बेतिया में 15 साल बाद फिर गूंजे संगीत के सुर, एक शिक्षक ने बदल दी पूरे विभाग की तस्वीर
बेतिया के राम लखन सिंह यादव महाविद्यालय का संगीत विभाग 15 साल बाद सहायक प्राध्यापक डॉ. रामचंद्र पासवान की नियुक्ति से फिर से सक्रिय हो गया है। अब बड़ी ...और पढ़ें

पश्चिम चंपारण के बेतिया में संगीत की शिक्षा लेते छात्र । जागरण
HighLights
15 साल बाद आरएलएसवाई कॉलेज का संगीत विभाग जीवंत हुआ।
डॉ. रामचंद्र पासवान की नियुक्ति से विभाग को नई जान मिली।
अब कॉलेज में ही प्रायोगिक परीक्षाएं और नियमित कक्षाएं हो रही हैं।
संदेश तिवारी, बेतिया (पश्चिम चंपारण) । नगर स्थित राम लखन सिंह यादव महाविद्यालय का संगीत विभाग करीब 15 वर्षों बाद फिर से जीवंत हो गया है। लंबे समय तक नियमित शिक्षक नहीं रहने से विभाग लगभग निष्क्रिय हो गया था।
छात्र-छात्राएं नियमित कक्षाओं से वंचित रहते थे और प्रायोगिक परीक्षा देने के लिए उन्हें मोतिहारी जाना पड़ता था। 12 जनवरी को सहायक प्राध्यापक डॉ. रामचंद्र पासवान की नियुक्ति के बाद विभाग में नई जान आ गई है।
अब महाविद्यालय परिसर में संगीत के सुर गूंज रहे हैं और बड़ी संख्या में विद्यार्थी नियमित रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वर्तमान में स्नातक (मेजर) के प्रथम सेमेस्टर (2026-30) में 77, द्वितीय सेमेस्टर (2025-29) में 81, तृतीय सेमेस्टर (2024-28) में 66 तथा चतुर्थ सेमेस्टर (2023-27) में 62 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
वहीं स्नातकोत्तर के द्वितीय सेमेस्टर में 46 और चतुर्थ सेमेस्टर में 37 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इसके अतिरिक्त माइनर कोर्स में करीब 275 विद्यार्थी संगीत की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।महाविद्यालय में विद्यार्थियों को शास्त्रीय, लोक और सुगम संगीत का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
अभ्यास के दौरान हारमोनियम, तबला, नाल, ढोलक, इलेक्ट्रॉनिक तबला और तानपुरा जैसे वाद्य यंत्रों का उपयोग कराया जा रहा है। नियमित कक्षाओं के कारण विद्यार्थियों की संगीत के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है।
एक शिक्षक के भरोसे पूरा विभाग
संगीत विभाग में तीन पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल सहायक प्राध्यापक डॉ. रामचंद्र पासवान ही कार्यरत हैं। वे अकेले ही स्नातक और स्नातकोत्तर की सभी कक्षाओं को संचालित कर रहे हैं।
उनकी देखरेख में अब महाविद्यालय परिसर में ही संगीत की प्रायोगिक परीक्षाएं आयोजित होने लगी हैं, जिससे विद्यार्थियों को काफी सुविधा मिली है।विभाग को और सशक्त बनाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा भविष्य में इसके विस्तार की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
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नियमित शिक्षक की नियुक्ति के बाद संगीत विभाग में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण शुरू हुआ है। विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि युवा संगीत शिक्षा के प्रति गंभीर हैं।
--प्रो. डॉ. अभय कुमार , प्राचार्य, आरएलएसवाई