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भारत-नेपाल सीमा के पास के दो सगे भाइयों ने NEET UG 2026 में मारी बाजी, मैनाटांड में भव्य सम्मान

Published: Sun, 19 Jul 2026 07:23 PM (IST)

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित पश्चिम चंपारण के मैनाटांड के दो सगे भाइयों, शिवम और अभय ने NEET-UG परीक्षा में सफलता ...और पढ़ें

इस सफलता के बाद भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। फोटो: जागरण

इस सफलता के बाद भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। फोटो: जागरण

HighLights

  1. मैनाटांड के शिवम और अभय ने NEET-UG में सफलता पाई।

  2. भारत-नेपाल सीमा के पिछड़े क्षेत्र से प्रेरणादायक उपलब्धि।

  3. दोनों भाइयों को भव्य समारोह में सम्मानित किया गया।

संवाद सूत्र, इनरवा (पश्चिम चंपारण)। India Nepal Border Topper: भारत-नेपाल सीमा पर स्थित पश्चिम चंपारण के सुदूर मैनाटांड इलाके से एक बेहद सुखद और प्रेरणादायी कहानी सामने आई है।

इस पिछड़े ग्रामीण परिवेश से आने वाले दो सगे भाइयों ने एक साथ देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में सफलता का परचम लहराकर इतिहास रच दिया है।

सगे भाइयों का कमाल

मैनाटांड थाना क्षेत्र के मैनाटांड गांव के रहने वाले लक्ष्मण साह के दोनों होनहार बेटों, शिवम कुमार और अभय कुमार ने नीट-यूजी परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर बाजी मारी है। दोनों भाइयों की इस दोहरी सफलता ने पूरे परिवार सहित पूरे जिले को गौरवान्वित किया है।

गांव में जश्न का माहौल

जैसे ही दोनों भाइयों के एक साथ डॉक्टर बनने की राह साफ होने की खबर मिली, परिजनों और रिश्तेदारों की आंखें खुशी से छलक उठीं। गांव में उत्साह का माहौल बन गया और बधाई देने के लिए शुभचिंतकों का तांता लग गया।

समारोह पूर्वक सम्मान

इस ऐतिहासिक गौरवमयी उपलब्धि को लेकर क्षेत्र में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) नीरज कुमार और प्रमुख सुशीला देवी ने दोनों भाइयों को अंगवस्त्र और मेडल देकर सम्मानित किया।

गुरुओं का बढ़ा मान

हाई स्कूल रमपुरवा के प्रधानाध्यापक हरि प्रकाश पांडेय ने इस मौके पर विद्यालय परिवार की ओर से दोनों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि एक ही साधारण परिवार के दो बच्चों का देश स्तर की परीक्षा में एक साथ चयनित होना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

बढ़ेगा युवाओं का उत्साह

समारोह में मौजूद प्रबुद्ध नागरिकों ने शिवम और अभय की इस अद्वितीय सफलता को क्षेत्र के लिए नजीर बताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती इलाके में संसाधनों की कमी के बावजूद इन दोनों ने जो कर दिखाया है, वह बेमिसाल है।

प्रेरणा बनेगा यह सफर

यह सफलता केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे मैनाटांड क्षेत्र के उन तमाम छात्र-छात्राओं के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होगी जो बड़े शहरों में जाए बिना डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं।

लक्ष्य हासिल करने की सीख

ग्रामीणों के अनुसार, इन दोनों भाइयों की जुगलबंदी और कठिन परिश्रम ने साबित कर दिया है कि अगर लगन सच्ची हो तो कोई भी सीमा सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। अब यह जोड़ी भविष्य के प्रतियोगियों को बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।

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