West Champaran : केस डायरी नहीं दी, कोर्ट हुआ सख्त, तीन पुलिस अधिकारियों का वेतन रोकने का आदेश
Bihar News न्यायिक आदेशों की लगातार अनदेखी और समय पर केस डायरी उपलब्ध न कराने पर बगहा कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने तीन पुलिस अनुसंधानकर्ताओं ...और पढ़ें
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व्यवहार न्यायालय बगहा । जागरण
HighLights
न्यायिक आदेशों की अनदेखी पर कोर्ट ने लिया कड़ा रुख।
तीन पुलिस अनुसंधानकर्ताओं का वेतन रोकने का दिया निर्देश।
केस डायरी और आपराधिक इतिहास न देने पर हुई कार्रवाई।
जागरण संवाददाता, बगहा (पश्चिम चंपारण)। न्यायिक आदेशों की लगातार अनदेखी और समय पर अद्यतन केस डायरी तथा आरोपितों का आपराधिक इतिहास उपलब्ध नहीं कराने पर जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
बुधवार को अदालत ने ठकराहा थाना के एक तथा रामनगर थाना के दो अलग-अलग मामलों के अनुसंधानकर्ताओं का जीवन निर्वाह भत्ता छोड़कर शेष वेतन रोकने का निर्देश पुलिस अधीक्षक बगहा को दिया है।
साथ ही आदेश की प्रति डीआइजी बेतिया को भेजकर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया है।
एडीजे चतुर्थ की अदालत में तीन अलग-अलग अग्रिम जमानत याचिकाओं की सुनवाई हुई। इनमें ठकराहा थाना कांड संख्या 80/2026 तथा रामनगर थाना कांड संख्या 351/2026 और 437/2026 शामिल है।
तीनों मामलों में अदालत ने पाया कि सुनवाई के लिए आवश्यक अद्यतन केस डायरी और आरोपितों का आपराधिक इतिहास बार-बार निर्देश देने के बावजूद न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे अग्रिम जमानत याचिकाओं की सुनवाई करीब एक माह से लंबित है और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
ठकराहा थाना कांड संख्या 80/2026 हत्या के एक मामले से जुड़ा है, जिसमें हीरालाल कुशवाहा और दुखनी देवी आरोपित हैं। वहीं रामनगर थाना कांड संख्या 351/2026 में सोनू कुमार, शंकर मांझी उर्फ संकट मांझी सहित अन्य लोगों पर जानलेवा हमला करने का आरोप है।
तीसरा मामला रामनगर थाना कांड संख्या 437/2026 भूमि फर्जीवाड़े से संबंधित है, जिसमें ब्रजेश शर्मा और सीमा देवी को आरोपित बनाया गया है। तीनों मामलों में बचाव पक्ष ने आरोपितों को झूठे मुकदमे में फंसाने की दलील दी, जबकि अभियोजन पक्ष ने कहा कि सुनवाई के लिए केस डायरी और आपराधिक इतिहास आवश्यक हैं।
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न्यायिक आदेशों की अनदेखी पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन की ओर से संबंधित अनुसंधानकर्ताओं और थाना प्रभारियों को कई बार न्यायालय के आदेश से अवगत कराया गया। इसके बावजूद आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए।
अदालत ने इसे न्यायिक आदेशों की अवहेलना मानते हुए कहा कि अनुसंधानकर्ताओं की लापरवाही के कारण न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो रही है और मामलों का निष्पादन अनावश्यक रूप से विलंबित हो रहा है।
अदालत ने अपने आदेश में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 309 तथा पटना हाईकोर्ट के एक निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना गंभीर विषय है और ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है।
इसी आधार पर पुलिस अधीक्षक बगहा को तीनों मामलों के अनुसंधानकर्ताओं का जीवन निर्वाह भत्ता छोड़कर शेष वेतन न्यायालय के आदेश का अनुपालन होने तक रोकने का निर्देश दिया गया है। साथ ही 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
अदालत ने आदेश की प्रति पुलिस उपमहानिरीक्षक, बेतिया को भी भेजने का निर्देश दिया है, ताकि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विधि सम्मत विभागीय कार्रवाई की जा सके। तीनों अग्रिम जमानत याचिकाओं पर अगली सुनवाई क्रमशः छह, सात और 10 अगस्त को निर्धारित की गई है।