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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 03, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    ICICI Bank और PNB के ग्राहकों की बढ़ेगी EMI, दोनों बैंकों ने एमसीएलआर में की बढ़ोतरी

    By Abhinav ShalyaEdited By: Abhinav Shalya
    Updated: Sun, 03 Sep 2023 11:44 AM (IST)

    Home Loan EMI आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank) द्वारा एमसीएलआर में बढ़ोतरी की गई है। दोनों बैंकों की ओर से सभी ...और पढ़ें

    दोनों बैंकों की ओर से एमसीएलआर में 5 आधार अंक की बढ़ोतरी की है।
    दोनों बैंकों की ओर से एमसीएलआर में 5 आधार अंक की बढ़ोतरी की है।

    HighLights

    1. आईसीआईसीआई बैंक का एक साल का एमसीएलआर 8.95 प्रतिशत हो गया है।
    2. पीएनबी का एक साल का एमसीएलआर 8.65 प्रतिशत हो गया है।

    नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank) की ओर से एमसीएलआर (MCLR) यानी मार्जिन कॉस्ट बेस्ड लेंडिंग रेट्स (Marginal Cost-based Lending Rates) में इजाफा कर दिया है। इस कदम के बाद दोनों बैंकों के MCLR से जुड़े लोन महंगे हो जाएंगे।

    बता दें, बैंकों की ओर से ग्राहकों को दिए जाने वाले ज्यादातर लोन एक साल के एमसीएलआर से जुड़े हुए होते हैं। नई एमसीएलआर की दरें एक सितंबर से लागू हो गई हैं।

    ICICI Bank ने कितना बढ़ाया MCLR?

    आईसीआईसीआई बैंक की ओर से सभी अवधि के एमसीएलआर में 5 आधार अंक या 0.05 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद ओवरनाइट और एक महीने का एमसीएलआर 8.45 प्रतिशत, तीन और छह महीने का 8.50 प्रतिशत और 8.85 प्रतिशत और एक साल का एमसीएलआर 8.95 प्रतिशत हो गया है।

    PNB ने कितना बढ़ाया MCLR?

    पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ओर से सभी अवधि की एमसीएलआर को 5 आधार अंक बढ़ा दिया गया है। पीएनबी की वेबसाइट के मुताबिक, ओवरनाइट एनसीएलआर 8.15 प्रतिशत से बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गया है। एक महीने, तीन महीने और छह महीने का एमसीएलआर अब 8.25 प्रतिशत, 8.35 प्रतिशत, 8.55 प्रतिशत हो गया है। वहीं, एक साल का एमसीएलआर बढ़कर 8.65 प्रतिशत और तीन साल का एमसीएलआर बढ़कर 8.95 प्रतिशत हो गया है।

    क्या होता है MCLR?

    MCLR वह दर होती है, जिसके आधार पर कोई भी बैंक लोन की ब्याज दर निर्धारित करता है। इसमें बढ़ोतरी का सीधा असर ग्राहकों की ईएमआई पर पड़ता है और ईएमआई बढ़ जाती है। वहीं, जब इसमें किसी बैंक की ओर से कटौती की जाती है तो ईएमआई कम हो जाती है।

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