पश्चिम चंपारण में गंडक के बढ़ते पानी ने बढ़ाई चिंता, चार प्रखंडों में एनडीआरएफ-एसडीआरएफ हाई अलर्ट पर
पश्चिम चंपारण में गंडक नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है, जिससे बाढ़ की चिंता बढ़ गई है। संभावित ...और पढ़ें
HighLights
गंडक नदी का जलस्तर लगातार घट-बढ़ रहा है।
चार प्रखंडों में एनडीआरएफ-एसडीआरएफ टीमें तैनात।
तटबंधों की 24 घंटे निगरानी, राहत शिविर तैयार।
जागरण संवाददाता, बगहा (पश्चिम चंपारण)। गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। शुक्रवार सुबह नौ बजे तक वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 99,800 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया था। दोपहर तीन बजे डिस्चार्ज बढ़कर 1,02,100 क्यूसेक हो गया। जलस्तर में हो रहे बदलाव को देखते हुए जल संसाधन विभाग पूरी तरह सतर्क है।
किसी भी आपात स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाने की तैयारी की गई है। गंडक बराज स्थित कंट्रोल रूम से नदी के जलस्तर और पानी के डिस्चार्ज की लगातार निगरानी की जा रही है। इसके लिए कर्मियों की तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगाई गई है।
विभागीय अधिकारी भी जलस्तर में होने वाले बदलाव की नियमित जानकारी ले रहे हैं। वहीं, थानों के माध्यम से नदी किनारे और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।
एसडीएम चांदनी कुमारी ने कहा कि बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए बगहा, पिपरासी, मधुबनी और ठकराहा प्रखंडों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तैनात किया गया है। टीमें बोट, लाइफ जैकेट और प्रशिक्षित गोताखोरों के साथ हाई अलर्ट पर हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव कार्य में इनकी मदद ली जाएगी।
तटबंधों की 24 घंटे निगरानी के निर्देश
जल संसाधन विभाग ने वाल्मीकिनगर बराज से छोड़े जाने वाले पानी और गंडक नदी के जलस्तर पर 24 घंटे नजर रखने के निर्देश दिए हैं। अभियंताओं को संवेदनशील और अति संवेदनशील तटबंधों पर फ्लड-फाइटिंग सामग्री के साथ तैनात रहने को कहा गया है।
बालू की बोरियां, बोल्डर और नायलॉन क्रेट समेत अन्य आवश्यक सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। विभागीय टीमें लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं, ताकि जलस्तर बढ़ने या तटबंध पर दबाव की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
निचले एवं दियारा इलाकों से विस्थापित होने वाले परिवारों के लिए चिह्नित उच्च प्राथमिक विद्यालयों एवं बाढ़ शरण स्थलों को तैयार रखने का निर्देश दिया गया। जलजमाव या विस्थापन की स्थिति बनते ही तत्काल गुणवत्तापूर्ण 'सामुदायिक रसोई' संचालित करने के आदेश दिए गए हैं।
