अदाणी ग्रुप से वर्चस्व की जंग: GMR एयरपोर्ट्स का बड़ा दांव, दिल्ली-हैदराबाद में करेगी ₹19400 करोड़ का निवेश
GMR एयरपोर्ट्स लिमिटेड दिल्ली और हैदराबाद में अपनी सुविधाओं के विस्तार के लिए अगले 5-7 वर्षों में 19,400 करोड़ रुपये ...और पढ़ें

GMR एयरपोर्ट्स का बड़ा प्लान
HighLights
GMR एयरपोर्ट्स 19,400 करोड़ रुपये का निवेश करेगी
दिल्ली और हैदराबाद एयरपोर्ट्स का होगा विस्तार
यात्रियों की बढ़ती संख्या के लिए क्षमता बढ़ेगी
नई दिल्ली। अदाणी ग्रुप की एयरपोर्ट ऑपरेटर कंपनी की मुख्य प्रतिद्वंद्वी, GMR एयरपोर्ट्स लिमिटेड, नई दिल्ली और हैदराबाद में अपनी फैसिलिटीज को बढ़ाने के लिए 19,400 करोड़ रुपये (2 अरब डॉलर) तक खर्च करने की योजना बना रही है। यह आने वाले दशक में भारत के एविएशन मार्केट के लिए पॉजिटिव उम्मीदों का संकेत है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी के फाइनेंस एंड स्ट्रैटेजी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सौरभ चावला के अनुसार अगले पांच से सात वर्षों में किए जाने वाले इस निवेश का मकसद क्षमता बढ़ाना और इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाना है, ताकि तेजी से बढ़ती यात्रियों की संख्या के साथ तालमेल बिठाया जा सके।
हवाई यात्रियों की संख्या 1.1 अरब होने का अनुमान
यह योजना ऐसे समय पर पेश की गई है जब दुनिया के तीसरे सबसे बड़े घरेलू एविएशन मार्केट (अमेरिका और चीन के बाद) में मांग तेजी से बढ़ रही है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, अगले 14 वर्षों में भारत में हवाई यात्रियों की संख्या छह गुना बढ़कर लगभग 1.1 अरब होने का अनुमान है, जबकि कमर्शियल एयरलाइन फ्लीट (विमानों की संख्या) 2014 में 400 विमानों से बढ़कर 2040 तक 2,350 से अधिक विमान होने की उम्मीद है।
चावला के अनुसार कंपनी हैदराबाद के दक्षिणी औद्योगिक केंद्र में स्थित राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए लगभग 13,800 करोड़ रुपये और नई दिल्ली एयरपोर्ट के लिए 5,600 करोड़ रुपये तक खर्च करेगी। इन निवेशों के लिए संबंधित एयरपोर्ट वेंचर्स द्वारा डेट (कर्ज) और इक्विटी के जरिए जुटाया जाएगा और ये सीधे तौर पर होल्डिंग कंपनी GMR एयरपोर्ट्स से नहीं जुड़े होंगे।
कितने यात्रियों को संभाल पाएगी GMR?
इस नए निवेश के बाद हैदराबाद का अपग्रेडेड एयरपोर्ट लगभग 8 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा, जो इसके मौजूदा सालाना 3.4 करोड़ (34 मिलियन) यात्रियों की संख्या से दोगुने से भी अधिक है। बता दें कि सालाना यात्रियों की संख्या के हिसाब से GMR एयरपोर्ट्स भारत की सबसे बड़ी एयरपोर्ट ऑपरेटर कंपनी है, जबकि प्रतिद्वंद्वी अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड एयरपोर्ट्स की संख्या के हिसाब से सबसे बड़ी कंपनी है।
इससे पहले रिपोर्ट आई थी कि अदाणी ग्रुप अगले पांच वर्षों में अपनी एविएशन सुविधाओं में यात्रियों की क्षमता बढ़ाने के लिए 15 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रहा है। चावला ने कहा था कि नई दिल्ली और हैदराबाद में किए जा रहे ये विस्तार कार्य GMR एयरपोर्ट्स में आधुनिकीकरण अभियान की सिर्फ शुरुआत हो सकते हैं।
नागपुर में नए एयरपोर्ट के लिए इन्वेस्टमेंट प्लान
जीएमआर के पोर्टफोलियो में भारत में छह एयरपोर्ट, फिलीपींस में एक और ग्रीस में एक निर्माणाधीन एयरपोर्ट शामिल है। कंपनी नागपुर में नए एयरपोर्ट के लिए इन्वेस्टमेंट प्लान पर बातचीत कर रही है, जिसका कंट्रोल जून 2026 में ही लिया गया है।
GMR एयरपोर्ट्स (जिसमें फ्रांस की Aeroports de Paris SA की 26.5% हिस्सेदारी है) उन लोकल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स की बोली लगाने पर फोकस कर सकती है जिन्हें भारत सरकार बेचना चाहती है। साथ ही विदेशी एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स के रीडेवलपमेंट को लेकर कोई बातचीत नहीं हो रही है।
एविएशन सेक्टर को लेकर सरकार का प्लान
रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार एविएशन सेक्टर में कॉम्पिटिशन बढ़ाना चाहती है क्योंकि दो एयरलाइंस — इंडिगो और एयर इंडिया — का लोकल मार्केट के लगभग 90% हिस्से पर कब्जा है। हालांकि जीएमआर की एविएशन सेक्टर में कोई दिलचस्पी नहीं।
ये ग्रुप अपने मुख्य एयरपोर्ट बिजनेस और उससे जुड़े ऑपरेशन्स, जैसे एयरक्राफ्ट की मेंटेनेंस और एविएशन सुविधाओं के आस-पास रियल एस्टेट डेवलपमेंट पर ही फोकस करना चाहता है।
