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    पश्चिम चंपारण में जमीन अपनी, रिकॉर्ड में गड़बड़ी, गलत मौजा, खाता-खेसरा और दाखिल-खारिज में खेल

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 06:00 AM (IST)

    पश्चिम चंपारण के नौतन में भूमि परिमार्जन की प्रक्रिया में त्रुटियों और देरी के कारण रैयत परेशान हैं। सैकड़ों पुस्तैनी जमीन के मामले गलत मौजा, खाता-खेस ...और पढ़ें

    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

    HighLights

    1. भूमि परिमार्जन प्रक्रिया में त्रुटियों से रैयत परेशान।

    2. सैकड़ों पुस्तैनी जमीन के मामले महीनों से लंबित।

    3. सहयोग शिविरों में भी समस्याओं का समाधान नहीं।

    जागरण संवाददाता, नौतन (पश्चिम चंपारण)। भूमि परिमार्जन की प्रक्रिया रैयतों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। गलत मौजा, खाता-खेसरा, रकबा और दाखिल-खारिज की त्रुटियों के कारण सैकड़ों भूमि संबंधी मामले महीनों से लंबित हैं।

    इसका खामियाजा उन रैयतों को भुगतना पड़ रहा है, जो अपनी पुस्तैनी जमीन पर अधिकार दर्ज कराने के लिए लगातार राजस्व कार्यालयों और सहयोग शिविरों के चक्कर काट रहे हैं।

    पंचायतों में आयोजित सहयोग शिविरों में सबसे अधिक शिकायतें भूमि विवाद और परिमार्जन से जुड़ी पहुंच रही हैं। समाधान में हो रही देरी से भरोसा टूट रहा है। पड़ताल करती प्रदीप दुबे की रपट।

    प्रखंड में भूमि एवं भू-राजस्व से जुड़े मामलों में लगातार सामने आ रही अनियमितता से रैयत परेशान हैं। पंचायतों में आयोजित सहयोग शिविरों में सबसे अधिक शिकायतें जमीन के परिमार्जन, दाखिल-खारिज, अतिक्रमण और मौजा संबंधी त्रुटियों की मिल रही हैं।

    किसानों का आरोप है कि राजस्व कर्मियों की लापरवाही से गलत मौजा दर्ज कर दिया गया है, खाता-खेसरा एवं रकबा में भी त्रुटियां कर दी गईं और सही कागजात और अधिकार होने के बावजूद दाखिल-खारिज नहीं हो रहा है।

    इसके कारण लोग अपने पूर्वजों के नाम दर्ज जमीन का परिमार्जन कराने से भी कतरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सहयोग शिविरों में भी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।

    हाल ही में उत्तर तेल्हुआ पंचायत में आयोजित शिविर में कई किसानों ने अंचलाधिकारी से जवाब मांगा तो स्थिति असहज हो गई। किसानों का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद मामलों का निष्पादन नहीं हो रहा है।

    केस - एक
    राजस्व कर्मी की गलती से दक्षिण तेल्हुआ मौजा का नाम है, जिसे उत्तर तेल्हुआ में शामिल कर दिया गया है। जबकि मेरी पूरी जमीन दक्षिण तेल्हुआ मौजा में मौजूद है। परिमार्जन के लिए आन लाइन आवेदन कराने के बाद भी न तो सुधार किया गया और नहीं परिमार्जन हुआ है। सहयोग शिविर के पोर्टल पर भी आवेदन दिया गया है। बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
    विभूति नाराण राय, रैयत, दक्षिण तेल्हुआ।

    केस - दो
    अंचल कर्मियों की लापरवाही से मेरी जमीन पर अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा है। इस बाबत सहयोग शिविर में भी आवेदन दिया था। बावजूद अब तक मेरी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। जबकि इस मामले में अतिक्रमण हटाने का आदेश भूमि सुधार उप समाहर्ता के द्वारा दिया गया है। परंतु अंचल की अभिलेखों की त्रुटि के कारण अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है।
    अफरोज नैयर, मुखिया, ग्राम पंचायत बैकुंठवा।

    केस तीन
    मेरी जमीन का दाखिल खारिज डीसीएलआर के न्यायालय आदेश के बाद भी विगत 10 माह से नहीं हो रहा है। जबकि दो जून को बैकुंठवा, जयनगर में आयोजित सहयोग शिविर में जिले के प्रभारी सचिव ने भी इस मामले में आदेश दिया था। जमीन की खरीद जमाबंदीदार से ही की गई है और जमीन पर मेरा दखल कब्जा भी है।
    बंधू नाथ दुबे,रैयत , बैकुंठवा।

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    सरकार के दिशा निर्देश के मुताबिक अंचल का कार्य हो रहा है। पूर्व में कुछ राजस्व कर्मियों द्वारा गलत किया गया है। जिसका सुधार किया जा रहा है।

    अलका कुमारी, अंचल अधिकारी, नौतन।