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    पश्चिम चंपारण में गर्लफ्रेंड की हत्या में प्रेमी को उम्रकैद, मोबाइल सीडीआर और परिस्थितिजन्य साक्ष्य बने आधार

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 03:54 PM (IST)

    पश्चिम चंपारण कोर्ट ने स्वाभिमान बटालियन की महिला कर्मी पूजा देवी की हत्या मामले में प्रेमी अजय सिंह को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा ...और पढ़ें

    सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस अभिरक्षा में अभियुक्त व अधिवक्ता। फोटो: जागरण

    सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस अभिरक्षा में अभियुक्त व अधिवक्ता। फोटो: जागरण

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    संक्षेप में पढ़ें

    संवाद सहयोगी, बगहा (पश्चिम चंपारण)। West Champaran Court: व्यवहार न्यायालय ने स्वाभिमान बटालियन की महिला कर्मी पूजा देवी की हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाया है।

    अदालत ने आरोपी प्रेमी अजय सिंह उर्फ कृष्णा कुमार सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

    न्यायालय ने सुनाया फैसला

    जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने यह फैसला सुनाया। जुर्माना न देने पर दोषी को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। मृतका पूजा देवी स्वाभिमान बटालियन वाल्मीकिनगर में खाना बनाने का काम करती थी।

    कार्यस्थल पर हुई थी पहचान

    आरोपी अजय सिंह उसी बटालियन में मुंशी के पद पर कार्यरत था। कार्यस्थल पर ही दोनों के बीच पहचान और प्रेम संबंध बने थे। सुनवाई के दौरान मोबाइल टावर लोकेशन और सीडीआर से दोनों की मौजूदगी साबित हुई।

    फॉरेंसिक रिपोर्ट से खुलासा

    अगले दिन पूजा देवी का शव पानी में तैरता हुआ बरामद किया गया था। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई। न्यायालय ने माना कि हत्या के बाद शव को नहर में फेंका गया था।

    कीचड़ सने कपड़ों में दिखा

    घटना की रात आरोपी को गीले व कीचड़ सने कपड़ों में देखा गया था। इतना ही नहीं मृतका का मोबाइल भी आरोपी के पास से बरामद हुआ था। इन मजबूत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष को संदेह से परे मजबूत किया।

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    सजा सुनाते वक्त अदालत ने कहा कि समाज में कानून का भय जरूरी है। आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(2) के तहत सजा दी गई। जमा अर्थदंड की राशि मृतका के आश्रितों को देने का आदेश है।

    अपर लोक अभियोजक मन्नु राव ने अदालत में सीडीआर व एफएसएल रिपोर्ट पेश की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। इसके अलावा दस महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य भी अदालत में प्रस्तुत किए गए।