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Ola, Uber और डिलीवरी ब्वॉय के लिए नया नियम, आ सकता है सामाजिक सुरक्षा कोष; कैसे होगा फायदा?

By Jagran BusinessEdited By: Kashid Hussain
Published: Sun, 06 Sep 2026 03:21 PM (IST)

भारत में गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा अंशदान के नियमों पर बहस जारी है। कंपनियों के वार्षिक ...और पढ़ें

गिग वर्कर्स पर चर्चा जारी

गिग वर्कर्स पर चर्चा जारी

HighLights

  1. गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा अंशदान पर विचार

  2. अंशदान गणना के दो विकल्प: कारोबार या भुगतान का प्रतिशत

  3. भुगतान आधारित मॉडल से राइड-हेलिंग पर अत्यधिक बोझ संभव

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत में गिग और ऑनलाइन मंचों (प्लेटफॉर्म) के लिए काम करने वाले श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Social Security Contribution) को लागू करने की तैयारी के बीच नियमों से जुड़ा एक तकनीकी ऑप्शन प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
यह विकल्प इस बात पर निर्भर करता है कि एग्रीगेटर कंपनियों से अंशदान उनके वार्षिक कारोबार के आधार पर लिया जाए या कामगारों को किए जाने वाले भुगतान के प्रतिशत के आधार पर।

क्या है विश्लेषकों की राय?

विश्लेषकों और उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कंपनियों के वार्षिक कारोबार के बजाय प्रति लेनदेन या कामगारों के भुगतान से जुड़ा अंशदान मंच से जुड़ी अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक असमान वित्तीय बोझ डाल सकता है। इसका सबसे बुरा असर उन कारोबार क्षेत्रों पर पड़ेगा जो बहुत अधिक लेनदेन संख्या लेकिन कम मूल्य पर आधारित हैं।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत एग्रीगेटर कंपनियों के लिए गिग (अस्थायी) और ऑनलाइन मंच के लिए काम करने वाले कामगारों के वास्ते स्थापित सामाजिक सुरक्षा कोष में अंशदान देना अनिवार्य है। नियमों के अनुसार, किसी एक एग्रीगेटर के साथ वित्त वर्ष में 90 दिन या कई एग्रीगेटर कंपनियों के साथ कुल 120 दिन काम करने के बाद गिग कामगार इस योजना के तहत लाभ पाने का पात्र हो जाता है।

हर साल जमा करने का नियम

एग्रीगेटर कंपनियों को अपने वार्षिक अंशदान का आकलन कर उसे हर साल जमा करना होता है। श्रम और रोजगार मंत्रालय प्रति लेनदेन या भुगतान पर आधारित अंशदान व्यवस्था को मानक बनाने पर विचार कर रहा है। इस पद्धति का चयन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लेनदेन की संख्या, सेवाओं के मूल्य, व्यावसायिक मॉडल और कुल कारोबार के आधार पर विभिन्न मंच कंपनियों पर इसका असर बहुत अलग-अलग पड़ेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों व्यवस्थाओं की तुलना से स्पष्ट होता है कि भुगतान आधारित व्यवस्था राइड-हेलिंग (कैब, ऑटो व बाइक सेवा) जैसे अत्यधिक आवागमन वाले व्यवसायों पर काफी भारी बोझ डाल सकती है।

एक से दो प्रतिशत अंशदान देना होगा

संहिता की धारा 114(4) के तहत एग्रीगेटर को अपने वार्षिक कारोबार का एक से दो प्रतिशत अंशदान देना होगा, लेकिन यह राशि गिग और मंच कामगारों को किए जाने वाले कुल भुगतान के पांच प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। दूसरी तरफ, मंत्रालय विकल्प के रूप में सीधे कामगारों के भुगतान पर आधारित फॉर्मूले (भुगतान का पांच प्रतिशत तक) पर भी विचार कर रहा है।

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