उनके परिवार को सौंप दिया गया।

    केंद्र प्रशासक ने बताया कि मनोज गिरी की दो बेटियां अभी कर्नाटक की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की देखरेख में हैं। उन्हें भी शीघ्र पश्चिम चंपारण लाकर परिवार से मिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    • कर्नाटक से मिली सूचना के बाद शुरू हुई पड़ताल, वीडियो काल से हुई पहचान की पुष्टि
    • सखी वन स्टॉप सेंटर और दोनों राज्यों के प्रशासनिक समन्वय से संभव हुआ भावुक पुनर्मिलन
    • दो बेटियां अभी कर्नाटक में सीडब्ल्यूसी की देखरेख में, उन्हें भी परिवार से मिलाने की प्रक्रिया शुरू