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    बिहार में चीनी उद्योग को मिलेगा नया जीवन? चनपटिया मिल पर बड़ी पहल

    By Alok Kumar Chaubey Edited By: Dharmendra Singh
    Updated: Tue, 07 Apr 2026 05:11 PM (IST)

    बिहार सरकार के चीनी उद्योग को मजबूत करने के प्रयासों के तहत, नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज की एक टीम ने चनपटिया चीनी मिल का निरीक्षण किया ...और पढ़ें

    बंद चीनी मिल के उपकरणों का जायजा लेते टीम के सदस्य। जागरण

    बंद चीनी मिल के उपकरणों का जायजा लेते टीम के सदस्य। जागरण

    HighLights

    1. NFCSF टीम ने चनपटिया चीनी मिल का गहन निरीक्षण किया।

    2. पुरानी मिल की मशीनें खराब, नई मिल की सिफारिश।

    3. गन्ना उत्पादन रिपोर्ट तय करेगी मिल का भविष्य।

    संवाद सूत्र, चनपटिया ( पश्चिम चंपारण ) । बिहार में चीनी उद्योग को मजबूत करने एवं तकनीकी कारणों से बंद चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने के लिए बिहार सरकार के करार करने के बाद नेशनल फेडरेशन आफ को-आपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (एनएफसीएसएफ) की तीन सदस्यीय टीम मंगलवार को चनपटिया चीनी मिल का निरीक्षण करने के लिए पहुंची।

    राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना संघ लिमिटेड, नई दिल्ली के मुख्य गन्ना सलाहकार डा. आरबी डौले के नेतृत्व में टीम ने मिल परिसर, मशीनों और आसपास के इलाके का जायजा लिया।

    टीम में तकनीकी सलाहकार मुरलीधर चौधरी एवं उप तकनीकी सलाहकार एस. सोमसुंदरम व सहायक गन्ना आयुक्त रेमंत झा, जिला सहकारिता पदाधिकारी संजय कुमार सिंन्हा, बीडीओ प्रणव कुमार गिरी भी शामिल थे।

    डा. डौले ने बताया कि निरीक्षण का उद्देश्य यह देखना है कि पुरानी मिल को चालू किया जा सकता है या यहां नई मिल लगाने की जरूरत है। चनपटिया की बंद चीनी मिल की हालत ऐसी नहीं है कि उसे मरम्मत कर फिर से चालू किया जा सके।

    यहां नई मिल लगाने की ही आवश्यकता है। बंद चीनी मिल की सभी मशीनें पुरानी तकनीकी की है और सब जंग खाकर बेकार हो गई हैं। यहां नई चीनी मिल लगाने की सिफारिश की जाएगी।

    टीम गन्ना उत्पादन और उपलब्धता को लेकर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर फैसला होगा। विभाग ने अधिकारियों को जरूरी आंकड़े और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।

    वर्ष 1932 में स्थापित चनपटिया चीनी मिल वित्तीय संकट और प्रबंधन की विफलता के कारण वर्ष 1990 के आसपास लड़खड़ाने लगी थी। आखिरकार 1994-95 में फैक्ट्री पूरी तरह से बंद हो गई।

    तत्कालीन विधायक वीरबल शर्मा के प्रयास वर्ष 1998 में एकबार फिर चीनी मिल को को-आपरेटिव (सहकारी) के माध्यम से चलाने का प्रयास किया गया। लेकिन यह प्रयोग भी विफल रहा। मिल प्रबंधन, कर्मियों एवं किसानों के बीच समन्वय की कमी के कारण फैक्ट्री बंद हो गई। मौके पर जदयू नेता अशोक कुमार ओझा, राजन साह, नथुनी दास और कमलेश कुमार आदि मौजूद रहे।