8th Pay Commission: ₹72000 बेसिक, 400 दिन लीव इनकैशमेंट और पुरानी पेंशन की वापसी; वेतन-भत्तों में बड़े बदलाव की मांग
केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के गठन और वेतन-भत्तों में बड़े बदलाव की मांग की है। इसमें ₹72,000 न्यूनतम बेसिक पे, पुरानी पेंशन योजना की ...और पढ़ें

आठवें वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। (सांकेतिक तस्वीर)

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नई दिल्ली। आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और उसकी सिफारिशों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई कर्मचारी संगठनों ने केंद्रीय कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों में बड़े बदलाव की मांग करते हुए अपने विस्तृत प्रस्ताव सौंप दिए हैं। अगर इन प्रस्तावों को मान लिया जाता है, तो यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा वेतन संशोधन साबित हो सकता है।
क्या बेसिक सैलरी बढ़कर ₹72,000 हो जाएगी?
वेतन बढ़ोतरी को लेकर कर्मचारी संगठनों ने अलग-अलग प्रस्ताव रखे हैं। 'प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच' (PSNM) ने लेवल-1 के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बेसिक पे ₹50,000 से ₹60,000 करने की मांग की है, जो 7वें वेतन आयोग के तहत फिलहाल मात्र ₹18,000 है।
वहीं, 'भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ' (BPMS) ने और भी आक्रामक मांग रखते हुए बेसिक पे में चार गुना बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। संघ का कहना है कि न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर ₹72,000 किया जाना चाहिए। साथ ही, शीर्ष पदों (लेवल 18) के लिए अधिकतम वेतन ₹10 लाख तक करने की सिफारिश की गई है।
फिटमेंट फैक्टर और सालाना इंक्रीमेंट को लेकर क्या है प्रस्ताव?
वेतन तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले 'फिटमेंट फैक्टर' को भी बढ़ाने की पुरजोर मांग हो रही है। PSNM ने मौजूदा 2.57 के बजाय इसे 2.62 से 3.83 के बीच रखने का प्रस्ताव दिया है, जबकि BPMS ने इसे सीधे 4 करने की मांग की है। इसके अलावा, सालाना इंक्रीमेंट को मौजूदा 3% से दोगुना करके 6-7% करने की सिफारिश की गई है। संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत को देखते हुए आय में यह बढ़ोतरी बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, महंगाई भत्ता (DA) 50% तक पहुंचने पर उसे बेसिक पे में मर्ज करने की मांग भी दोहराई गई है।
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कर्मचारियों के भत्तों को लेकर क्या मांग उठी है?
HRA (मकान किराया भत्ता) को मौजूदा 10%, 20% और 30% से बढ़ाकर क्रमशः 12%, 24% और 36% किया जाए।
परिवहन भत्ता को कम से कम ₹9,000 किया जाए और इसे DA के साथ लिंक किया जाए।
बच्चों की शिक्षा के लिए मिलने वाले भत्ते को ₹2,800 से बढ़ाकर ₹7,000 प्रति माह, प्रति बच्चा किया जाए।
तकनीकी युग की जरूरतों को देखते हुए ₹2,000 प्रति माह के एक नए 'डिजिटल सपोर्ट अलाउंस' की मांग भी की गई है।
रिटायरमेंट के फायदों और पुरानी पेंशन योजना पर क्या है रुख?
कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की जोरदार वकालत की है। इसके अलावा, रिटायरमेंट पर मिलने वाले फायदों को बढ़ाने के लिए कुछ अहम प्रस्ताव दिए गए हैं। जिनमें अर्जित अवकाश (Earned Leave) के नकद भुगतान की अधिकतम सीमा को मौजूदा 300 दिनों से बढ़ाकर 400 दिन किया जाए। इसके अलावा ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाकर ₹50 लाख की जाए साथ ही, बेहतर ग्रुप इंश्योरेंस कवरेज और तेजी से प्रमोशन के लिए करियर प्रोग्रेशन सिस्टम में सुधार की भी मांग शामिल है।
इन बंपर मांगों के पीछे संगठनों का आर्थिक तर्क क्या है?
इतनी बड़ी वेतन बढ़ोतरी को सही ठहराने के लिए BPMS ने सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MSPI) के आंकड़ों का हवाला दिया है। संघ का कहना है कि 2016-17 से 2024-25 के बीच देश की प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय (Per capita net national income) 86.76% बढ़कर ₹1.03 लाख से ₹1.92 लाख हो गई है।
साथ ही, संगठनों ने वेतन की गणना के लिए 'परिवार इकाई' (Family Unit) को 3 सदस्यों से बढ़ाकर 5 सदस्य करने की भी मांग की है, ताकि परिवार की वास्तविक वित्तीय जिम्मेदारियों का सही आकलन हो सके। उनका तर्क है कि वेतन बढ़ोतरी को आय बढ़ोतरी के साथ जोड़ने से एक पारदर्शी व्यवस्था बनेगी।
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सरकार के खजाने पर क्या होगा इसका असर?
अगर आठवें वेतन आयोग द्वारा इन सिफारिशों को पूरी तरह या आंशिक रूप से लागू किया जाता है, तो सरकार के वेतन और पेंशन खर्च (Outgo) में भारी बढ़ोतरी होगी। हालांकि, कर्मचारी संगठनों का स्पष्ट मानना है कि आर्थिक विकास के साथ मुआवजे को जोड़ना और सम्मानजनक जीवन स्तर सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
अब देखना यह होगा कि 8वां वेतन आयोग राजकोषीय अनुशासन और कर्मचारियों की इन भारी उम्मीदों के बीच कैसे संतुलन बिठाता है। इसके अंतिम फैसलों का भारत के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के जीवन पर गहरा असर पड़ना तय है।