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    गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए पश्चिम चंपारण में 10 दिनों में बनेगा एलपीसी

    By Pradeep Kumar Dwivedi Edited By: Ajit kumar
    Updated: Fri, 08 May 2026 05:34 PM (IST)

    LPC Process Bihar: पश्चिम चंपारण में गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण तेज हो गया है, जिसमें किसानों को मुआवजे के लिए एलपीसी बनवाना अ ...और पढ़ें

    यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।

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    संवाद सूत्र, नौतन (पश्चिम चंपारण)। Gorakhpur Siliguri Expressway: गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर पश्चिम चंपारण में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज हो गई है। जिले में करीब 27 किलोमीटर क्षेत्र में बनने वाले एक्सप्रेसवे के लिए जमीन की मापी शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही प्रभावित किसानों को मुआवजा भुगतान के लिए एलपीसी बनवाना अनिवार्य किया गया है।

    दस दिनों में पूरा होगा काम

    जिलाधिकारी तरनजोत सिंह के निर्देश पर नौतन अंचल में एलपीसी बनाने की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। नौतन की सीओ अलका कुमारी को दस दिनों के भीतर वैध दस्तावेजों के आधार पर एलपीसी जारी करने का निर्देश दिया गया है।

    995 किसानों की जमीन होगी अधिग्रहित

    सीओ ने बताया कि नौतन अंचल के जगदीशपुर, जमुनिया, पकड़िया, पटेरवा, विशुनपुरा, सनसरैया पर्वतीया टोला और धुमनगर समेत कई गांवों में कुल 995 किसानों की जमीन एक्सप्रेसवे परियोजना की जद में आई है। सभी प्रभावित किसानों को नोटिस भेजा जा चुका है।

    कम किसानों ने किया आवेदन

    प्रशासन के अनुसार अब तक करीब 100 किसानों ने ही एलपीसी बनवाने के लिए आवेदन दिया है। अधिकारियों ने कहा कि निर्धारित समय के भीतर एलपीसी नहीं बनवाने वाले किसानों को मुआवजा प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है।

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    अतिरिक्त मुआवजे के लिए कर सकते आवेदन

    सीओ अलका कुमारी ने बताया कि यदि किसी किसान को मुआवजे की राशि कम लगती है तो वे अतिरिक्त मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं। सरकार की ओर से मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    शिविर में भी कम पहुंचे किसान

    पिछले सप्ताह एलपीसी बनाने के लिए अंचल कार्यालय में दो दिवसीय शिविर लगाया गया था, लेकिन वहां भी अपेक्षा के अनुरूप किसान नहीं पहुंचे। प्रशासन ने किसानों से समय पर दस्तावेज जमा कराने की अपील की है।

    पुश्तैनी जमीन बनी बड़ी चुनौती

    धुमनगर के किसान शिवशंभू महतो ने बताया कि अधिकतर जमीन पुश्तैनी है और जमाबंदी पूर्वजों के नाम पर चल रही है। जबकि प्रशासन आवेदक के नाम से जमाबंदी की मांग कर रहा है। किसानों का कहना है कि जमाबंदी ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया जटिल होने के कारण एलपीसी बनवाने में परेशानी हो रही है।