यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 12, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
PM Kisan Yojana: आपके अकाउंट में 8000 रुपये भेजे हैं, एक बार चेक कीजिए... ये है 420 का नया पैंतरा; आप भी रहें सावधान!
बिहार में प्रधानमंत्री किसाना सम्मान निधि योजना के नाम पर धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। एक शख्स से कहा गया कि उसके खाते में 8 हजार रुपये भेजे ग ...और पढ़ें

HighLights
- पीएम किसान निधि योजना के नाम पर 1.43 लाख रुपये की धोखाधड़ी
- नगर थाने के मेहुडा का मामला, जांच में जुटी साइबर थाने की पुलिस
संवाद सहयोगी, बगहा। PM Kisan Yojana Fraud प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के नाम पर 1.43 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला प्रकाश में आया है। दो जनवरी की घटना मामले में पुलिस ने दो दिन पहले प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। नगर थाने के मेहुडा निवासी संतोष कुमार सिंह साइबर थाने में अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
शिकायत में बताया है कि बीती दो जनवरी की दोपहर में एक नंबर से फोन आया और बताया गया कि उनके खाते में आठ हजार रुपये किसान सम्मान निधि की राशि भेजी गई है। जांच कर बताएं कि वह पैसा मिला है कि नहीं। उसी क्रम में एक एप लोड करने को कहा गया।
फोन करने वाले व्यक्ति के अनुसार, एप डाउनलोड करने के कुछ समय बाद मोबाइल पर मैसेज आया कि उनके खाते से 99,899 रुपये की निकासी हो गई। जिसके बाद उनके द्वारा इसकी जांच पड़ताल की जा रही थी कि फिर पांच जनवरी को उनके दूसरे खाते से 24,980 रुपये की निकासी कर ली गई। काफी खोजबीन के बाद भी फोन करने वाले व्यक्ति की पहचान नहीं हो सकी। उसके बाद उन्होंने साइबर थाने में दस जनवरी को प्राथमिकी दर्ज कराई।
एप डाउनलोड के बहाने उड़ाए पैसे
यहां बता दें कि इन दिनों साइबर अपराधियों के द्वारा लोगों के खाते से पैसा उड़ाने के लिए बिजली बिल सुधार, केवाईसी, प्रधानमंत्री सम्मान निधि, एप डाउन लोड या फिर खाता बंद करने के नाम पर फोन कर लोगों को अपने जाल में फंसाने के बाद उनके खाते से राशि की निकासी की जा रही है। जबकि पुलिस ऐसे ठगों से बचने के लिए इंटरनेट आदि के माध्यम से जनता के बीच जागरूकता अभियान भी चला रही है। उसके बाद भी लोग साइबर ठगों के चंगुल में फंसते जा रहे हैं।
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वादी के आवेदन पर अज्ञात मोबाइल धारक के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। किसी भी अज्ञात फोन आने पर न ओटीपी बताएं और न कोई एप डाउनलोड करें। - सुबोध कुमार सिंह, थानाध्यक्ष, साइबर
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