बगहा और लौरिया में खुलेगा EV चार्जिंग सेंटर, बेतिया में जमीन के लिए अटकी योजना
बेतिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की कमी से लोग परेशान हैं। बगहा और लौरिया के लिए प्रस्ताव भेजे गए ...और पढ़ें

बगहा और लौरिया में खुलेगा EV चार्जिंग सेंटर, बेतिया में जमीन के लिए अटकी योजना (AI Generated Image)
HighLights
बेतिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन न होने से ई-रिक्शा चालक परेशान।
बगहा, लौरिया में प्रस्ताव, बेतिया में भूमि की तलाश जारी।
जागरण संवाददाता, बेतिया। पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने तथा स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित कर रही है। वाहन खरीद पर अनुदान, टैक्स में छूट और सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने जैसी योजनाओं का असर अब जिले में भी दिखने लगा है।
जिले में दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके मद्देजनर बगहा और लौरिया में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी स्वीकृति नहीं मिली है।
वहीं, बेतिया में चार्जिंग स्टेशन के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने को लेकर नगर निगम को पत्र भेजा गया है। अब तक स्थान तय नहीं होने के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी है। ऐसे में जिले में बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहनों के अनुपात में चार्जिंग स्टेशन की सुविधा विकसित नहीं होने से इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद से लोग कतरा रहे हैं।
ई-रिक्शा चालक संजय कुमार ने बताया कि सार्वजनिक चार्जिंग सेंटर नहीं होने से काफी परेशानी होती है। कई बाद बैट्री डिस्चार्ज होने पर यात्रियों को गंतव्य तक नहीं पहुंचा पाते। नगर में इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा की भरमार है। जिले में करीब आठ हजार इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के बाद भी नगर में कहीं भी सार्वजनिक चार्जिंग सेंटर नहीं है। लोग अपने-अपने घरों पर इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करते हैं। पेट्रोल पंप पर भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना है, ताकि इलेक्ट्रिक वाहन डिस्चार्ज होने पर उसे चार्ज किया जा सके।
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ई-रिक्शा चालक नथु ठाकर, असगर मियां, महेंद्र महतो, सुजीत प्रसाद ने बताया कि एक बार फुल चार्ज कर लेने पर ई-रिक्शा 80 से 90 किलोमीटर तक आसानी से चलता है। रात को घर पर ई-रिक्शा को फुल चार्ज किया जाता है। जिससे दिन भर का काम चल जाता है, लेकिन कभी कभार दूर तक सफर करना होता है तो परेशानी होती है।
बाहर से आने वाले चालकों की बढ़ जाती है मुश्किल
सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन नहीं होने का सबसे अधिक असर दूसरे क्षेत्रों से आने वाले इलेक्ट्रिक वाहन चालकों पर पड़ता है। रास्ते में बैटरी खत्म होने पर उन्हें चार्जिंग के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। कई बार लोगों से अनुरोध कर निजी कनेक्शन से वाहन चार्ज कराना पड़ता है।
ई-रिक्शा ऑटो चालक संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र पासवान ने कहा कि नगर में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन की मांग लंबे समय से की जा रही है। इससे चालकों को अनावश्यक खर्च और परेशानी से राहत मिलेगी। जिले में कुछ निजी चार्जिंग स्टेशन हैं, जहां ई-रिक्शा चार्ज करने के लिए 200 से 250 रुपये तक वसूले जाते हैं।
जिले के विभिन्न इलाकों व नगर में इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन के लिए प्रयास किया जा है। इस दिशा में काम हो रहा है। जल्द ही इसके सार्थक परिणाम मिलेंगे। - विनोद कुमार सिंह, मोटरयान निरीक्षक, बेतिया