Explainer: फ्लैट में लग जाए आग, तो लाखों-करोड़ के नुकसान की भरपाई कौन करेगा? बिल्डर, RWA या इंश्योरेंस कंपनी
गाजियाबाद की घटना के बाद, यह समझना महत्वपूर्ण है कि अपार्टमेंट में आग लगने पर लाखों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा। बिल्डर, RWA, या बीमा कंपनी की जिम्मे ...और पढ़ें

फ्लैट में लग जाए आग, तो लाखों-करोड़ के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
नई दिल्ली। विकास के नाम पर तेजी से हो रहे शहरीकरण के इस दौर में लाखों लोग बड़ी-बड़ी हाई-राइज सोसाइटी में रहते हैं। एक फ्लैट खरीदना सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि जीवनभर की कमाई और सपनों का निवेश होता है। लेकिन जब किसी अपार्टमेंट में आग लगती है, तो कुछ ही मिनटों में यह सपना राख में बदल सकता है।
हाल ही में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके की गौर ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में आग लगने की घटना ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया कि ऐसी स्थिति में नुकसान की भरपाई आखिर कौन करेगा? आग लगने से एक परिवार का सबकुछ उजड़ जाता है। सालों की कमाई मिनटों में खाक हो जाती है।
ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि बिल्डर, RWA और इंश्योरेंस कंपनी के बीच जिम्मेदारी कैसे तय होती है और एक फ्लैट मालिक के रूप में आपके अधिकार क्या हैं। आग लगने पर अगर फ्लैट जलता है, उसमें रखा समान राख बन जाता है तो इसकी भरपाई कौन करेगा?
इस एक्सप्लेनर में हम इन सभी सवालों के जवाब आसान भाषा में समझेंगे।
सोसाइटी के फ्लैट में आग लगने के बाद जिम्मेदारी तय कैसे होती है?
किसी भी आग की घटना में यह तय करना कि नुकसान कौन भरेगा, तीन मुख्य बातों पर निर्भर करता है: आग लगने की असली वजह क्या थी, सोसाइटी किसके नियंत्रण में है बिल्डर या RWA और किस तरह का इंश्योरेंस लिया गया है।
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इन तीनों पहलुओं को समझे बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं होता।
फ्लैट में आग लगने पर हुए नुकसान की भरपाई बिल्डर कब करेगा?
बिल्डर की जिम्मेदारी सीमित परिस्थितियों में ही तय होती है। अगर फ्लैट का पजेशन मिलने के कुछ समय बाद ही आग लगती है और जांच में यह सामने आता है कि इसका कारण निर्माण से जुड़ी खामियां थीं, जैसे खराब वायरिंग, घटिया निर्माण सामग्री या फायर सेफ्टी नियमों का पालन न करना, तो बिल्डर जिम्मेदार हो सकता है।
रियल एस्टेट कानून के तहत बिल्डर को प्रोजेक्ट का बीमा करवाना और पजेशन से पहले उसकी पूरी प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। उसे यह भी सुनिश्चित करना होता है कि सभी जरूरी सुरक्षा मानकों, जैसे फायर एनओसी और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट, पूरे किए गए हों।
यदि बिल्डर इन नियमों का पालन नहीं करता या बीमा दस्तावेज RWA को हस्तांतरित नहीं करता, तो बाद में होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी उसी पर आ सकती है।
आगे बढ़ें इससे पहले समझ लें कि आखिर RWA क्या है?
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन यानी RWA एक पंजीकृत गैर-सरकारी संगठन है (आमतौर पर सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत) एक हाउसिंग सोसाइटी में निवासियों का प्रतिनिधित्व करता है। यह सामान्य सुविधाओं का प्रबंधन करता है, सुरक्षा सुनिश्चित करता है, विवादों को हल करता है और कार्यक्रमों का आयोजन करता है।
RWA की क्या भूमिका और जिम्मेदारी होती है?
