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    8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर पर बड़ा खुलासा, बदल सकता है कर्मचारियों का वेतन फॉर्मूला; NC-JCM का पूरा प्लान

    Updated: Wed, 04 Mar 2026 06:00 PM (IST)

    8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर पर सस्पेंस बना हुआ है। NC-JCM नेता शिव गोपाल मिश्रा ने बताया कि इस बार वेतन फॉर्मूला बदल सकता ह ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली| आठवें वेतन आयोग में जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा है, वो है- फिटमेंट फैक्टर। कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच एक ही सवाल है कि आखिर इस बार फिटमेंट फैक्टर (8th Pay Commission fitment factor) कितना होगा? क्योंकि कुछ संगठनों का अनुमान है कि आठवें वेतन आयोग (8th pay commission) में फिटमेंट फैक्टर 2 से लेकर 3.6 के बीच हो सकता है।

    इन चर्चाओं पर NC-JCM (स्टाफ साइड) के नेता और ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा (AIRF General Secretary Shiva Gopal Mishra) ने साफ संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि आधिकारिक तौर पर अभी कुछ भी तय नहीं हुआ है।

    'फिटमेंट फैक्टर संवेदनशील मुद्दा'

    उन्होंने कहा कि,

    फिटमेंट फैक्टर बेहद संवेदनशील मुद्दा है और इस पर अलग-अलग संगठनों की अलग राय है। इसलिए फिलहाल कोई भी संख्या सार्वजनिक करना सही नहीं होगा।"

    उनका साफ कहना है कि सरकार के सामने एक 'कॉमन मेमोरेंडम' रखा जाएगा और उसी में अंतिम सहमति के बाद प्रस्ताव जाएगा। जब तक यूनिटी नहीं बनती, तब तक कोई आंकड़ा सामने नहीं आएगा ताकि कर्मचारियों में भ्रम न फैले।

    यह भी पढ़ें- 8th Pay Commission: सैलरी-पेंशन, फिटमेंट फैक्टर और DA मर्जर पर बड़ा अपडेट! NC-JCM नेता ने सबकुछ कर दिया क्लियर

    वेतन ढांचे में बदलाव की तैयारी!

    हालांकि, इतना जरूर साफ किया गया है कि इस बार सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही नहीं, बल्कि पूरे वेतन ढांचे की बुनियाद बदलने की तैयारी है। खासतौर पर उस 'बास्केट' में बदलाव की बात हो रही है, जिसके आधार पर महंगाई, मिनिमम वेज और फिटमेंट तय होता है। स्टाफ साइड का तर्क है कि आज के दौर में खर्च का पैटर्न पूरी तरह बदल चुका है।

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    उदाहरण के तौर पर:

    • अब सिर्फ दाल-चावल से घर नहीं चलता, खान-पान की आदतें बदल गई हैं।
    • रहन-सहन का स्तर बढ़ा है- AC, फ्रिज, बेहतर हाउसिंग अब जरूरत बन चुके हैं।
    • बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवनशैली पर खर्च पहले से ज्यादा है।

    स्टाफ साइड का कहना है कि अगर बदले हुए सामाजिक और आर्थिक माहौल को वेतन गणना में शामिल नहीं किया गया तो कर्मचारियों को वास्तविक राहत नहीं मिलेगी। इसलिए इस बार मेमोरेंडम तथ्यों और गणनाओं के आधार पर तैयार किया जा रहा है, ताकि सरकार के सामने मजबूत दलील रखी जा सके।

    AIRF जनरल सेक्रेटरी का संदेश साफ है कि फिटमेंट फैक्टर पर सस्पेंस भले जारी हो, लेकिन इस बार वेतन आयोग में बड़ा ढांचागत बदलाव देखने को मिल सकता है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन मांगों पर क्या फैसला लेती है।