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    2 मार्च को होलिका दहन 2026, तीन को खग्रास चंद्रग्रहण और चार को रंगों की होली

    By Vivek Dubey Edited By: Ajit kumar
    Updated: Fri, 27 Feb 2026 04:36 PM (GMT+05:30)

    Holika Dahan Muhurat: इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च की देर रात, शुभ मुहूर्त 3 मार्च की भोर में 2 से 4 बजे के बीच है। 3 मार्च को शाम 5 से 6:50 बजे तक खग्र ...और पढ़ें

    Holi Festival Date: इस बार होली का ज्योतिषीय संयोग के कारण विशेष महत्व है। फाइल फोटो

    Holi Festival Date: इस बार होली का ज्योतिषीय संयोग के कारण विशेष महत्व है। फाइल फोटो 

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    संवाद सूत्र, बगहा (पश्चिम चंपारण)। Holika Dahan Muhurat: होली पर्व को लेकर बगहा और आसपास के क्षेत्रों में खासा उत्साह है। इस वर्ष पर्व की तिथियों के साथ खग्रास चंद्रग्रहण का संयोग होने से श्रद्धालु पंचांग के अनुसार तैयारियां कर रहे हैं।

    ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक मिश्रा के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा दो मार्च की देर रात पड़ रही है। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त तीन मार्च की भोर में लगभग दो बजे से चार बजे के बीच निर्धारित है। इस दौरान भद्रा का प्रभाव समाप्त रहेगा, इसलिए इसी समय होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत माना गया है।

    अच्छाई की विजय का प्रतीक

    होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस अवसर पर लोग लकड़ियां और उपले एकत्र कर विधि-विधान से अग्नि प्रज्ज्वलित करते हैं। परिक्रमा कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। परंपरा के अनुसार नई फसल की बालियां अग्नि में भूनकर प्रसाद रूप में ग्रहण करना शुभ माना जाता है।

    तीन मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण

    तीन मार्च की शाम लगभग पांच बजे से छह बजकर पचास मिनट तक खग्रास चंद्रग्रहण रहेगा। आचार्य ने बताया कि ग्रहण काल धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रखने की परंपरा है और लोग मंत्र जाप व पूजा-पाठ करते हैं।

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    गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। उन्हें ग्रहण काल में घर के भीतर रहने, नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करने और विश्राम से बचने की सलाह दी गई है। भगवान का स्मरण और धार्मिक पाठ करना शुभ माना जाता है।

    चार मार्च को रंगोत्सव

    फाल्गुन पूर्णिमा के अगले दिन चार मार्च को रंगों की होली मनाई जाएगी। सुबह से लोग अबीर-गुलाल लगाकर एक-दूसरे को बधाई देंगे। घरों में पकवान और मिठाइयां बनेंगी, जबकि बच्चे और युवा पिचकारी व रंगों के साथ उत्सव का आनंद लेंगे।

    ज्योतिषाचार्य ने कहा कि होली सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि पर्व को शांति और सौहार्द के साथ मनाएं तथा पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें।

    इस बार होली का पर्व ज्योतिषीय संयोग के कारण विशेष महत्व लिए हुए है, जिसे लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।