जब किसी सोसाइटी में RWA का गठन हो जाता है और बिल्डर प्रबंधन सौंप देता है, तब मेंटेनेंस और सुरक्षा की जिम्मेदारी RWA की होती है।
RWA का काम सिर्फ सफाई और बिल वसूली तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसे यह भी सुनिश्चित करना होता है कि पूरी बिल्डिंग में फायर सेफ्टी सिस्टम सही तरीके से काम कर रहे हों।
यदि आग लगने की वजह खराब मेंटेनेंस, वायरिंग की अनदेखी या फायर सुरक्षा उपकरणों की खराब स्थिति है, तो RWA को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।हालांकि, इसके लिए यह साबित करना जरूरी होता है कि लापरवाही वास्तव में RWA की थी।
इंश्योरेंस को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी?
अधिकांश लोग यह मानते हैं कि जो मेंटेनेंस चार्ज वे हर महीने देते हैं, उसमें उनके फ्लैट का पूरा बीमा शामिल होता है। लेकिन वास्तविकता इससे अलग है।
आमतौर पर RWA द्वारा लिया गया बीमा केवल बिल्डिंग के ढांचे और कॉमन एरिया को कवर करता है। इसमें सीढ़ियां, लिफ्ट, कॉरिडोर, बेसमेंट और अन्य साझा सुविधाएं शामिल होती हैं।
लेकिन फ्लैट के अंदर की चीजें जैसे फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, गहने और इंटीरियर इस बीमा के तहत नहीं आते। यानी, सोसाइटी का बीमा केवल उस संरचना को सुरक्षित करता है जिसमें आप रहते हैं, लेकिन आपके निजी सामान की सुरक्षा आपकी अपनी जिम्मेदारी होती है।
आग लगने की वजह क्यों सबसे महत्वपूर्ण है?
हर मामले में सबसे निर्णायक भूमिका आग लगने की वजह निभाती है। अगर कारण निर्माण दोष है तो बिल्डर जिम्मेदार होगा। अगर कारण मेंटेनेंस में लापरवाही है तो RWA जिम्मेदार होगी।
अगर आग किसी व्यक्ति की गलती से लगी है तो वह व्यक्ति जिम्मेदार हो सकता है। और यदि घटना बीमा पॉलिसी के दायरे में आती है तो बीमा कंपनी भुगतान करेगी। यही कारण है कि हर घटना के बाद जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाता है।
जब एक फ्लैट से दूसरे फ्लैट तक फैलती है आग, तब किसकी जिम्मेदारी?
हाई-राइज सोसाइटी में आग अक्सर एक फ्लैट से शुरू होकर कई फ्लैट्स तक फैल जाती है। ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी तय करना और जटिल हो जाता है।
अगर यह साबित हो जाए कि किसी एक फ्लैट मालिक की लापरवाही के कारण आग लगी, तो अन्य प्रभावित लोग उसके खिलाफ मुआवजे का दावा कर सकते हैं। यहां तक कि बीमा कंपनियां भी ऐसे मामलों में क्लेम देने से पहले विस्तृत जांच करती हैं और कई बार क्लेम खारिज भी हो सकता है।
बेंगलुरु में इंश्योरेंस न होने पर बिल्डर को देना पड़ा था मुआवजा
बेंगलुरु के कनकपुरा इलाके में एक हाउसिंग प्रोजेक्ट 2018 में पूरा हुआ और 2 नवंबर 2019 को बिल्डर ने मेंटेनेंस RWA को सौंप दिया। सोसाइटी के क्लब हाउस में बने सॉना रूम में 30 जनवरी 2024 को आग लग गई, जिससे काफी नुकसान हुआ। जांच में सामने आया कि आग हीटर के ओवरहीट होने से लगी थी, न कि किसी निर्माण दोष से।
रेजिडेंट्स ने बिना वकील के रेरा के तहत शिकायत की और बिल्डर से मरम्मत व इंश्योरेंस दस्तावेज देने की मांग की, लेकिन बिल्डर ने यह कहकर जिम्मेदारी से इनकार कर दिया कि मेंटेनेंस पहले ही ट्रांसफर हो चुका है।
