नरकटियागंज में मिजल्स के दो मरीज मिले, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, गांव में शुरू हुआ विशेष अभियान
नरकटियागंज के गोखुला गांव में मिजल्स (खसरा) के दो मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए गांव में विशेष न ...और पढ़ें

HighLights
गोखुला गांव में मिजल्स के दो मरीज मिले, पुष्टि हुई।
स्वास्थ्य विभाग ने विशेष निगरानी और टीकाकरण अभियान चलाया।
संक्रमण रोकने को 204 बच्चों का सर्वे, विटामिन-ए खुराक दी।
जागरण संवाददाता, नरकटियागंज (पश्चिम चंपारण)। West Champaran Measles Case: नरकटियागंज प्रखंड के गोखुला गांव में मिजल्स (खसरा) के दो मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है।
दोनों बच्चों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद गांव में विशेष निगरानी, सर्वे और टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमों को भी सक्रिय कर दिया है।
दो बच्चों में संक्रमण की पुष्टि
अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि गोखुला गांव की 13 वर्षीय दिव्या कुमारी और नौ वर्षीय गुलशन कुमार में मिजल्स संक्रमण की पुष्टि हुई है। दोनों बच्चों के रक्त नमूने जांच के लिए पटना भेजे गए थे। रिपोर्ट मिलने के बाद प्रभावित परिवारों की निगरानी शुरू कर दी गई है।
204 बच्चों का हुआ सर्वे
संक्रमण की पुष्टि के बाद गांव में 9 माह से 5 वर्ष तक के 204 बच्चों का स्वास्थ्य सर्वे कराया गया। सभी बच्चों को विटामिन-ए की खुराक दी गई है। संक्रमित बच्चों के घर मेडिकल टीम भेजकर नियमित निगरानी की जा रही है।
विशेष टीकाकरण अभियान शुरू
स्वास्थ्य विभाग ने गांव में विशेष टीकाकरण अभियान चलाने का निर्णय लिया है। पात्र बच्चों को मिजल्स से बचाव का टीका लगाया जाएगा। साथ ही एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि कोई भी संदिग्ध मरीज मिलने पर तत्काल इसकी सूचना दें, ताकि समय पर जांच और उपचार शुरू किया जा सके।
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क्या है मिजल्स (खसरा)?
मिजल्स, जिसे आम भाषा में खसरा कहा जाता है, रूबियोला वायरस से होने वाली एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है। यह मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करती है, लेकिन टीकाकरण नहीं होने पर किसी भी उम्र के व्यक्ति को संक्रमण हो सकता है। वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से हवा के जरिए तेजी से फैलता है।
इसके प्रमुख लक्षण
- तेज बुखार आना।
- लगातार सूखी खांसी होना।
- बहती नाक (सर्दी-जुकाम) होना।
- आंखों का लाल होना, पानी आना और रोशनी से परेशानी होना।
- मुंह के अंदर गालों की भीतरी सतह पर छोटे सफेद धब्बे (कोप्लिक स्पॉट्स) दिखाई देना।
- चेहरे और कान के पीछे से लाल चकत्ते निकलना, जो धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाते हैं।
- चकत्ते निकलने के दौरान बुखार और अधिक बढ़ सकता है।
कैसे फैलता है संक्रमण
यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के जरिए फैलती है। संक्रमित व्यक्ति की लार या नाक के स्राव के संपर्क में आने से भी संक्रमण हो सकता है। दूषित सतहों को छूने के बाद हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने पर भी वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है।
मिजल्स से बचाव के उपाय
- बच्चों को समय पर एमएमआर (Measles, Mumps, Rubella) या राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार मिजल्स का टीका जरूर लगवाएं।
- 9 से 12 महीने की उम्र में पहली और 16 से 24 महीने की उम्र में दूसरी खुराक अवश्य दिलाएं।
- संक्रमित व्यक्ति को छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं से अलग रखें।
- साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोएं या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
- संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार बच्चों को विटामिन-ए की खुराक दिलाएं, जिससे बीमारी की गंभीर जटिलताओं का खतरा कम होता है।
- मिजल्स के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक से संपर्क करें।