98 साल पहले मुंबई में खुला था देश का पहला पेट्रोल पंप, हैंडपंप से होती थी सप्लाई; 1 लीटर पेट्रोल की क्या थी कीमत?
भारत का पहला पेट्रोल पंप 1928 में मुंबई में बर्मा शेल द्वारा खोला गया था, जो बाद में भारत पेट्रोलियम बना। शुरुआत में हाथ से चलने वाले डिस्पेंसर और आया ...और पढ़ें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। आज भारत में कुल पेट्रोल पंप की संख्या 1 लाख से अधिक (Total Petrol Pumps in India) हो गई है। मगर क्या आप जानते हैं कि पहला पेट्रोल पंप किस शहर में खोला गया था और किसने उस पेट्रोल पंप की शुरुआत की थी? आइए जानते हैं भारत में शुरू हुए पहले पेट्रोल पंप का इतिहास।
कहां और कैसे हुई शुरुआत?
भारत का पहला पेट्रोल पंप 1928 में मुंबई में खोला गया था। तब मुंबई को बॉम्बे कहा जाता था। ये पेट्रोल पंप बर्मा शेल द्वारा शुरू किया गया था, जिसे बाद में भारत पेट्रोलियम के नाम से जाना गया। ह्यूजेस रोड (अब एनी बेसेंट रोड, वर्ली) पर स्थित इस स्टेशन को 'बर्मा शेल स्टेशन' कहा जाता था
उस पेट्रोल पंप में केवल दो हाथ से चलने वाले डिस्पेंसर थे और इसकी स्टोरेज कैपेसिटी लगभग 200-300 गैलन (900-1,200 लीटर) थी।
बर्मा शेल का इतिहास भी जानें
बर्मा शेल एक ब्रिटिश तेल कंपनी थी जिसने 1928 से 1976 तक भारत में काम किया, और पूरे देश में मिट्टी के तेल, पेट्रोल और लुब्रिकेंट्स के डिस्ट्रिब्यूशन की शुरुआत की। यह बर्मा ऑयल कंपनी और शेल पेट्रोलियम कंपनी के बीच एक जॉइंट वेंचर था।
भारत सरकार ने 1976 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया, जिससे भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) का गठन हुआ। आज यही कंपनी भारत में करीब 25000 पेट्रोल पंप ऑपरेट करती है।
कहां से आता था पेट्रोल?
उस समय, भारत में कोई तेल रिफाइनरी तो थी नहीं, इसलिए पेट्रोल को ही पानी के जहाजों के जरिए आयात किया जाता था। तब पेट्रोल बर्मा (अब म्यांमार), ईरान और पश्चिम एशिया से आता और फिर इसे ट्रकों या बैलगाड़ियों के जरिए 40-गैलन वाले ड्रमों में भरकर स्टेशन तक पहुँचाया जाता।
बता दें कि गाड़ियों में पेट्रोल भरने के लिए हैंड-पंपों का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे यह पूरी प्रोसेस पूरी तरह से हाथों से की जाती थी।
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कितनी थी पेट्रोल की कीमत?
पहले पेट्रोल पंप पर पेट्रोल की कीमत 1 आना (6 पैसे) से 2 आना (12 पैसे) प्रति लीटर के बीच थी। 6 पैसे के रेट पर देखें तो 1 रुपये में 16 लीटर से अधिक पेट्रोल मिल जाता था। मगर उस समय एक आम आदमी की औसत दैनिक आय 1 रुपये से भी कम थी, इसलिए ये रेट बहुत अधिक था।
कई चुनौतियां का भी था सामना
पहला पेट्रोल पंप खोलना इतना आसान नहीं था। गाड़ियों की लिमिटेड संख्या, फ्यूल की अनियमित सप्लाई और रिफाइनरियों की कमी के कारण कंपनी के सामने कई अनिश्चितता थीं। वहीं बारिश में ईंधन के ड्रमों को अक्सर जंग लग जाता, जिससे उनमें रिसाव होने लगता।
शुरुआत में इस बिजनेस के मुनाफे को लेकर काफी दुविधा रही, मगर बाद में यह बेहद सफल साबित हुआ।
कौन थे खरीदार?
इस पेट्रोल के शुरुआती ग्राहकों में अमीर पारसी और गुजराती व्यापारी परिवार थे। साथ ही ब्रिटिश अधिकारियों के अलावा सरकारी अधिकारी, मुंबई आने वाले राजा और टैक्सी ड्राइवर यहां के रेगुलर कस्टमर बन गए।
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