इंडो नेपाल बॉर्डर पर सुस्ता के नो मैंस लैंड के पास तटबंध निर्माण से तनाव, एसएसबी व ग्रामीणों में नोकझोंक
पश्चिम चंपारण के सुस्ता में भारत-नेपाल सीमा पर नो मैंस लैंड के पास तटबंध निर्माण को लेकर तनाव उत्पन्न हो गया। एसएसबी ने स्थानीय लोगों द्वारा किए जा रह ...और पढ़ें

HighLights
सुस्ता के नो मैंस लैंड पर तटबंध निर्माण से सीमा पर तनाव।
एसएसबी ने स्थानीय लोगों का तटबंध निर्माण कार्य रुकवाया।
दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाला।
संवाद सूत्र, वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण)। Indo Nepal Border Dispute: भारत-नेपाल सीमा से सटे पश्चिम चंपारण के सुस्ता क्षेत्र में नो मैंस लैंड के पास तटबंध निर्माण को लेकर रविवार को तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
विवादित स्थल पर स्थानीय लोगों द्वारा मिट्टी गिराकर तटबंध निर्माण शुरू किए जाने की सूचना पर 21वीं वाहिनी एसएसबी के जवान मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य रुकवा दिया।
इस दौरान स्थानीय लोगों और एसएसबी जवानों के बीच नोकझोंक हुई, हालांकि समय रहते दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया।

जानकारी के अनुसार सुस्ता के कुछ स्थानीय लोग विवादित क्षेत्र में मिट्टी गिराकर तटबंध का निर्माण करा रहे थे। सूचना मिलने पर एसएसबी की टीम मौके पर पहुंची और नो मैंस लैंड के निकट निर्माण कार्य पर आपत्ति जताते हुए उसे तत्काल रुकवा दिया। इस दौरान स्थानीय लोगों और जवानों के बीच कहासुनी हुई, जिससे कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई।
घटना की जानकारी मिलते ही नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) और नेपाल पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों ने स्थानीय लोगों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की बात सामने आई है।
जानकारी के मुताबिक सिंचाई तथा जलस्रोत व्यवस्थापन आयोजन, चितवन की ओर से करीब 1.46 करोड़ रुपये की लागत से 132 मीटर लंबे तटबंध का निर्माण कार्य लगभग दो महीने पहले शुरू किया गया था।
उस समय भी भारतीय पक्ष ने नो मैंस लैंड के समीप निर्माण पर आपत्ति जताई थी। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच वार्ता के बाद आपसी सहमति से निर्माण कार्य रोक दिया गया था।
बताया गया कि बीते शुक्रवार को स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक अनुमति के बिना उसी स्थान पर दोबारा मिट्टी गिराकर तटबंध निर्माण शुरू कर दिया।
रविवार को जब एसएसबी की टीम निर्माण रोकने पहुंची तो बड़ी संख्या में ग्रामीण भी लाठी-डंडों के साथ मौके पर पहुंच गए। हालांकि नेपाल पुलिस और एपीएफ के हस्तक्षेप से स्थिति सामान्य हो गई और किसी बड़े विवाद की नौबत नहीं आई।
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सुस्ता क्षेत्र का भूमि विवाद गंडक नदी की धारा बदलने के बाद से वर्षों से चला आ रहा है। स्थानीय जानकारी के अनुसार सुस्ता का कुल क्षेत्रफल लगभग 40,980 हेक्टेयर है।
इसमें करीब 14,500 हेक्टेयर भूमि पर भारतीय किसान खेती करते हैं, जबकि लगभग 7,000 हेक्टेयर भूमि पर सुस्ता के लोग जोत-भोग करते हैं। शेष करीब 19,480 हेक्टेयर भूमि दोनों देशों की सहमति से विवादित मानकर सुरक्षित रखी गई है, जिस पर किसी भी पक्ष का अधिकार नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर विवादित भूमि पर कब्जे के प्रयास होते रहे हैं। एसएसबी तथा वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र के चकदहवा, रोहुआ टोला, बिन टोली और कान्ही टोली समेत आसपास के गांवों के लोगों की सतर्कता से ऐसे प्रयासों को रोका जाता रहा है। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य है और सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।