राबड़ी देवी आवास विवाद: मंत्री नंदकिशोर राम का आरोप, 'दलित होने के कारण नहीं खाली कर रहीं बंगला'
Bihar Government Quarter Dispute: बिहार के मंत्री नंदकिशोर राम ने आरोप लगाया है कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी उन्हें आवंटित सरकारी बंगला खाली नहीं ...और पढ़ें

रामनगर में मीडिया से बात करते मंत्री नंदकिशोर राम। फोटो: जागरण

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संवाद सूत्र, रामनगर (पश्चिम चंपारण)। Rabri Devi Circular Road Residence: बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। नीतीश-सम्राट चौधरी सरकार में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम ने इस पूरे विवाद पर बेहद तल्ख प्रतिक्रिया दी है।
शनिवार को पश्चिम चंपारण के रामनगर स्थित एक विवाह भवन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने सीधे तौर पर नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री पर जातिगत भेदभाव का आरोप मढ़ दिया।
मंत्री ने कहा कि चूंकि वह दलित समाज से आते हैं, शायद यही वजह है कि राबड़ी देवी उन्हें आवंटित किया गया सरकारी बंगला खाली नहीं कर रही हैं।
मुझे आवंटित हुआ 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला
कैबिनेट मंत्री नंदकिशोर राम ने मामले की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि मंत्री बनने के बाद उन्हें अब तक पटना में कोई सरकारी आवास आवंटित नहीं हुआ था।
इसके बाद राज्य सरकार के नियमानुसार उन्हें पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड वाला वह सरकारी बंगला आवंटित किया गया, जिसमें फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी रह रही हैं। सरकारी स्तर पर आवंटन आदेश जारी होने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा आवास खाली नहीं किया जा रहा है।
मेरा दलित होना इसकी वजह
रामनगर सुरक्षित (SC) विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्री नंदकिशोर राम ने भावुक और आक्रामक होते हुए कहा, "मैं समाज के सबसे निचले और वंचित (दलित) वर्ग से आता हूं।
मेरे जैसा एक साधारण दलित व्यक्ति जब सरकार में मंत्री बनता है और उसे नियमानुसार आवास आवंटित होता है, तो उसे वहां जाने से रोका जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा आवास खाली करने से मना करने के पीछे मेरा दलित समाज से होना भी एक बड़ा कारण हो सकता है।"
उन्होंने आगे कहा कि यह व्यक्तिगत रूप से उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक है और पूरे समाज के लिए भी एक गंभीर व चिंतन का विषय है।
नियम और कानून सभी के लिए समान
प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने लोकतांत्रिक और प्रशासनिक व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि सरकार द्वारा जारी निर्देशों का अक्षरशः पालन करना राज्य के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी होती है।
जब किसी व्यक्ति को वैधानिक रूप से कोई सरकारी संपत्ति या आवास आवंटित किया जाता है, तो संबंधित पक्ष को कानून और सरकारी आदेश का सम्मान करते हुए उसे सौंप देना चाहिए।
उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि उनके मामले में सरकार का निर्णय लागू नहीं हो पा रहा है, जबकि नियम और कानून वीआईपी से लेकर आम जनता तक सभी के लिए समान होने चाहिए।
मंत्री ने अंत में कहा कि वह सरकार और प्रशासन के शीर्ष निर्णयों का पूरा सम्मान करते हैं तथा उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस गंभीर मामले का समाधान नियमों और वैधानिक कानून के अनुरूप जल्द ही सुनिश्चित होगा।