अनिल अंबानी की RCOM के खिलाफ ED का सबसे बड़ा एक्शन, जब्त होगी 8000 करोड़ की संपत्ति; जेल में हैं 2 बड़े अधिकारी
ED ने RCom के खिलाफ PMLA मामले में सप्लीमेंट्री कंप्लेंट दायर की है, जिसमें ₹40,185.55 करोड़ के अपराध की कमाई का आरोप है। ...और पढ़ें

अनिल अंबानी की RCom पर ED का शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नई शिकायत दर्ज
HighLights
ED ने RCom के खिलाफ PMLA में सप्लीमेंट्री कंप्लेंट दायर की।
₹40,185.55 करोड़ की अपराध की कमाई का आरोप।
₹8,078.06 करोड़ की संपत्ति जब्त करने का अनुरोध।
नई दिल्ली| एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने अनिल अंबानी की RCom के खिलाफ चल रहे प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) मामले में एक सप्लीमेंट्री कंप्लेंट (अतिरिक्त शिकायत) दायर की है। सरकारी एजेंसी ने रविवार को यह जानकारी दी। सप्लीमेंट्री कंप्लेंट पहले से दायर शिकायत में जोड़ी गई एक अतिरिक्त शिकायत होती है, जिसमें मामले से जुड़ी अहम नई जानकारी शामिल होती है।
जांच एजेंसी ने बताया कि 27 मार्च को शुरुआती प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) के बाद, शनिवार को एक सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की गई। ED के बयान में कहा गया है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom), रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL), गौतम भाईलाल दोषी, सतीश सेठ, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य को PMLA, 2002 की धारा 4 के तहत दंडनीय अपराधों खासकर धारा 3 और धारा 70 (धारा 3 के साथ मिलाकर) के तहत आरोपी बनाया गया है।
इस अपराध से हुई कमाई की कीमत ₹40,185.55 करोड़ आंकी गई है। यह वह कुल बकाया रकम है जिसे उधार लेने वाली कंपनियां बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बॉन्डहोल्डर्स के समूह को नहीं चुका पाईं। फंड जुटाने, इस्तेमाल करने, छिपाने और दिखाने में आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं की पहचान की गई है। इसमें फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड (FCCB) के ज़रिए जुटाए गए $1 बिलियन के अंतिम इस्तेमाल के बारे में झूठे सर्टिफ़िकेट जमा करना भी शामिल है।
₹8,078.06 करोड़ की उन संपत्तियों को ज़ब्त करने का अनुरोध किया गया है, जिन्हें पहले ही एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने अटैच और कन्फर्म कर दिया था। इन संपत्तियों में नई दिल्ली, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे में मौजूद लीज़होल्ड और अचल संपत्तियां शामिल हैं। इस ECIR के तहत, आरोपी को इस साल 12 जून को और सेठ को 9 जुलाई को गिरफ़्तार किया गया था। दोनों अभी न्यायिक हिरासत में हैं। PMLA मामलों की विशेष अदालत ने इस मामले में मुख्य अभियोजन शिकायत का 15 जून को संज्ञान लिया।
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ED ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों के आधार पर CBI की बैंकिंग सिक्योरिटीज़ एंड फ्रॉड ब्रांच, नई दिल्ली द्वारा दर्ज कई FIR के आधार पर जांच शुरू की। ये मामले RCom, RTL और रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड द्वारा फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं का धोखाधड़ी से लाभ उठाने और बाद में उनके फंड को दूसरी जगह लगाने से जुड़े हैं। इस जांच में आपस में जुड़े कई लेन-देन शामिल हैं।
जांच से पता चला कि मंज़ूर किए गए इस्तेमाल के बजाय, नई क्रेडिट सुविधाओं का बार-बार और धोखाधड़ी से इस्तेमाल मौजूदा घरेलू और विदेशी देनदारियों को चुकाने, घुमाने और 'एवरग्रीन' (लगातार रिन्यू) करने के लिए किया गया। इन फंड्स को ग्रुप कंपनियों, स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPVs), कई बैंक अकाउंट्स और लिक्विड म्यूचुअल फंड्स के ज़रिए घुमाया गया; इनका इस्तेमाल मौजूदा एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECBs) और फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स (FCCBs) को चुकाने के लिए किया गया, जबकि इन्हें जायज़ बिज़नेस खर्च या आमदनी के तौर पर दिखाया गया।
ED has filed a Prosecution Complaint (PC) on 08.08.2026 under the Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 before the Hon'ble Special Court (PMLA), Dwarka District Courts, New Delhi, in the case of M/s Reliance Infrastructure Ltd. pic.twitter.com/EYItlVZrTQ
— ED (@dir_ed) August 9, 2026
जांच से यह भी पता चला कि यह धोखाधड़ी वाली स्कीम बहुत पहले कम से कम 2007 में शुरू हुई थी और उसके बाद भी आपराधिक गतिविधियों की एक आपस में जुड़ी हुई और लगातार चलने वाली सीरीज़ के तौर पर जारी रही। लोन से मिले फंड को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड जैसी ग्रुप कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया। प्रमोटरों ने लोन से मिली रकम का इस्तेमाल भारत के बाहर पर्सनल एसेट खरीदने और RCom के मुनाफ़े को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए भी किया। बयान में कहा गया है कि इस मामले की आगे की जांच अभी भी जारी है।
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