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    अमेरिका-ईरान युद्ध डर के बीच गल्फ देशों से खजाना समेट भाग रहे अरबपति, इस 'सुरक्षित देश' में भेज रहे पैसा

    Updated: Sun, 15 Mar 2026 06:29 PM (IST)

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी देशों के धनी निवेशक अपनी संपत्ति स्विट्जरलैंड में स्थानांतरित कर रहे हैं। अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद, स्विट्जरलैंड एक बार फिर निवेशकों के लिए 'सुरक्षित पनाहगाह' (Safe Haven) के रूप में उभर रहा है। मध्य पूर्व में लगातार बढ़ रहे संघर्ष के बीच, खाड़ी क्षेत्र के धनी व्यक्ति और निवेशक अपनी संपत्ति को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने पर विचार कर रहे हैं।

    रॉयटर्स के किए गए इंटरव्यू में, सामूहिक रूप से 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति का प्रतिनिधित्व करने वाले दर्जनों बैंकरों और वित्तीय सलाहकारों ने उम्मीद जताई है कि ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद स्विट्जरलैंड में निवेश का प्रवाह तेज होगा।

    निवेश में 40% का उछाल

    भले ही स्विट्जरलैंड को मध्य पूर्व और एशिया के वित्तीय केंद्रों से कड़ी टक्कर मिल रही हो, लेकिन पिछले तीन सालों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के निजी निवेशकों और गैर-बैंकों द्वारा स्विट्जरलैंड में जमा नकदी में लगभग 40% की बढ़ोतरी हुई है।

    डेलॉयट स्विट्जरलैंड (Deloitte Switzerland) के वेल्थ मैनेजमेंट प्रमुख, पैट्रिक स्पिलर ने बताया कि पिछले साल जून में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद इस रुझान ने और जोर पकड़ा है। उन्होंने कहा, "हाल की घटनाओं के कारण, हमें उम्मीद है कि मध्य पूर्व की संपत्ति तेजी से स्विट्जरलैंड की ओर आएगी। हम सुन रहे हैं कि बैंकों, फैमिली ऑफिसों और हाई-नेट-वर्थ (अमीर) व्यक्तियों के बीच इस पर चर्चा पहले से ही चल रही है।"

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    'स्विसनेस' का फायदा

    स्विस बैंकर्स एसोसिएशन (SBA) के मुख्य अर्थशास्त्री मार्टिन हेस ने बताया कि स्विट्जरलैंड की पहचान हमेशा से एक सुरक्षित और आकर्षक निवेश स्थल के रूप में रही है। हेस ने कहा, "यह हमारे लिए फायदे की बात है कि हम 'स्विसनेस' यानी सुरक्षित माहौल, राजनीतिक स्थिरता और कानून के शासन जैसी खूबियों के कारण आगे हैं। मुझे लगता है कि मौजूदा दौर में इन चीजों को काफी अहमियत दी जा रही है।"

    इस तनाव का असर मुद्रा बाजार पर भी दिखा है, जहां अमेरिका-इजरायली हमलों के बाद स्विस फ्रैंक यूरो के मुकाबले एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

    अरबों डॉलर के निवेश की संभावना

    पैट्रिक स्पिलर का अनुमान है कि इस क्षेत्र से स्विट्जरलैंड में "कई दर्जन अरब डॉलर" आ सकते हैं, हालांकि इसे पूरी तरह से दर्ज होने में कुछ सप्ताह या महीने लग सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निवेश की मात्रा इस बात पर निर्भर करेगी कि युद्ध कितना लंबा खिंचता है। आमतौर पर सबसे पहले नकदी (Cash) आती है, जिसके बाद स्टॉक और बॉन्ड जैसे अन्य एसेट्स आते हैं।

    बैंकों ने क्या कहा?

    स्विट्जरलैंड के सबसे बड़े वेल्थ मैनेजर यूबीएस (UBS) और तीसरे सबसे बड़े मैनेजर जूलियस बेयर (Julius Baer) ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, दूसरी सबसे बड़ी स्विस प्राइवेट बैंक, पिकेट (Pictet) ने कहा कि ग्राहकों की ओर से पूछताछ बढ़ रही है। बैंक ने अपने बयान में कहा, "हमने साल के अंत में रिकॉर्ड उच्च AUM (Asset Under Management) दर्ज किया है और 'स्विसनेस' अभी भी कारगर है।"

    ज्यूरिख स्थित बर्गोस (Bergos) बैंक के मुख्य निवेश अधिकारी, टिल बुडेलमैन ने बताया कि ईरान युद्ध ने यूरोपीय निवेशकों का ध्यान भी स्विट्जरलैंड की ओर खींचा है। उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद एक यूरोपीय निवेशक ने अपना खाता खोलने के लिए तत्काल अपॉइंटमेंट की मांग की, जो दिखाता है कि एक सुरक्षित पनाहगाह के रूप में स्विट्जरलैंड का आकर्षण फिर से बढ़ गया है।