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भारत का पहला बिस्किट ब्रांड: ₹295 से शुरुआत, आज ₹1.2 लाख करोड़ हैसियत; इसी को खाकर अंग्रेज लड़े थे WWII

Published: Mon, 07 Sep 2026 12:46 PM (IST)Updated: Mon, 07 Sep 2026 12:52 PM (IST)

भारत का पहला बिस्किट ब्रांड ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज 1892 में कोलकाता में ₹295 के शुरुआती निवेश से शुरू हुआ था। आज ...और पढ़ें

किसने शुरू की थी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज? (AI फोटो)

किसने शुरू की थी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज? (AI फोटो)

HighLights

  1. भारत का सबसे पहला बिस्किट ब्रांड ब्रिटानिया है

  2. इसकी शुरुआत 1892 में कोलकाता में ₹295 से हुई थी

  3. आज यह वाडिया ग्रुप की 1.21 लाख करोड़ की कंपनी है

नई दिल्ली। भारत में बिस्किट और कुकीज का एक बहुत बड़ा बाज़ार है, जिसमें घर-घर में मशहूर ब्रांड और रोजeना खाए जाने वाले स्नैक उत्पाद शामिल हैं। कई बड़ी कंपनियों के बिस्किट और कुकीज घर-घर में खाए जाते हैं। पर आपको बता दें कि देश का सबसे पहला बिस्किट ब्रांड (First Biscuit Brand in India) ब्रिटानिया है। आइए जानते हैं ब्रिटानिया इतिहास।

कितना पुराना है इतिहास?

भारत का सबसे पहला और पुराना बिस्कुट और फूड प्रोडक्ट ब्रांड ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज (Britannia Industries) है, जिसकी शुरुआत 134 साल पहले सन 1892 में कोलकाता में की गयी थी। मगर ये पूरी तरह से भारतीय ब्रांड नहीं था।
इसे ब्रिटिश उद्योगपतियों ने एक छोटी बेकरी के तौर पर शुरू किया था, जहाँ बिस्किट के शुरुआती बैच स्थानीय स्तर पर बनाए जाते थे।

कुछ और था पहला नाम

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज की शुरुआत 'ब्रिटानिया बिस्किट्स कंपनी लिमिटेड' के तौर पर शुरू हुई थी। बाद में ये एक बड़ी मल्टीनेशनल फ़ूड प्रोडक्ट्स कंपनी बन गई। अंग्रेजों द्वारा शुरू की गयी इस कंपनी की ओनरशिप आज वाडिया ग्रुप के पास है।
वाडिया ग्रुप ने 1990 के दशक की शुरुआत और फिर 2009 में दो चरणों में अधिग्रहण के जरिए ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज का पूरा कंट्रोल हासिल किया।

सिर्फ 295 रुपये से हुई शुरुआत

ब्रिटानिया की शुरुआत ब्रिटिश व्यापारियों ने ₹295 के शुरुआती निवेश के साथ की थी। शुरू में, बिस्किट सेंट्रल कोलकाता के एक छोटे से घर में बनाए जाते थे। बाद में, इस कंपनी को गुप्ता भाइयों (मुख्य रूप से वकील नलिन चंद्र गुप्ता) ने खरीद लिया और इसे V.S. ब्रदर्स के नाम से चलाया।
1918 में, कोलकाता में रहने वाले ब्रिटिश व्यापारी C.H. होम्स को पार्टनर बनाया गया और 'द ब्रिटानिया बिस्किट कंपनी लिमिटेड' (BBCo) शुरू की गई। 1924 में मुंबई में फैक्ट्री लगाई गई और 'पीक फ्रेन्स' (Peek Freans) ने BBCo में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी हासिल कर ली।

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान का इतिहास

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, ब्रिटिश भारत सरकार को ब्रिटिश सैनिकों के लिए बिस्किट की लगातार सप्लाई की जरूरत थी। ब्रिटानिया बिस्किट कंपनी ने कई सालों तक ब्रिटिश सेना को बिस्किट सप्लाई किए। कई बार तो सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनी अपनी प्रोडक्शन क्षमता का 95% हिस्सा इसी काम में लगा देती थी।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बिस्किट की बहुत ज्यादा मांग थी, जिससे कंपनी की बिक्री में तेजी आई। 1979 में कंपनी का नाम बदलकर 'ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड' कर दिया गया। 1982 में, अमेरिकी कंपनी 'नाबिस्को' (Nabisco) ने 'पीक फ्रेन्स' की पैरेंट कंपनी को खरीद लिया और एक बड़ी विदेशी शेयरहोल्डर बन गई।

1978 में आया पब्लिक इश्यू

1978 में ब्रिटानिया अपना IPO लेकर आई और इसकी भारतीय हिस्सेदारी बढ़कर 62% हो गई, जिससे ब्रिटानिया मजबूती से एक भारतीय कंपनी के तौर पर स्थापित हो गई। 38% विदेशी हिस्सेदारी UK की कंपनी 'एसोसिएटेड बिस्किट इंटरनेशनल लिमिटेड' के पास थी।

1980 के दशक में खरीदने की कोशिश

1980 के दशक के आखिर में, वाडिया ग्रुप के नुस्ली वाडिया ने ब्रिटानिया को खरीदने की कोशिश की, जो उस समय RJR नैबिस्को की कंपनी थी। मगर नैबिस्को ने वाडिया के सहयोगी, भारतीय बिजनेसमैन राजन पिल्लई को चुना, जो फ्रांसीसी फूड कंपनी ग्रुप डैनोन के सपोर्ट से इसके चेयरमैन बने।
बाद में पिल्लई और डैनोन के बीच अनबन हो गई, जब डैनोन ने पिल्लई पर वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी का आरोप लगाया। आखिरकार वो मौका आया जब नुस्ली वाडिया ने ब्रिटानिया को एक इंडियन कंपनी बना लिया।

आज ये वाडिया ग्रुप की बहुत अहम कंपनी है, जिसकी मार्केट कैपिटल 1.21 लाख करोड़ रुपये है। ये अपने रेवेन्यू का 80 फीसदी तक केवल बिस्किट से ही हासिल करती है। बिस्किट के अलावा कंपनी ब्रेड, केक, रस्क, चीज, घी और दही भी बेचती है।

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