असंभव होगा संभव! समुद्र पर 64 किमी लंबा बांध बनाएगा भारत; 7800 लाख क्यूबिक मीटर पानी रोकने की तैयारी
गुजरात खंभात की खाड़ी में कल्पसर परियोजना बना रहा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा तटीय मीठे पानी का जलाशय ...और पढ़ें

सबसे बड़ा पानी का प्रोजेक्ट (AI फोटो)
HighLights
खंभात की खाड़ी में बनेगा सबसे बड़ा मीठे पानी का जलाशय
सौराष्ट्र की 10 लाख हेक्टेयर भूमि को मिलेगा सिंचाई का पानी
परियोजना से 2,470 मेगावाट सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन
नई दिल्ली। समुद्र में जाने वाले नदियों के पानी को रोकना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। मगर भारत ऐसा करने जा रहा है। भारत एक प्रोजेक्ट बना रहा है, जिसके जरिए नदियों के पानी को समुद्र में जाने से रोका जाएगा और उसका इस्तेमाल कई तरह के कामों में किया जाएगा, जिससे कई इकोनॉमिक फायदे होंगे। आइए इस प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानते हैं।
गुजरात का कल्पसर परियोजना
हम बात कर रहे हैं महात्वाकांक्षी परियोजना कल्पसर परियोजना (Kalpasar Project) की। यह गुजरात सरकार द्वारा खंभात की खाड़ी (Gulf of Khambhat) में समुद्र के ऊपर बनाया जाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा तटीय मीठे पानी का जलाशय होगा।
इस प्रोजेक्ट के तहत समुद्र के एक हिस्से को बांधकर लगभग 7,800 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) मीठे पानी को समुद्र में बेकार बह जाने से रोका जाएगा। इससे गुजरात के सूखाग्रस्त सौराष्ट्र क्षेत्र को पानी मिलेगा।
बन जाएगी एक बड़ी झील
खंभात की खाड़ी में लगभग 60 से 64 किलोमीटर लंबा बांध या डाइक बनाकर एक बड़े मीठे पानी का तटीय जलाशय तैयार करना है। इसमें साबरमती, माही, धाधर और नर्मदा जैसी नदियों के अपवाह और उनके बेकार बहने वाले मीठे पानी को इकट्ठा किया जाएगा।
इससे लगभग 1,600 से 2,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली दुनिया की सबसे बड़ी आर्टिफिशियल मीठे पानी की झीलों में से एक बनेगी।
कौन बना रहा ये प्रोजेक्ट?
कल्पसर परियोजना गुजरात सरकार बना रही है, जिसमें केंद्र सरकार और नीदरलैंड्स का तकनीकी सहयोग भी शामिल है। इस परियोजना का फ्रेमवर्क और तकनीकी सहयोग के लिए नीदरलैंड की कंसल्टेंसी कंपनी NEDECO (Netherlands Engineering Consultants) की मदद ली जा रही है।
कितनी आएगी लागत?
गुजरात की कल्पसर परियोजना की अनुमानित कुल निर्माण लागत लगभग ₹1.25 लाख करोड़ से ₹1.33 लाख करोड़ के बीच हो सकती है। बता दें कि गुजरात की कल्पसर परियोजना के मौजूदा सचिव के. बी. राबड़िया हैं, जो इस प्रोजेक्ट की देख-रेख संभाल रहे हैं।
क्या होंगे आर्थिक फायदे?
- सौराष्ट्र के 9 जिलों के 42 तालुकों में लगभग 10 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए मीठा पानी मिलेगा।
- पानी की कमी से होने वाले फसल नुकसान में कमी आएगी और कृषि उत्पादकता बढ़ेगी।
- खंभात की खाड़ी पर बांध के ऊपर बनने वाले सड़क और रेल कॉरिडोर से भावनगर और सूरत के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी।
- यात्रा की दूरी घटने से परिवहन और ईंधन की लागत बचेगी, जिससे व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
- परियोजना के तहत लगभग 2,470 मेगावाट सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन प्रस्तावित है।
- दुनिया के सबसे बड़े तटीय मीठे पानी के जलाशयों में से एक बनने से पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के लिए पानी की आपूर्ति आसान होगी।
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