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    Chaitra Navratri 2026 के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, कल चंद्रघंटा की आराधना

    By Pankaj Kumar Edited By: Ajit kumar
    Updated: Fri, 20 Mar 2026 06:15 PM (IST)

    चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मैनाटांड़ में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा श्रद्धापूर्वक की गई। मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। आचार्य सुनील मिश्रा के ...और पढ़ें

    चैत्र नवरात्रि के दौरान मां की आराधना करते श्रद्धालु। फोटो: जागरण

    चैत्र नवरात्रि के दौरान मां की आराधना करते श्रद्धालु। फोटो: जागरण 

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    संवाद सूत्र, मैनाटांड़ (पश्चिम चंपारण)। Maa Brahmacharini Puja: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन शुक्रवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्धापूर्वक की गई। मंदिरों और पूजा पंडालों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जहां महिला और पुरुष भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

    आचार्य सुनील मिश्रा और राजेश पांडेय के अनुसार, मां दुर्गा का यह स्वरूप साधकों और भक्तों को अनंत फल देने वाला है। उनकी उपासना से त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार की भावना का विकास होता है।

    कहा, नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा (Maa Chandraghanta Worship)की जाएगी, जिनका स्वरूप अत्यंत शांतिदायक और कल्याणकारी माना जाता है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान होता है, इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।

    मां चंद्रघंटा का स्वरूप

    मां का वाहन सिंह है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है। उनके दस हाथों में खड्ग, त्रिशूल, गदा, धनुष-बाण, कमंडल और कमल जैसे अस्त्र-शस्त्र सुशोभित रहते हैं। उनका रूप युद्ध के लिए तत्पर रहने वाला है, जो भक्तों के दुखों का नाश करता है।

    पूजा विधि

    मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। सबसे पहले कलश पूजन कर देवी-देवताओं का आह्वान करें। इसके बाद मां को अक्षत, लाल पुष्प, सिंदूर, धूप और दीप अर्पित करें।

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    पूजा के दौरान इस मंत्र का जप अत्यंत फलदायी माना जाता है:
    “पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
    प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥”

    अंत में कपूर से आरती कर क्षमा प्रार्थना की जाती है।

    कैसे प्रसन्न होती हैं मां चंद्रघंटा?

    मां को दूध और उससे बने प्रसाद जैसे खीर या मिठाइयां अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दिन पीले, सुनहरे या भूरे रंग के वस्त्र धारण करना भी लाभकारी होता है।

    धार्मिक मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा से भय दूर होता है, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है। पूजा के दौरान घंटी बजाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है, जिससे वातावरण पवित्र होता है और मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है।