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कबाड़ से बिजनेस शुरू कर दुनिया में छाया, आज ₹43500 करोड़ का मालिक; महिलाओं-बच्चों को दान करेगा 75% दौलत

Published: Sun, 06 Sep 2026 11:37 AM (IST)

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपनी 75% संपत्ति सामाजिक कार्यों और जनकल्याण के लिए दान करने का संकल्प ...और पढ़ें

अधिकतर संपत्ति दान करेंगे अनिल अग्रवाल (AI फोटो)

अधिकतर संपत्ति दान करेंगे अनिल अग्रवाल (AI फोटो)

HighLights

  1. अनिल अग्रवाल ने 75% संपत्ति सामाजिक कार्यों हेतु दान का संकल्प

  2. बच्चों की शिक्षा, पोषण और महिला सशक्तिकरण मुख्य फोकस

  3. 'नंद घर' परियोजना से आंगनवाड़ी केंद्रों का आधुनिकीकरण लक्ष्य

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया में अमीर बनने के बाद लोग अक्सर अपनी दौलत को बढ़ाते रहना चाहते हैं और उसे अगली पीढ़ियों के लिए बचाने की योजना बनाते हैं। लेकिन कुछ लोग इससे अलग सोचते हैं। इनमें वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal Net Worth) शामिल हैं।
कबाड़ के कारोबार से शुरू करके अरबों डॉलर का कारोबारी साम्राज्य बनाने वाले अग्रवाल ने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा दान करने का एलान किया था। उन्होंने अपनी संपत्ति का 75 फीसदी हिस्सा सामाजिक कार्यों और जनकल्याण के लिए देने का संकल्प लिया था। उन्होंने इसी साल की शुरुआत में ये बात कही थी।

इनके जीवन में आएगा बदलाव

अनिल अग्रवाल मानते रहे हैं कि कारोबार से कमाई गई संपत्ति पर सिर्फ परिवार का अधिकार नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका एक बड़ा हिस्सा समाज में लगना चाहिए। इसीलिए उन्होंने 75 फीसदी संपत्ति सामाजिक कार्यों के लिए देने का संकल्प लिया। इससे गरीबों और जरूरतमंदों की जिंदगी में बदलाव आएगा।

किन कामों में इस्तेमाल?

जनवरी 2026 में अपने बेटे अग्निवेश अग्रवाल के निधन के बाद अनिल अग्रवाल ने इस संकल्प को दोहराया था। उन्होंने कहा कि परिवार का सपना था कि देश में कोई बच्चा भूखा न सोए, किसी बच्चे की शिक्षा आर्थिक कमजोरी के कारण न रुके, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिले और युवाओं के पास सम्मानजनक रोजगार हो।
अग्रवाल ने संकेत दिया कि अब उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा इन्हीं सामाजिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में लगाया जाएगा।

बच्चों और महिलाओं पर फोकस

अनिल अग्रवाल के परोपकारी कार्यों का फोकस शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण रहा है। उनका प्रमुख प्रोजेक्ट नंद घर देश के आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की पहल है। इन केंद्रों के जरिए बच्चों को बेहतर पोषण और शुरुआती शिक्षा देने के साथ महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
उनका मानना है कि भारत का भविष्य मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले बच्चों और महिलाओं में निवेश जरूरी है।

अनिल अग्रवाल की कहानी

अनिल अग्रवाल की कहानी संघर्ष से सफलता और अब सफलता से समाज सेवा की ओर है। बिहार के पटना से निकलकर उन्होंने छोटे स्तर पर स्क्रैप कारोबार शुरू किया और धीरे-धीरे वेदांता जैसे ग्लोबल कारोबारी ग्रुप की नींव रखी।
आज वह अपनी संपत्ति को निजी उपलब्धि से ज्यादा सामाजिक जिम्मेदारी मानते हैं। 75 फीसदी दौलत दान करने का उनका फैसला भारतीय उद्योग जगत के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि असली विरासत केवल कंपनियां और संपत्ति नहीं, बल्कि वह बदलाव है जो इंसान अपने संसाधनों से समाज में पैदा करता है।

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