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    'इन 41 फैक्ट्रियों को निजी हाथों में सौंपो', डिफेंस में भारत कैसे बनेगा सुपरपावर? अनिल अग्रवाल ने दिया फॉर्मूला!

    Updated: Fri, 03 Apr 2026 06:54 PM (IST)

    Anil Agarwal Defence Vision: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत को 'डिफेंस हब' बनाने के लिए 41 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के निजीकरण का सुझाव दिय ...और पढ़ें

    अनिल अग्रवाल का बड़ा विजन: 41 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के निजीकरण से भारत बनेगा डिफेंस सुपरपावर

    अनिल अग्रवाल का बड़ा विजन: 41 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के निजीकरण से भारत बनेगा डिफेंस सुपरपावर

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    नई दिल्ली| "भारत को अगर दुनिया का 'डिफेंस हब' बनना है, तो उसे अपनी पुरानी ताकतों को नए पंख देने होंगे।" यह कहना है- वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal Vedanta) का, जिन्होंने देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ा विजन साझा (Anil Agarwal Defence Vision) किया है।

    उनका कहना है कि आज के दौर में रक्षा उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भर (India Self Reliance Defence) होना सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि मजबूरी है।

    'तलवारें और तोपें थीं असली ताकत'

    अग्रवाल ने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि,

    हमारे राजा-महाराजा भले ही शांतिप्रिय थे, लेकिन उनकी ताकत का असली आधार उनकी तलवारें, घोड़े और तोपें ही थीं। आज भी वही सिद्धांत लागू होता है। भारत के पास 41 ऐसी ऑर्डनेंस (आयुध) फैक्ट्रियां हैं, जो हथियार और गोला-बारूद बनाती हैं।"

    वेदांता चेयरमैन ने बताया कि उन्होंने जब जबलपुर और भुसावल की फैक्ट्रियों (India Model Defence Factories) का दौरा किया, तो वे वहां की स्केल और टेक्नोलॉजी देखकर दंग रह गए।

    निजी हाथों में कमान, तो 10 गुना होगा काम!

    अनिल अग्रवाल का मानना है कि इतनी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर रातों-रात खड़ी नहीं की जा सकती। ये फैक्ट्रियां अपने आप में पूरे 'शहर' जैसी हैं, जहां बेहतरीन मैनेजमेंट और हुनरमंद लोग हैं। लेकिन, अब समय है इन्हें आधुनिक बनाने का। उनके मुताबिक, अगर इन सरकारी फैक्ट्रियों में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए, तो इनका प्रोडक्शन 10 गुना (Defence Production 10x Growth) तक बढ़ सकता है।

    एयर इंडिया जैसा मॉडल अपनाने की सलाह

    वेदांता चेयरमैन ने जोर देकर कहा कि इन फैक्ट्रियों का निजीकरण 'एयर इंडिया' की तर्ज पर बिल्कुल स्मूथ तरीके से होना चाहिए। समय बहुत कीमती है और हमें जमीन, हवा और पानी तीनों मोर्चों पर स्वदेशी हथियारों की जरूरत है।

    अगर सरकार और प्राइवेट सेक्टर हाथ मिला लें, तो भारत न सिर्फ अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि रक्षा निर्यात (Export) के जरिए देश की जीडीपी और नौकरियों में भी क्रांति ला सकता है। पीएम मोदी के विजन को जमीन पर उतारने के लिए अब बस सटीक 'एग्जीक्यूशन' की देरी है।

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