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    2 लाख करोड़ का राहत पैकेज, 'कोरोना काल' जैसी क्रेडिट स्कीम, ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार की बड़ी तैयारी

    Updated: Fri, 03 Apr 2026 03:49 PM (GMT+05:30)

    ईरान युद्ध के बीच, भारत सरकार 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के आर्थिक सहायता पैकेज की तैयारी कर रही है। यह योजना कोविड-काल की ECLGS मॉडल पर आधारित होगी, ज ...और पढ़ें

    वित्त मंत्रालय कर रहा है इस योजना पर काम (सांकेतिक तस्वीर)

    वित्त मंत्रालय कर रहा है इस योजना पर काम (सांकेतिक तस्वीर)

    HighLights

    1. ईरान युद्ध के बीच 2 लाख करोड़ का पैकेज संभव।

    2. MSMEs को बिना कोलेटरल के लोन मिलेगा।

    3. कोविड-काल की ECLGS मॉडल पर आधारित होगी यह क्रेडिट स्कीम।

    नई दिल्ली। ईरान युद्ध के बीच मोदी सरकार एक बड़ा आर्थिक एलान (Economic Package) कर सकती है। दरअसल, एनडीटीवी प्रॉफिट की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी सूत्रों ने कहा है कि वित्त मंत्रालय ईरान संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों की मदद के लिए 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के सहायता पैकेज पर काम कर रहा है। प्रस्तावित योजना कोविड काल की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के मॉडल पर आधारित है और वित्तीय सेवा विभाग द्वारा इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। अगले 15 दिनों के भीतर इसे लागू किए जाने की संभावना है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस योजना के तहत सरकार की गारंटी द्वारा समर्थित 'विद आउट कोलेटरल लोन' उपलब्ध कराए जाएंगे, यानी कर्ज के लिए बैंक के पास कुछ गिरवी नहीं रखना होगा। इस योजना में विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को टारगेट किया गया है, ताकि धन तक आसान पहुंच सुनिश्चित हो सके और नकदी संकट को रोका जा सके।

    क्या है ECLGS स्कीम?

    ECLGS (इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना) भारत सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान व्यवसायों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए शुरू की गई थी। यह एक प्रमुख वित्तीय सहायता योजना है, इसे मई 2020 में वित्त मंत्रालय द्वारा 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' पैकेज के हिस्से के रूप में लॉन्च किया गया था।

    महामारी और लॉकडाउन के कारण जिन MSME और अन्य व्यवसायों का काम ठप हो गया था या जिन्हें नकदी की भारी कमी का सामना करना पड़ा था, उन्हें बैंकों और NBFC के जरिए से बिना कुछ गिरवी रखे अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल (लोन) उपलब्ध कराया गया था।

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    क्या है सरकार की प्लानिंग

    रिपोर्ट के अनुसार, सरकार यह कदम ग्लोबल ट्रेड में व्यवधान के कारण निर्यात से जुड़े क्षेत्रों पर शुरुआती दबाव के संकेतों के बीच उठाया जा रहा है। एमएसएमई सेक्टर, जो स्थिर नकदी प्रवाह पर निर्भर होते हैं, उनके इस योजना से सबसे अधिक लाभान्वित होने की संभावना है।

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    अधिकारियों ने कहा बताया हालांकि फिलहाल कोई तात्कालिक प्रणालीगत संकट नहीं है, लेकिन सरकार एहतियाती उपाय तैयार कर रही है ताकि स्थिति और बिगड़ने पर तरलता सहायता सुनिश्चित की जा सके। भू-राजनीतिक तनाव कम होने पर भी, आपूर्ति में निरंतर व्यवधान और मांग में अनिश्चितता के कारण प्रभावित क्षेत्रों में सुधार में समय लग सकता है।