बिहार में वन्यजीव संरक्षण की नई पहल, बेतिया में 80 लाख से खुलेगा पहला हिरण रेस्क्यू सेंटर
Bihar Wildlife Conservation: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के उदयपुर सरैयामन में राज्य का पहला हिरण रेस्क्यू सेंटर 80 लाख रुपये की लागत से खुलेगा। यह के ...और पढ़ें

उदयपुर सरैयामन में पहला विशेष हिरण रेस्क्यू सेंटर खुलने जा रहा। फाइल फोटो

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शशि कुमार मिश्र, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। Deer Rescue Center Bettiah: बिहार में वन्यजीवों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक बेहद सुखद और उम्मीदों भरी खबर सामने आई है।
पश्चिम चंपारण जिले के खूबसूरत प्राकृतिक स्थल उदयपुर सरैयामन में राज्य का पहला विशेष 'हिरण रेस्क्यू सेंटर' खुलने जा रहा है।
80 लाख की योजना
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर वन विभाग लगभग 80 लाख रुपये खर्च करेगा। इसका विस्तृत प्रस्ताव सूबे के मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक के माध्यम से स्वीकृति के लिए 'केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकार' नई दिल्ली को भेजा गया है। हरी झंडी मिलते ही इसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
मिलेगा आधुनिक इलाज
प्रस्तावित केंद्र में घायल, बीमार और असहाय हिरणों के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। यहां विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की तैनाती होगी और बीमार हिरणों को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष आइसोलेशन शेड बनाए जाएंगे।
15 हेक्टेयर में हरा-भरा मैदान
हिरणों को प्राकृतिक माहौल और पर्याप्त भोजन देने के लिए 15 हेक्टेयर क्षेत्र में एक विशाल घास का मैदान विकसित किया जाएगा। रामसर आर्द्रभूमि (Ramsar Wetland) के लिए चयनित सरैयामन का यह 8.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र प्राकृतिक वनस्पतियों से समृद्ध है।
अतीत से मिली सीख
वर्ष 2017 की भीषण बाढ़ में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के 300 से अधिक हिरण गंडक नदी की धारा में बह गए थे। तब 250 से अधिक हिरणों को उदयपुर में सुरक्षित बचाकर रखा गया था। इस नए सेंटर के बनने से भविष्य में ऐसी आपदाओं से हिरणों को तुरंत सुरक्षा मिलेगी।
वन्यजीवों को नया जीवन
वीटीआर और उदयपुर क्षेत्र में हिरणों की बड़ी संख्या मौजूद है। समय पर इलाज और सुरक्षित आवास मिलने से न सिर्फ इनकी जान बचेगी, बल्कि इस क्षेत्र की जैव विविधता भी मजबूत होगी। यह केंद्र बिहार में इको-टूरिज्म और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक नया अध्याय लिखेगा।
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डीएफओ ने जताई उम्मीद
बेतिया डिविजन के डीएफओ पंकज कुमार ने बताया कि यह केंद्र केवल बचाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हिरणों की पूरी देखभाल और पुनर्वास की व्यवस्था करेगा। इस पहल से पश्चिम चंपारण को वन्यजीव संरक्षण के राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई और गौरवान्वित पहचान मिलेगी।
प्रस्तावित केंद्र केवल घायल हिरणों के बचाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके उपचार, देखभाल, पुनर्वास और संरक्षण की भी समुचित व्यवस्था यहां की जाएगी। इससे वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में पश्चिम चंपारण को नई पहचान मिलेगी।
पंकज कुमार,डीएफओ डिवीजन, बेतिया