जमीन खरीदने-बेचने वाले ध्यान दें! बिहार में बदल रहे रजिस्ट्री के नियम, कैटेगरी बदलकर नहीं बचा पाएंगे टैक्स
बेतिया में जल्द ही भूमि मूल्यांकन की नई व्यवस्था लागू होगी, जिससे जमीन रजिस्ट्री में राजस्व चोरी और श्रेणी बदलकर कम स्टांप शुल्क पर निबंधन कराने पर रो ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
अब आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक उपयोग से तय होगी जमीन की कीमत
जमीन रजिस्ट्री में नया सिस्टम लागू, गलत श्रेणी दिखाकर कम शुल्क देने पर रोक
अब नहीं मिलेगा कम स्टांप शुल्क का फायदा, जमीन मूल्यांकन होगा पूरी तरह पारदर्शी
जागरण संवाददाता, बेतिया (पश्चिम चंपारण) । जिले में भूमि मूल्यांकन की नई व्यवस्था जल्द लागू होने जा रही है। नई प्रणाली लागू होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री में राजस्व की चोरी और श्रेणी बदलकर कम स्टांप शुल्क पर निबंधन कराने की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगेगी।
इससे भूमि मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और विवादमुक्त होगी। वर्तमान व्यवस्था में प्रधान सड़क, मुख्य सड़क और शाखा सड़क के आधार पर अलग-अलग दरें निर्धारित हैं।
इसका लाभ उठाकर कई मामलों में बहुमूल्य जमीन को कम मूल्य वाली श्रेणी में दिखाकर रजिस्ट्री कराई जाती रही है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। नई व्यवस्था इसी तरह की अनियमितताओं को रोकने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में सड़क आधारित वर्गीकरण की जटिलता काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। अब जमीन का मूल्यांकन उसके वास्तविक उपयोग के आधार पर आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक श्रेणियों में किया जाएगा।
इससे सड़क की श्रेणी बदलकर कम स्टांप शुल्क देने की संभावना खत्म हो जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी मूल्यांकन की प्रक्रिया बदलेगी। प्रधान और मुख्य सड़कों के किनारे स्थित जमीन का मूल्यांकन उसकी बढ़ती व्यावसायिक उपयोगिता के आधार पर किया जाएगा, जबकि शाखा सड़कों के किनारे स्थित भूमि का मूल्यांकन गैर-आवासीय अथवा कृषि भूमि के रूप में होगा। इससे बाजार मूल्य के अनुरूप निबंधन शुल्क तय किया जा सकेगा।
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नई व्यवस्था का उद्देश्य निबंधन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और विवादमुक्त बनाना है। जमीन के वास्तविक उपयोग और उसकी स्थिति के आधार पर मूल्यांकन होने से राजस्व चोरी पर प्रभावी रोक लगेगी और सरकार के साथ-साथ आम लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।
--गिरीश चंद्र,जिला अवर निबंधन पदाधिकारी, बेतिया