मामला रेरा पहुंचा, जहां 29 नवंबर 2025 को फैसला आया। अथॉरिटी ने माना कि रोजमर्रा के रखरखाव के लिए बिल्डर जिम्मेदार नहीं है, लेकिन सेक्शन 16 के तहत प्रोजेक्ट का इंश्योरेंस करवाना और उसके दस्तावेज RWA को देना उसकी कानूनी जिम्मेदारी है।
बिल्डर सबूत नहीं दे पाया, इसलिए उसे 30 दिनों में दस्तावेज देने या मरम्मत का खर्च उठाने का आदेश दिया गया।
हर रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट के लिए बीमा कराना अनिवार्य
दरअसल, रेरा एक्ट 2017 लागू होने के बाद हर रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट के लिए बीमा कराना अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि सिर्फ इंश्योरेंस होना ही काफी नहीं है, इसके लिए बिल्डिंग को कुछ जरूरी नियमों और शर्तों का पालन भी करना होता है।
उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश में अगर कोई इमारत 15 मीटर से ज्यादा ऊंची है, तो उसके लिए फायर एनओसी लेना कानूनी रूप से जरूरी है। इसी के साथ बीमा करवाना भी अनिवार्य होता है।
अब सवाल उठता है कि इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी किसकी होती है। रेरा कानून इस बारे में स्पष्ट दिशा-निर्देश देता है। एक्ट की धारा 16 के मुताबिक, बिल्डर या प्रमोटर को जमीन के स्वामित्व और पूरे निर्माण कार्य का बीमा करवाना होता है। इतना ही नहीं, पजेशन देने से पहले इस बीमा से जुड़े सभी प्रीमियम और अन्य शुल्क का भुगतान करना भी बिल्डर की जिम्मेदारी होती है।
इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि बिल्डर अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकता, खासकर जब वह कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं करता।
आग लगने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए आपको क्या करना चाहिए?
अगर आग से आपको नुकसान हुआ है, तो आपके पास कई कानूनी विकल्प मौजूद हैं। आप संबंधित पक्ष के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
सिविल कोर्ट में मुआवजे के लिए केस दायर कर सकते हैं। इसके अलावा, कंज्यूमर फोरम में भी शिकायत की जा सकती है क्योंकि आप मेंटेनेंस शुल्क देकर सेवाएं ले रहे होते हैं। हालांकि, हर मामले में यह साबित करना जरूरी होता है कि नुकसान किसी की लापरवाही के कारण हुआ है।
इंडिपेंडेंट फ्लैट्स में ना तो बिल्डर और ना ही RWA की होती है जिम्मेदारी
छोटी बिल्डिंग्स या इंडिपेंडेंट फ्लैट्स में अक्सर कोई RWA नहीं होती। ऐसे मामलों में बिल्डर भी निर्माण के बाद जिम्मेदार नहीं रहता। इसलिए अगर कोई दुर्घटना होती है, तो पूरा नुकसान फ्लैट मालिक को ही उठाना पड़ता है। यहां व्यक्तिगत बीमा और भी अधिक जरूरी हो जाता है।
अगर आप अपने घर के अंदर की चीजों को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो आपको अलग से होम इंश्योरेंस लेना चाहिए। इसमें आपके घर का इंटीरियर, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य कीमती सामान कवर हो सकता है।
आग लगने के बाद क्लेम पाने के लिए आपको तुरंत बीमा कंपनी को सूचित करना होता है। इसके बाद सर्वेयर नुकसान का आकलन करता है और दस्तावेजों की जांच के बाद क्लेम की राशि तय की जाती है। यदि आपने केवल बिल्डिंग पर निर्भर रहकर कोई व्यक्तिगत बीमा नहीं लिया है, तो नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो सकता है।