भारत का वो उद्योगपति, जिसने विदेशी धरती पर लगाई पहली देसी फैक्ट्री, मदद मांगने आते थे राजा; आज ₹11.30 लाख करोड़ की विरासत
भारत के इस युवा ने 24 साल की उम्र में भारत के बाहर कारोबार स्थापित करने का फैसला किया, 1969 ...और पढ़ें
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भारत के इस उद्योगपति ने विदेशी धरती पर लगाई पहली देसी फैक्ट्री
HighLights
24 साल की उम्र में विदेश में कारोबार शुरू करने का फैसला।
1969 में थाईलैंड में पहली भारतीय विदेशी फैक्ट्री स्थापित की।
आज आदित्य बिड़ला समूह 41 देशों में ₹11.30 लाख करोड़ का।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: भारत में जब कारोबार करना भी लाइसेंस और सरकारी मंजूरियों के लंबे चक्र से गुजरता था, उस दौर में एक युवा उद्योगपति ने देश की सीमाओं के बाहर कारोबार खड़ा करने का फैसला किया। महज 24 साल की उम्र में MIT से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे आदित्य विक्रम बिड़ला (aditya vikram birla) ने ऐसा कदम उठाया, जिसने आगे चलकर भारतीय बिजनेस की तस्वीर बदल दी। आज उनके नाम से जुड़ा समूह 41 से ज्यादा देशों में कारोबार करता है और इसका संयुक्त मार्केट कैप 120 अरब डॉलर यानी करीब ₹11.30 लाख करोड़ बताया जाता है।
पिता ने दी थी बड़ा जिम्मेदारी
कहानी 1965 से शुरू होती है। MIT से पढ़ाई पूरी करने के बाद आदित्य विक्रम बिड़ला कलकत्ता लौटे। उस समय देश में लाइसेंस राज का दौर था और कई नई फैक्ट्री लगाने के लिए लंबी कागजी प्रक्रिया और सरकारी मंजूरियां जरूरी थीं। उनके पिता ने उन्हें एक इंडस्ट्रियल लाइसेंस दिया और अपनी टेक्सटाइल मिल खड़ी करने को कहा। आदित्य ने परिवार के मौजूदा कारोबार में सीधे शामिल होने के बजाय अपनी अलग कारोबारी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने कलकत्ता में Eastern Spinning Mills & Industries शुरू की और टेक्सटाइल तथा रेयॉन कारोबार पर काम किया।
1965 में किया वो काम, जो पहले किसी भारतीय ने नहीं किया
आदित्य विक्रम बिड़ला के कारोबारी सफर का सबसे बड़ा मोड़ 1969 में आया। सिर्फ 25 साल की उम्र में वह थाईलैंड पहुंचे और बैंकॉक में Indo-Thai Synthetics की शुरुआत की। यह फैसला इसलिए खास था क्योंकि उस समय भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया के लिए काफी हद तक बंद थी। आर्थिक उदारीकरण से करीब दो दशक पहले एक भारतीय कारोबारी का विदेश जाकर फैक्ट्री लगाना असाधारण कदम था। आदित्य बिड़ला की थाईलैंड वाली यूनिट को भारतीय कंपनी की पहली विदेशी फैक्ट्री के तौर पर जाना जाता है।
खास बात यह है कि मशहूर लेखिका गीता पीरामल की किताब 'बिजनेस महाराजस' में लिखा है कि यह किसी भारतीय कंपनी की विदेशी धरती पर बनाई गई पहली फैक्ट्री थी।
एक देश से शुरू हुआ सफर पहुंचा कई देश
थाइलैंड के बाद आदित्य बिड़ला ने कारोबार का विस्तार तेजी से किया। 1973 में इंडोनेशिया में टेक्सटाइल यूनिट शुरू हुई। 1974 में थाईलैंड में Thai Rayon आया। इसके बाद फिलीपींस, मलेशिया और इंडोनेशिया में भी कारोबार बढ़ा।
1977 में मलेशिया में Palm Oil का कारोबार शुरू हुआ, जबकि 1978 में Thailand Carbon Black की शुरुआत हुई। करीब दो दशकों के भीतर उनका कारोबार थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस और मिस्र जैसे देशों तक पहुंच गया। विदेशों में उनके पास 19 कंपनियां हो चुकी थीं।
सिर्फ कपड़े तक सीमित नहीं रखा कारोबार
आदित्य विक्रम बिड़ला ने कारोबार को सिर्फ टेक्सटाइल तक सीमित नहीं रखा। धीरे-धीरे ग्रुप ने एल्युमिनियम, केमिकल्स, फर्टिलाइजर, पेट्रोकेमिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, कार्बन ब्लैक, पाम ऑयल और इंसुलेटर्स जैसे सेक्टरों में भी विस्तार किया।
उनकी सोच बड़े पैमाने पर उत्पादन और बेहतर क्षमता पर केंद्रित थी। हालांकि कारोबारी दुनिया के अलावा उन्हें कला और संस्कृत में भी गहरी दिलचस्पी थी। उन्होंने संस्कृत की पढ़ाई की थी और पेंटिंग व परफॉर्मिंग आर्ट्स से भी जुड़े रहे।
ग्रुप की कमान संभाली तो बदली तस्वीर
1983 में जीडी बिड़ला के निधन के बाद आदित्य विक्रम बिड़ला ने ग्रुप के कई बड़े कारोबारों की जिम्मेदारी संभाली। तब तक वह करीब 18 साल का कारोबारी अनुभव हासिल कर चुके थे। उनके नेतृत्व में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, इंडियन रेयॉन और इंडो गल्फ फर्टिलाइजर्स जैसे कारोबारों का विस्तार हुआ।
51 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
1993 में आदित्य विक्रम बिड़ला को प्रोस्टेट कैंसर का पता चला। बीमारी के बावजूद वह कारोबार से जुड़े रहे। 1 अक्टूबर 1995 को अमेरिका के बाल्टिमोर में जॉन्स हॉपकिन्स अस्पताल में उनका निधन हुआ। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 51 वर्ष थी। उनके निधन के समय विदेशों में मौजूद कारोबार से करीब ₹8,000 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू आ रहा था। समूह का कुल टर्नओवर लगभग ₹15,000 करोड़ था और 70 हजार से ज्यादा लोग सीधे तौर पर इससे जुड़े थे।
बेटे कुमार मंगलम बिड़ला ने संभाली विरासत
आदित्य विक्रम बिड़ला के बाद उनके बेटे कुमार मंगलम बिड़ला ने महज 28 साल की उम्र में ग्रुप की जिम्मेदारी संभाली। उन्हें करीब ₹9,000 करोड़ की एसेट्स वाला कारोबारी साम्राज्य विरासत में मिला।
आगे चलकर अलग-अलग कंपनियों को एक मजबूत ब्रांड के तहत लाया गया। ग्रुप ने 60 से ज्यादा अधिग्रहण किए और करीब 20 सेक्टरों में अपनी मौजूदगी बनाई। आज आदित्य बिड़ला ग्रुप 41 से ज्यादा देशों में मौजूद है और इसमें करीब 2.27 लाख कर्मचारी काम करते हैं।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि आदित्य विक्रम बिड़ला को 2013 में भारत सरकार ने उनके सम्मान में स्मारक डाक टिकट (commemorative postage stamp) जारी करके सम्मानित किया था। उन्हें भारत के पहले ग्लोबल इंडस्ट्रियलिस्ट के रूप में भी याद किया जाता है।
