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    L&T की ये बड़ी कंपनी ₹6889 करोड़ में Torrent Power के हाथों बिकी, मेगा डील पर CCI की लगी मुहर

    Updated: Wed, 08 Apr 2026 05:33 PM (IST)

    भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने टोरेंट पावर द्वारा नाभा पावर लिमिटेड के 100% अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। यह सौदा एल एंड टी पावर डेवलपमेंट से ₹6, ...और पढ़ें

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    भाषा, नई दिल्ली। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने टोरेंट पावर के नाभा पावर लि. में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। टोंरेंट पावर ने फरवरी, 2026 में घोषणा की थी कि उसने एल एंड टी पावर डेवलपमेंट के साथ नाभा पावर में 100 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी 6,889 करोड़ रुपये के उद्यम मूल्य पर हासिल करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

    नियामक ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ‘‘प्रस्तावित सौदे में एल एंड टी पावर डेवलपमेंट लि. से टोरेंट पावर लि. द्वारा नाभा पावर में 100 प्रतिशत इक्विटी शेयर और गैर-संचयी वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय विमोच्य तरजीही शेयर का अधिग्रहण शामिल है।’’

     टोरेंट समूह क्या काम करती है?

    विभिन्न कारोबार से जुड़े टोरेंट समूह की इकाई टोरेंट पावर बिजली उत्पादन, पारेषण, वितरण और बिजली पारेषण केबल के विनिर्माण और आपूर्ति के कारोबार से जुड़ी हुई है। नाभा पावर लिमिटेड, एल एंड टी पावर डेवलपमेंट लिमिटेड (एल एंड टीपीडीएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी है और यह 2014 से पंजाब के राजपुरा में 700 मेगावाट की दो इकाइयों का अत्याधुनिक बिजलीघर संचालित कर रही है। एल एंड टीपीडीएल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी है।

    एल एंड टीडीपीएल, बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। 

    नियामक ने X पर एक पोस्ट में कहा, "सीसीआई ने टोरेंट पावर लिमिटेड द्वारा नाभा पावर लिमिटेड में 100 प्रतिशत इक्विटी शेयर और गैर-संचयी वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय प्रतिदेय वरीयता शेयरों के प्रस्तावित अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है।"

    अधिग्रहण पूरा होने के बाद, टोरेंट की परिचालन क्षमता 5 गीगावाट से बढ़कर 6.4 गीगावाट हो जाएगी।

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    इस सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट ने वित्त वर्ष 2025 में 4,866 करोड़ रुपये का राजस्व और 1,153 करोड़ रुपये का समायोजित ईबीआईटीडीए दर्ज किया, साथ ही प्लांट की उपलब्धता दर 95.36 प्रतिशत रही।

    एक निश्चित सीमा से अधिक के सौदों के लिए नियामक की मंजूरी आवश्यक होती है, जो अनुचित व्यावसायिक प्रथाओं पर नजर रखता है और बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है।

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