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    बिहार में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर समेत छह जिलों के किसानों को बेहतर सिंचाई का लाभ

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 03:01 PM (IST)

    पश्चिम चंपारण समेत उत्तर बिहार के छह जिलों के किसानों को रबी फसल के लिए बेहतर सिंचाई मिलेगी। पूर्वी नहर प्रणाली के 33 करोड़ रुपये से अधिक के जीर्णोद्ध ...और पढ़ें

    बिहार में पश्चिम चंपारण जिले में तिरहुत मुख्य नहर। जागरण

    बिहार में पश्चिम चंपारण जिले में तिरहुत मुख्य नहर। जागरण

    HighLights

    1. पूर्वी नहर प्रणाली का 33 करोड़ से अधिक का पुनर्स्थापन कार्य।

    2. रबी मौसम से पहले नहरों की जल प्रवाह क्षमता में वृद्धि।

    3. पश्चिम चंपारण सहित छह जिलों के लाखों किसान लाभान्वित होंगे।

    जागरण संवाददाता, बेतिया । वैसे तो खरीफ मौसम में किसानों को कुल क्षमता का करीब 50 प्रतिशत ही पानी मिला है, लेकिन रबी मौसम में फसलों को बेहतर सिंचाई की सुविधा मिलेगी। ऐसा इसलिए कि पश्चिम चंपारण जिले से निकलने वाली पूर्वी नहर प्रणाली में 33 करोड़ से अधिक रुपये से पुनर्स्थापन कार्य पूरा हो जाएगा।

    इससे नहरों में जल प्रभाव क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दोन नहर, त्रिवेणी नगर में पुनर्स्थापन कार्य शुरू हो गया है। यह काम रबी मौसम के शुरू होने से पहले होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    अब तक पूर्वी नहर प्रणाली में दोन नहर से कुल डिस्चार्ज क्षमता 6200 क्यूसेक की जगह 850 क्यूसेेक डिस्चार्ज हो रहा है, जिसमें सीमावर्ती क्षेत्र के अलावा नेपाल को भी पानी जाता है। इसी प्रकार त्रिवेणी शाखा नहर में 700 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हो रहा है, जबकि क्षमता 2500 क्यूसेक का है।

    जबकि तिरहुत मुख्य नहर से 4500 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हो रहा है, जो अपनी क्षमता का 25 प्रतिशत ही है। पुनस्र्थापन कार्य पूरा होने के बाद सभी नहरों से पूरी क्षमता मे पानी का प्रवाह होने लगेगा। इससे नहर पर निर्भर किसानों को सिंचाई की समस्या नहीं रहेगी।

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    पूर्वी नहर प्रणाली से जिले के 1.75 लाख हेक्टेयर व उत्तर बिहार के छह जिलों के 6 लाख से अधिक भूमि में सिंचाई होती है। ऐसे में बड़ी संख्या में इस नहर से किसान लाभान्वित होंगे।

    5400 क्यूसेक की जगह 850 का ही डिस्चार्ज

    उधर तिरहुत मुख्य नहर के 163 किलोमीटर से पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, शिवहर, समस्तीपुर एवं वैशाली से अपनी क्षमता 5400 क्यूसेक की जगह 850 क्यूसेक ही पानी ले रहा है। इसका मुख्य कारण वहां होने वाला पुनर्स्थापन कार्य है।

    सभी आधा दर्जन जिलों में इस नहर प्रणाली से 6 लाख हेक्टेयर से अधिक खेतों की सिंचाई होती है। खरीफ सीजन में तिरहुत मुख्य नहर से कम क्षमता में ही पानी का प्रवाह हुआ है।

    वीबीजीरामजी से 200 से अधिक सिंचाई योजनाओं पर हो चुका है कार्य

    एनईपी के निदेशक पुरुषोत्तम त्रिवेदी के अनुसार वीबीजीरामजी योजना के तहत जिले में 200 से अधिक सिंचाई योजनाओं पर काम पूरा किया गया है, जिसमें वितरणियों की सफाई हुई है। इससे नहरों से सिंचाई व्यवस्था को बल मिलेगा।