Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    बिहार में सरकारी मदद से बदली अलाउद्दीन की किस्मत, अपने दम पर खड़ा किया 80 लाख का कारोबार

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 07:14 PM (IST)

    मो. अलाउदीन ने मुख्यमंत्री उद्यमी योजना और अपने निवेश से बेतिया में एक सफल गारमेंट्स यूनिट स्थापित की है, जिसका वार्षिक टर्नओवर 80 लाख रुपये से अधिक ह ...और पढ़ें

    पश्चिम चंपारण के बेतिया में काम करते कारीगर। जागरण

    पश्चिम चंपारण के बेतिया में काम करते कारीगर। जागरण

    शशि कुमार मिश्र, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। जिले के सिकटा प्रखंड के इनरवा निवासी मो. अलाउदीन जैकेट, ट्रैक सूट, स्लिपिंग बैग, सर्दी की टोपी आदि का निर्माण कर अपनी पहचान बनाई है। उनके निर्मित कपड़े कश्मीर, कोलकाता, सिल्लीगुड़ी सहित पड़ोसी देश नेपाल तक पहुंच रहे हैं।

    कोरोना काल में छह वर्ष पूर्व शुरू किए गए इस उद्यम से आज उनकी आर्थिक स्थिति तो मजबूत हुई ही है, एक दर्जन से अधिक लोगों को रोजगार भी प्राप्त हुआ है।

    मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से आठ लाख रुपये एवं स्वयं के 12 लाख रुपये मिलाकर उन्होंने कारोबार शुरू किया था। आज उनका वार्षिक टर्नओवर 80 लाख रुपये से अधिक है। प्रतिमाह एक लाख रुपये से अधिक की कमाई हो रही है। स्थानीय स्तर पर तो रॉ मैटिरियल उपलब्ध नहीं है, ऐसे में वे दिल्ली एवं लुधियाना से इसे प्राप्त करते हैं।

    10 कारीगरों के साथ-साथ पांच महिलाएं भी करती हैं काम

    उद्यमी मोहम्मद अलाउद्दीन बताते हैं कि वर्तमान में उनके यहां 10 कारीगर के अलावा पांच महिलाएं काम कर रही हैं। महिलाओं को 6000 रुपये प्रति माह का भुगतान करते हैं।

    सभी महिलाएं स्थानीय हैं। अपने घर का काम करने के बाद यहां धागा कटिंग एवं पैकिंग करती हैं। जबकि कारीगरों को 170 से 220 रुपये प्रति पीस के हिसाब से मजदूरी देते हैं। ऐसे में उनकी भी कमाई प्रतिमाह 15 से 20 तक हजार हो रही है।

    खबरें और भी

    गारमेंट्स की मांग सालोभर, माइनस 20 डिग्री सेल्सियस में भी सुरक्षित

    उनके यहां जीआरजी ब्रांड से निर्मित सभी जैकेट, ट्रैक शूट, टोपी आदि अच्छ़ी गुणवत्ता की होती है। बाहर से आर्डर सालों भर मिलते रहता है। उसे पूरा करने में उनकी यूनिट प्रतिदिन चलते रहता है।

    वर्तमान में 10000 सर्दी की टोपी की मांग कश्मीर से की गई है,जिसमें 6000 बनाई जा चुकी है। थर्मल यानी ट्राउजर 5000, विंड चीटर 1700 एवं 5000 पीस जैकेट की माग है। इस पर काम चल रहा है। उनके यहां निर्मित स्लिपिंग बैग पहनकर लोग माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी रह सकते हैं। उन्हें सर्दी नहीं लगेगी।

    उद्योग विभाग से अपेक्षा

    उद्यमी की माने, तो यदि सरकार की ओर से उन्हें और अधिक फंड की व्यवस्था होती तो, इस यूनिट और अधिक बड़ा करते। ऐसे में उनका उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ अधिक लोगों को रोजगार भी मिलता है। उन्होंने सरकार से इसकी मांग की है।

    मोहम्मद अलाउद्दीन के द्वारा निर्मित गाररमेंट्स की गुणवत्ता बेहतर है। यही कारण है कि उसकी मांग बाजर से आती है। उन्हें नियमानुसार फंड उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
    रोहित राज, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, पश्चिम चंपारण।