वायरल फीवर, खुजली और आंखों में जलन... बारिश के बाद बीमारियों ने बढ़ाई चिंता, GMCH का मेडिसिन वार्ड फुल
बारिश के बाद बढ़ी उमस से बेतिया के जीएमसीएच में वायरल संक्रमण, त्वचा और आंखों के रोगों के मरीज बढ़े हैं। अस्पताल की ओपीडी में 1,842 मरीज पहुंचे और मेड ...और पढ़ें

जीएमसीएच में मरीजों की लंबी कतार।
HighLights
बारिश के बाद उमस से मौसमी बीमारियों में वृद्धि।
जीएमसीएच बेतिया में 1,842 मरीज, मेडिसिन वार्ड फुल।
वायरल, त्वचा, नेत्र संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े।
जागरण संवाददाता, बेतिया । लगातार हो रही वर्षा के बाद बढ़ी उमस अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। मौसम में आए अचानक बदलाव ने वायरल संक्रमण, त्वचा रोग और आंखों के संक्रमण के मामलों में तेजी ला दी है।
इसका सबसे बड़ा असर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल (जीएमसीएच), बेतिया की ओपीडी और आईपीडी सेवाओं पर देखने को मिल रहा है। सोमवार को अस्पताल की ओपीडी में 1,842 मरीज इलाज के लिए पहुंचे।
मरीजों की बढ़ती संख्या का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मेडिसिन वार्ड के सभी बेड भर चुके हैं और नए मरीजों को दूसरे वार्डों में भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है।
एक सप्ताह से बढ़ रहे मरीज
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पिछले एक सप्ताह से मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सबसे अधिक दबाव मेडिसिन, चर्म रोग और नेत्र रोग विभाग पर है। वर्षा के कारण कई इलाकों में जलजमाव और उमस बढ़ने से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ा है।
इसके साथ ही मौसम में लगातार बदलाव से वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अस्पताल पहुंचने वाले अधिकांश मरीज बुखार, सर्दी-जुकाम, त्वचा पर चकत्ते, खुजली, आंखों में जलन और पानी आने जैसी शिकायतों से पीड़ित हैं।
मेडिसिन विभाग में सबसे अधिक मरीज
अस्पताल प्रबंधक कुमार विशाल ने बताया कि सोमवार को सबसे अधिक मरीज मेडिसिन विभाग में पहुंचे। चर्म रोग विभाग में भी सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक मरीजों का उपचार किया गया।
नेत्र, शिशु, महिला, ऑर्थो, ईएनटी और अन्य विभागों में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने बताया कि मेडिसिन वार्ड पूरी तरह भर चुका है। ऐसे में जरूरत के अनुसार मरीजों को अन्य वार्डों में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
दूषित पानी और गंदगी बीमारी का कारण
चिकित्सकों का कहना है कि मानसून के दौरान तापमान और आर्द्रता में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण वायरल फीवर, टाइफाइड, डायरिया, डेंगू, मलेरिया और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मौसम में दूषित पानी और गंदगी संक्रमण फैलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। डॉक्टरों ने लोगों से साफ पानी पीने, घर और आसपास जलजमाव नहीं होने देने, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने की अपील की है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि लगातार बुखार, खांसी, त्वचा पर चकत्ते, आंखों में लालिमा या पानी आने जैसी समस्या हो तो स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लें।
खबरें और भी
विभागवार मरीज
मेडिसिन : 650
चर्म रोग : 695
नेत्र रोग : 207
शिशु रोग : 105
महिला रोग : 50
ऑर्थो : 40
ईएनटी, कैंसर व अन्य विभाग : 95
वर्षा के बाद उमस और जलजमाव के कारण मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। लोग साफ-सफाई रखें, ताजा भोजन करें और बुखार या अन्य लक्षण होने पर तुरंत अस्पताल आएं।
डॉ. अनिल कुमार, अधीक्षक, जीएमसीएच, बेतिया।