बिहार में बाघ के हमले में घायल किसान ने भी तोड़ा दम, बाघ की एक दिन पहले हो चुकी थी मौत
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे इलाके में बाघ के हमले में गंभीर रूप से घायल 62 वर्षीय अकलू यादव की गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घ ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है। (फोटो-AI जनरेटेड)
जागरण संवाददाता, बगहा (पश्चिम चंपारण)। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से सटे इलाके में इंसान और वन्यजीव के बीच बढ़ते संघर्ष ने एक और जान ले ली। गुरुवार को बाघ के हमले में गंभीर रूप से घायल 62 वर्षीय अकलू यादव ने शुक्रवार को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
उल्लेखनीय है कि किसान पर हमले के कुछ समय बाद हमलावर बाघ की भी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत और शोक का माहौल है।
खेत के पास बकरी चरा रहे थे अकलू
जानकारी के अनुसार, वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना वन प्रमंडल-दो के वाल्मीकिनगर वन क्षेत्र से सटे हाथी मलखंता वनक्षेत्र संख्या टी-36 के समीप गुरुवार की दोपहर अकलू यादव खेत के पास बकरी चरा रहे थे। तभी जंगल से निकले बाघ ने उन पर अचानक हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
इलाज के दौरान तोड़ा दम
घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों ने उन्हें तत्काल अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति देखते हुए अनुमंडलीय अस्पताल, बगहा रेफर कर दिया। वहां से भी हालत नाजुक होने पर उन्हें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां शुक्रवार की दोपहर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
आवेदन मिलने पर मिलेगा मुआवजा
वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि घायल अकलू यादव की इलाज के दौरान मौत होने की सूचना विभाग को मिल गई है। मृतक के स्वजन से आवेदन प्राप्त होने के बाद विभागीय प्रावधानों के अनुसार पीड़ित परिवार को मुआवजा सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
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गांवों में दहशत, गश्त बढ़ाने की मांग
लगातार हो रहे बाघ के हमलों से वाल्मीकिनगर वन क्षेत्र से सटे गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से बाघ आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं, जिससे खेतों में काम करना और मवेशी चराना भी जोखिम भरा हो गया है।
लोगों ने वन विभाग से गश्त बढ़ाने, निगरानी तेज करने और बाघों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। अकलू यादव की मौत के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।