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    पिज्जा बेचने वाले का अरबपति बनने का किस्सा, ये प्लेन क्रैश सदमा बना टर्निंग प्वाइंट; अब 1.19 लाख करोड़ के मालिक

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 04:13 PM (IST)

    देवयानी इंटरनेशनल और सैफायर फूड्स इंडिया के विलय की घोषणा के बाद देवयानी के शेयरों में उछाल आया। इस डील से भारत में केएफसी और पिज्जा हट का संचालन एक ह ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. देवयानी इंटरनेशनल और सैफायर फूड्स इंडिया के विलय की घोषणा।

    2. रवि जयपुरिया का फास्ट फूड साम्राज्य होगा और मजबूत।

    3. विलय से भारत में केएफसी, पिज्जा हट का संचालन एक इकाई।

    नई दिल्ली। केएफसी और पिज्जा हट की भारतीय ऑपरेटर देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली, जब कंपनी ने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्रेंचाइजी सफायर फूड्स इंडिया के साथ विलय की योजना का ऐलान किया। इस खबर के बाद देवयानी इंटरनेशनल के शेयरों में इंट्राडे कारोबार में 5.3% तक उछाल आया।

    यम! ब्रांड्स (Yum! Brands) के तहत केएफसी, पिज्जा हट और टैको बेल जैसे फास्ट फूड ब्रांड भारत में फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए संचालित होते हैं। फिलहाल देवयानी इंटरनेशनल, सैफायर फूड्स इंडिया और बर्मन हॉस्पिटैलिटी इसके प्रमुख फ्रेंचाइजी पार्टनर हैं। प्रस्तावित डील के बाद भारत में केएफसी और पिज्जा हट का संचालन एक ही बड़ी इकाई के तहत आ जाएगा।

    हालांकि देवयानी इंटरनेशनल ने डील की वैल्यू की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन रॉयटर्स के मुताबिक इस विलय की कुल कीमत करीब 934 मिलियन डॉलर (लगभग 7,700 करोड़ रुपये) आंकी गई है। समझौते के तहत देवयानी इंटरनेशनल, सैफायर फूड्स इंडिया के हर 100 शेयरों के बदले 117 नए शेयर जारी करेगी। वहीं, इस ऐलान के बाद सैफायर फूड्स इंडिया के शेयरों में शुरुआती कारोबार में 6.4% तक की गिरावट दर्ज की गई।

    रवि जयपुरिया: कोला किंग से फास्ट फूड तक

    देवयानी इंटरनेशनल के पीछे कारोबारी दिमाग अरबपति रवि जयपुरिया का है, जिन्हें ‘कोला किंग ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। वे RJ कॉर्प के चेयरमैन हैं और दो लिस्टेड कंपनियों वरुण बेवरेजेज लिमिटेड और देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड के प्रमोटर हैं। आज उनका कारोबारी साम्राज्य पेय पदार्थों, फास्ट फूड, हेल्थकेयर और शिक्षा तक फैला हुआ है।

    खबरें और भी

    1953 में जन्मे रवि जयपुरिया ने भारत में पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में बिजनेस मैनेजमेंट की शिक्षा ली। वे तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। 1985 में वे भारत लौटे और परिवार के कोका-कोला बॉटलिंग बिजनेस से जुड़े। 1987 में पारिवारिक कारोबार के बंटवारे के बाद उन्हें एक बॉटलिंग प्लांट मिला, जिसके बाद उन्होंने कोका-कोला की जगह पेप्सीको के साथ काम करने का फैसला किया।

    हादसा जिसने बदल दी जिंदगी की दिशा

    बहुत कम लोग जानते हैं कि अगर 1985 का कनिष्क विमान हादसा नहीं होता, तो शायद रवि जयपुरिया कभी भारत लौटते ही नहीं। उस हादसे में उन्होंने अपने कुछ करीबी रिश्तेदार खो दिए थे। उस समय वे कनाडा के मॉन्ट्रियल में टेक्सटाइल और रियल एस्टेट का बिजनेस कर रहे थे और करीब 14-15 साल से वहीं बसे हुए थे। यही त्रासदी उन्हें वापस भारत लाई और उन्होंने पारिवारिक कारोबार की कमान संभाली।

    पेप्सी से पिज्जा तक का साम्राज्य

    जयपुरिया परिवार ने 1960 के दशक में कोका-कोला के बॉटलर के तौर पर शुरुआत की थी। 1977 में कोका-कोला के भारत छोड़ने के बाद परिवार ने पार्ले के थम्स अप ब्रांड के साथ काम किया। 1991 में पेप्सीको के भारत आने के साथ ही परिवार की साझेदारी शुरू हुई, जो आज भी जयपुरिया के कारोबार की रीढ़ है। उनके बिजनेस का करीब 40% हिस्सा पेप्सीको से जुड़ा है।

    रवि जयपुरिया ने कब किया और किस कारोबार जमाई धाक

    • 1988-89: क्रीम बेल आइसक्रीम
    • 1996: पिज्जा हट और केएफसी की भारत में एंट्री
    • 2001: शिक्षा क्षेत्र (दिल्ली पब्लिक स्कूल की फ्रेंचाइजी)
    • 2002–03: रियल एस्टेट
    • 2005: कोस्टा कॉफी
    • 2007: बीयर बिजनेस (InBev के साथ साझेदारी)

    रवि जयपुरिया की नेटवर्थ

    फोर्ब्स के अनुसार, जनवरी 2026 तक उनकी नेटवर्थ करीब 13.1 अरब डॉलर, यानी 1.19 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। वे दुनिया के 220वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। आज देवयानी इंटरनेशनल और सैफायर फूड्स के प्रस्तावित विलय के साथ, रवि जयपुरिया का फास्ट फूड साम्राज्य और भी मजबूत होने जा रहा है।

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