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    अब समंदर का किंग होगा भारत! स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की तरह स्ट्रेट ऑफ मलक्का की होगी चर्चा? ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट समझिए

    Updated: Wed, 10 Jun 2026 06:32 PM (IST)

    भारत ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के जरिए हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक और आर्थिक शक्ति बढ़ा रहा है, जो मलक्का जलडमरूमध्य के पास एक महत्वपूर्ण समुद्री व्या ...और पढ़ें

    ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से होगी भारत की चांदी!

    ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से होगी भारत की चांदी!

    HighLights

    1. ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत की समुद्री शक्ति बढ़ाएगा।

    2. मलक्का जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक व्यापार केंद्र बनेगा।

    3. अंतरराष्ट्रीय पोर्ट, हवाई अड्डा, टाउनशिप शामिल होंगे।

    नई दिल्ली| डिफेंस सेक्टर के जानकार अक्सर कहते हैं कि, अमेरिका के आगे ईरान 10 दिन भी नहीं टिकता, अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर उसका कंट्रोल ना होता। ईरान ने रास्ता रोककर दुनिया के कई देशों के व्यापार को प्रभावित कर दिया। भारत को भी इसका खासा नुकसान देखने को मिला। ईरान ने जिस तरह से दुनिया को अपनी शक्ति का एहसास कराया, ठीक उसी तरह भारत भी समुंद्र में अपनी ताकत बढ़ाने पर काम कर रहा है, और वो ताकत है ग्रेट निकोबार प्रोजक्ट।

    ग्रेट निकोबार आईलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट भारत सरकार की सबसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक है। ये आइसलैंड स्ट्रेट ऑफ मलक्का से काफी नजदीक है, जो दुनिया के सबसे बड़े समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।

    ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट की खास बात

    ग्रेट निकोबार आइसलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में नई रणनीतिक ताकत देना है। इसे एक प्रमुख समुद्री व्यापार, लॉजिस्टिक्स और सामरिक शक्ति के रूप में स्थापित करना है। इस प्रोजेक्ट तहत 'गलाथिया बे' में एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एक ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक टाउनशिप होगा जिसमें घर, अस्पताल, होटल जैसी सारी चीजें होंगी साथ ही गैस और सोलर ऊर्जा से चलने वाले बिजली प्लांट बनाए जाएंगे, ताकि बिना किसी रुकावट के आइसलैंड में बिजसी सप्लाई होती रहे।

    भारत को क्या फायदा होगा?

    आज की तारीख में भारत का काफी कंटेनर कार्गो श्रीलंका के कोलंबो और सिंगापुर के बंदरगाह के जरिए ट्रांसशिप होता है। ग्रेट निकोबार में अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट बनने से भारत खुद जहाजों के माल की अदला-बदली का केंद्र बनेगा। इस प्रोजेक्ट के बाद भारत की ना सिर्फ विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता घटेगी बल्कि बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा के नुकसान को भी बचाया जा सकेगा। साथ ही भारत को पोर्ट के चार्जेस और लॉजिस्टिक्स से बड़ी आय भी हो सकती है।

    सबसे जरूरी बात ये है कि ग्रेट निकोबार मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) के पास स्थित है, जो दुनिया के सबसे जरूरी और व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। यहां एयरपोर्ट, बंदरगाह और सैन्य सुविधाएं बनने से भारतीय नौसेना और वायुसेना की निगरानी क्षमता बढ़ेगी। बता दें कि हिंद महासागर में भारत की मौजूदगी अधिक मजबूत होगी और किसी भी रणनीतिक चुनौती का तेजी से जवाब दिया जा सकेगा। इसके साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन लगातार अपने बंदरगाह और समुद्री नेटवर्क को बढ़ा रहा है। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को भारत के लिए एक रणनीतिक जवाब माना जा रहा है।

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    ग्रेट निकोबार आईलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ना सिर्फ आर्थिक और रणनीतिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि इससे निर्माण कार्य, परिवहन, पर्यटन, होटल, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की भी उम्मीद जताई जा रही है।

    कब तैयार होगा ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट

    ये पूरी परियोजना कई फेजेस में पूरी होगी। पहला चरण जिसमें अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, हवाई अड्डा और प्रमुख बुनियादी स्ट्रक्चर शामिल हैं। पहले चरण को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं पूरे प्रोजेक्ट को अलग-अलग चरणों में 2050 तक पूरा किए जाने की उम्मीद है। इसमें विस्तारित बंदरगाह, टाउनशिप, औद्योगिक क्षेत्र, पर्यटन सुविधाएं और अन्य ढांचे शामिल होंगे।