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पश्चिम चंपारण में बोर्ड पर दिल्ली-पटना के चिकित्सकों के नाम, अंदर झोलाछापों का काम, इलाज भगवान भरोसे

By Prabhat Mishra Edited By: Dharmendra Singh
Published: Thu, 07 May 2026 04:52 PM (IST)

पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज में झोलाछाप डॉक्टरों का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जो दिल्ली-पटना के नामी चिकित्सकों के नाम पर ...और पढ़ें

जांच के दौरान लोगों की भीड़ व अस्पताल की दीवारों पर अंकित विशेषज्ञ चिकित्सकों का नाम। जागरण

जांच के दौरान लोगों की भीड़ व अस्पताल की दीवारों पर अंकित विशेषज्ञ चिकित्सकों का नाम। जागरण 

HighLights

  1. नरकटियागंज में झोलाछाप डॉक्टरों का बड़ा नेटवर्क सक्रिय।

  2. दिल्ली-पटना के नामी डॉक्टरों के नाम पर मरीजों को लुभाते।

  3. अवैध अस्पतालों में मरीजों का आर्थिक शोषण जारी।

जागरण संवाददाता, नरकटियागंज (पश्चिम चंपारण) । बड़े-बड़े बोर्ड और बैनर पर दिल्ली-पटना, गोरखपुर या अन्य बड़े शहरों के नामी चिकित्सकों के नाम। नीचे उनकी विशेषज्ञता, वर्षों का अनुभव भी। लेकिन, जरा ठहरिए...।

इन अस्पतालों के भीतर उपचार और चिकित्सा के नाम पर मौत और आर्थिक शोषण का धंधा है। इन भवनों में कथित डिग्रीधारी और झोलाछाप का नेटवर्क है, जिनकी छोटी-छोटी बीमारी पर भी छुरी-कैंची चल जाती है।

यह दृश्य है पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज का, यहां क्षेत्र में झोलाछाप चिकित्सक सक्रिय हैं। जांच हो रही तो मामला सामने आ रहा है। फर्जी तरीके से अस्पताल चलाने वाले झोलाछाप बाहर के डाक्टरों के नाम और उनकी भारी-भरकम डिग्री दिखाकर मरीजों को आकर्षित कर रहे हैं।

सप्ताह में एक या या दो दिन का आफर रहता है, यह देख गांव या जंगलवर्ती क्षेत्र के मरीज पहुंच जाते हैं, लेकिन उनका इलाज झोलाछाप ही करते हैं। उनसे मोटी राशि वसूली जाती है। इसमें बिचौलियों के माध्यम से मरीज व स्वजन को लुभाया जाता है। यहां करीब 50 से 55 छोटे-बड़े अस्पताल हैं।

जानकार बताते हैं कि बिचौलिए सीमावर्ती क्षेत्र में अपना नेटवर्क मजबूत किए हुए हैं। कई गांवों में इस धंधे से जुड़े उनके लोग हैं। मरीज के पहुंचने पर उनके घर उनकी कमीशन की राशि चली जाती है। आलीशान भवन में अस्पताल चलाने वाले झोलाछाप सप्ताह में एक-दो दिन गांवों में भ्रमण के लिए भी समय निर्धारित किए हुए हैं।

सीमावर्ती नेपाल क्षेत्र से भी मरीजों को प्रसिद्ध चिकित्सकों के नाम पर प्रलोभन दिया जाता है। नगर के नंदपुर रेल ढाला, बाजार समिति रोड और सरकारी अस्पताल के आसपास ऐसे झोलाछापों द्वारा संचालित अस्पतालों का हब बना हुआ है।

सील तोड़कर अस्पताल संचालन के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने एक झोलाछाप के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज कराई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वहां छापेमारी के दौरान कोई वैध डॉक्टर नहीं मिला।

ऐसे एक दर्जन आलीशान भवन में अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जिनकी दीवारों पर मोटे-मोटे अक्षरों में गोरखपुर, पटना, मैनाटांड और दिल्ली के चिकित्सकों का उनके विशेषज्ञता के साथ नाम अंकित है। करीब दस दिनों से चल रहे जांच अभियान में दो-तीन जगह मिले वैध चिकित्सकों को छोड़कर, अन्य जगहों पर या तो झोलाछाप ही मिले या फिर अस्पताल का ताला बंद कर गायब रहे।

कई अस्पतालों में खुद की जांच घर और दवा की दुकानें भी खुली हुईं हैं, जो मोटी कमाई का जरिया बने हुए हैं। ऐसे अस्पतालों के महत्वपूर्ण वार्डों में न तो सीसी कैमरा लगाया गया है और न हीं अन्य किसी की निगरानी है, ताकि जांच टीम को पता न चल सके की ओटी का संचालन कौन करता है?

वरीय पदाधिकारियों के निर्देश पर अस्पतालों और जांच घरों की जांच की जा रही है। जिस तरह की भी गड़बड़ियां मिल रही हैं, रिपोर्ट प्रतिदिन भेजा जा रहा है। जांच अभियान जारी है।
डॉ संजीव कुमार, प्रभारी उपाधीक्षक, अनुमंडल अस्पताल

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