सर्च करे
Home
फोकस

Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    अंबानी, अनिल और अदाणी की रेयर अर्थ मिनरल्स पर नजर, तीनों ने दिखाई दिलचस्पी; चीन का तिलिस्म तोड़ने की तैयारी!

    Updated: Thu, 11 Jun 2026 06:50 PM (IST)

    मुकेश अंबानी, अनिल अग्रवाल और गौतम अदाणी ने भारत में रेयर अर्थ मिनरल्स के प्रसंस्करण में रुचि दिखाई है, जिससे चीन के एकाधिकार को चुनौती मिलेगी। भारत अ ...और पढ़ें

    अंबानी, अदाणी, अनिल अग्रवाल ने रेयर अर्थ प्रोसेसिंग में रुचि दिखाई

    अंबानी, अदाणी, अनिल अग्रवाल ने रेयर अर्थ प्रोसेसिंग में रुचि दिखाई

    HighLights

    1. अंबानी, अदाणी, अनिल अग्रवाल ने रेयर अर्थ प्रोसेसिंग में रुचि दिखाई।

    2. भारत चीन के रेयर अर्थ एकाधिकार को चुनौती देने को तैयार।

    3. आंध्र प्रदेश में रेयर अर्थ के बड़े भंडार, निवेश का लक्ष्य।

    नई दिल्ली। रेयर अर्थ मिनरल्स पर एकाधिकार रखने वाले चीन को आने वाले समय में भारत से कड़ी टक्कर मिल सकती है। दरअसल, भारत के तीन बड़े बिजनेसमैन मुकेश अंबानी, अनिल अग्रवाल और गौतम अदाणी ने रेयर-अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Metals) के बड़े भंडार को प्रोसेस की टेक्नोलॉजी विकसित करने में दिलचस्पी दिखाई है। यानी ये कंपनियां भारत में मौजूद रेयर अर्थ मिनरल्स के भंडार को प्रोसेस करने की टेक्नोलॉजी विकसित करने की इच्छा जताई है।
    .
    आज के समय में रेयर अर्थ मिनरल्स ऑटो सेक्टर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री और डिफेंस तक में बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है। इसके बिना आज के समय में किसी भी देश के लिए सर्वाइव करना बड़ा मुश्किल हो सकता है। यही कारण की सभी देश रेयर अर्थ मिनरल्स पर तेजी से काम कर रहे हैं। भारत ने तो अपने बजट में रेयर्थ अर्थ कॉरिडोर की घोषणा की थी।

    10 कंपनियों ने रेयर अर्थ मिनरल्स पर दिखाई दिलचस्पी

    एक सूत्र न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि नई दिल्ली रेयर-अर्थ के लिए चीन पर भारत की निर्भरता कम करना चाहती है। मुकेश अंबानी की रिलायंस, अनिल अग्रवाल की वेदांता और गौतम अदाणी की कंपनियां इस प्रोजेक्ट में दिलचस्पी दिखा रही हैं। ये तीनों कंपनियां उन लगभग 10 कंपनियों में शामिल हैं, जिन्होंने दक्षिणी राज्य में 'रेयर-अर्थ' सुविधाएं स्थापित करने में दिलचस्पी दिखाई है।

    आंध्र प्रदेश में पहचाने गए 16 इलाके

    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश में 16 पहचाने गए तटीय इलाकों में 211 मिलियन मीट्रिक टन बीच सैंड मिनरल रिसोर्स (समुद्र तट की रेत में मौजूद खनिज संसाधन) हैं, जिनमें रेयर अर्थ भी शामिल हैं। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार, भारत में 482.6 मिलियन टन रेयर अर्थ अयस्क संसाधन हैं।

    यह भी पढ़ें- Explainer: भारत के पास रेयर अर्थ एलिमेंट्स का तीसरा बड़ा भंडार, फिर क्यों हम चीन पर निर्भर? समझिए असली बात

    भारत रेयर अर्थ (Rare Earth Minerals Process) की माइनिंग, प्रोसेसिंग और मैग्नेट बनाने की घरेलू क्षमता बढ़ाने की कोशिशें तेज कर रहा है। आंध्र प्रदेश का लक्ष्य अगले दशक में रेयर अर्थ और टाइटेनियम में 500 अरब रुपये ($5.2 अरब) का निवेश आकर्षित करना है।

    खबरें और भी

    रेयर अर्थ कॉरिडोर में आंध्र प्रदेश शामिल

    फरवरी के केंद्रीय बजट में जिन चार राज्यों की पहचान 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' (जिसमें माइनिंग, प्रोसेसिंग और मैग्नेट प्रोडक्शन शामिल हैं) के विकास के लिए की गई थी, उनमें आंध्र प्रदेश भी शामिल था।

    यह पहल नई दिल्ली द्वारा नवंबर में रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने के लिए 73 अरब रुपये के प्रोग्राम को मंजूरी देने के बाद शुरू की गई थी।

    रेयर अर्थ एलिमेंट उन परमानेंट मैग्नेट के लिए ज़रूरी हैं जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल मोटर जैसे कामों में होता है। हालांकि भारत में रेयर अर्थ का काफी भंडार है, लेकिन यहां इन मिनरल्स को हाई प्योरिटी लेवल तक प्रोसेस करने में सक्षम इंडस्ट्रियल-स्केल की सुविधाएं नहीं हैं।

    टेंडर जारी करने की योजना बना रहा आंध्र प्रदेश

    सूत्रों के अनुसार, आंध्र प्रदेश अपनी 'रेयर अर्थ कॉरिडोर पॉलिसी' के लिए कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद रेयर अर्थ सुविधाओं के लिए टेंडर जारी करने की योजना बना रहा है। इस मंजूरी के एक महीने के भीतर मिलने की उम्मीद है।

    सूत्रों ने बताया कि राज्य 10 अरब रुपये या उससे ज्यादा निवेश वाले प्रोजेक्ट्स के लिए कैपिटल-लिंक्ड इंसेंटिव और अतिरिक्त फ़ायदे देने की भी योजना बना रहा है।

    यह भी पढ़ें- क्या भारत में आने वाला है प्लास्टिक नोटों का दौर? RBI गर्वनर के बयान के क्या हैं मायने; समझिए