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    सोने का इतिहासः वो देश, जहां चीटियां करती थीं खुदाई, नदी में बहता था गोल्ड; फिर भारत कैसे बन गया सोने की चिड़िया?

    Updated: Thu, 09 Apr 2026 04:44 PM (IST)

    History of Gold: एक ऐसा देश जहां, चीटियां सोने की खुदाई करती थीं। नदी की रेत छानकर सोना निकाला जाता था। और सबसे दिलचस्प बात- एक राजा जो शरीर पर सोने क ...और पढ़ें

    निया का पहला गोल्ड टाउन, 3000 साल पुरानी खदान; लाल सागर पार करके भारत आता था सोना, कहानी हैरान कर देगी

    निया का पहला गोल्ड टाउन, 3000 साल पुरानी खदान; लाल सागर पार करके भारत आता था सोना, कहानी हैरान कर देगी

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    नई दिल्ली| क्या आप जानते हैं कि दुनिया का लगभग 11% सोना अकेले भारतीय महिलाओं (India Gold Women Ownership) के पास है? यह मात्रा अमेरिका, रूस और जर्मनी जैसे बड़े देशों के कुल विदेशी मुद्रा भंडार से भी कहीं अधिक है।

    भारत में सोना केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि सुख-दुख का सबसे विश्वसनीय साथी और 'इमरजेंसी फंड' ( Gold as Emergency Fund India) माना जाता है। शादियों के सीजन में इसकी चमक और बढ़ जाती है, क्योंकि यहां सोने के बिना शगुन अधूरा है।

    लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में सोना आखिर आया कैसे? और कौन सा देश सोने का सबसे बड़ा उत्पादक देश था? ये कहानी बड़ी दिलचस्प है।

    गोल्ड टाउन: जहां नदी में बहता था सोना

    भारत में सोने की यह दीवानगी आज की नहीं है। इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि प्राचीन मिस्र (Egypt) दुनिया का सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश था। नील नदी के किनारे बसा 'कॉप्टोस' दुनिया का पहला 'गोल्ड बूम टाउन' था। यहां पहाड़ों से बहकर आने वाले सोने के कणों को पानी से धोकर निकाला जाता था।

    हैरानी की बात यह है कि दुनिया का सबसे पुराना खदान का नक्शा भी मिस्र में ही मिला, जो करीब 3000 साल (1162-1156 BC) पुराना है। इस नक्शे में खनिकों की झोपड़ियां और 'सोने की नसें' दिखाई गई हैं। मिस्र की पुरानी भाषा में 'नूबिया' शब्द का मतलब ही 'सोना' होता था। अपनी इसी अकूत संपत्ति के दम पर मिस्र उस दौर की महाशक्ति बना।

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    भारत में सोने की एंट्री और चींटियों का रहस्य

    भारत और सोने का रिश्ता रूहानी है। प्राचीन काल (1503 से 1450 BC) में भारत का व्यापार लाल सागर के रास्तों से मिस्र और रोम तक फैला था। टॉलेमी और रोमन काल के दौरान व्यापारी भारत के तटों पर सोना लेकर आते थे और बदले में मसाले व कपड़े ले जाते थे।

    एक प्राचीन संस्कृत पाठ में 'पिपिलिका सोने' का बड़ा ही रोचक जिक्र मिलता है। 'पिपिलिका' यानी चींटियां। कहा जाता है कि कुछ खास चींटियां जमीन खोदते समय सोने के कण बाहर निकालती थीं, जिन्हें इकट्ठा कर राजाओं को भेंट किया जाता था।

    भारत में सोना कभी सिर्फ गहना नहीं रहा, यह 'स्त्रीधन' और सुरक्षित निवेश का सबसे बड़ा जरिया बना। आज भी दुनिया के कुल सोने का एक बड़ा हिस्सा भारतीय महिलाओं के पास है।

    सोने को 'बनाने' की कोशिश: पारस पत्थर और कीमियागर

    इंसान की प्यास यहीं नहीं रुकी। मध्यकालीन वैज्ञानिकों (कीमियागर, जिन्हें अंग्रेजी में एल्केमिस्टकहा जाता था) ने माना कि सोना 'पूर्णता की धातु' है। उन्होंने लोहा या तांबा जैसी सस्ती धातुओं को सोने में बदलने की कोशिश की।

    माना जाता था कि एक 'पारस पत्थर' होता है, जो किसी भी धातु को छू ले तो वह सोना बन जाएगी।"

    इसी कोशिश में आज के आधुनिक रसायन विज्ञान (Chemistry) का जन्म हुआ। हालांकि कोई भी वैज्ञानिक लैब में सोना नहीं बना सका, लेकिन उन्होंने सोना घोलने वाला 'एक्वा रेजिया' (अम्लराज) जरूर खोज लिया।

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    स्टेप-बाई-स्टेप: कैसे निकलता और निखरता था सोना?

    सोना प्राप्त करने के प्राचीन तरीके जितने सरल थे, उतने ही थकाऊ भी।

    • पैनिंग यानी छानना: सबसे पुराना तरीका। सोने का घनत्व (Density) बहुत ज्यादा होता है। लोग नदियों की रेत को उथले बर्तनों (Pans) में पानी के साथ घुमाते थे। भारी होने के कारण सोना नीचे बैठ जाता था और रेत बह जाती थी।
    • अमलगमेशन यानी पारे का जादू: रोमनों ने खोजा कि पारा (Mercury) सोने को अपने अंदर सोख लेता है। पत्थर पीसकर उसमें पारा मिलाया जाता, जो सोने को खींच लेता। बाद में पारे को गर्म करके उड़ा दिया जाता और पीछे रह जाता शुद्ध सोना।
    • स्टैम्प मिल: बड़े पत्थरों को पीसने के लिए लोहे के भारी मूसलों का इस्तेमाल होता था, जिन्हें 'स्टैम्प मिल' कहते थे।
    • गिल्डिंग यानी सोने का वर्क: सोना इतना लचीला है कि 1 ग्राम सोने से 3 किलोमीटर लंबा तार बन सकता है। प्राचीन मिस्रवासी सोने को पीट-पीटकर इतना पतला कर देते थे कि उसे लकड़ी या मूर्तियों पर चिपकाया जा सके।

    वो राजा, जो सोने की धूल मलकर नहाता था!

    सोने की खोज में इंसान सात समंदर पार गया। दक्षिण अमेरिका में 'एल्डोराडो' की (El Dorado Gold Legend) कहानी मशहूर हुई- एक ऐसा राजा जो अपने शरीर पर सोने की धूल मलकर झील में नहाता था।

    वहीं ब्राजील में 'ओउरो प्रेटो' यानी 'काला सोना' मिला, जिसके कणों पर एक काली परत चढ़ी होती थी। 1848 में कैलिफोर्निया में हुई 'गोल्ड रश' ने तो पूरी दुनिया के भूगोल को ही बदल दिया।

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    2,20,000 टन निकाला जा चुका सोना

    कनाडा की लावल यूनिवर्सिटी में माइनिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर फतही हबशी (Fathi Habashi) की किताब 'गोल्ड- एन हिस्टोरिकल इंट्रोडक्शन' में बताया है कि दुनिया में करीब 1,25,000 टन सोना मौजूद है।

    हालांकि, आंकड़े देखें तो इतिहास से लेकर अब तक जितना सोना निकाला जा चुका है, उसकी मात्रा लगभग 2,10,000 से 2,20,000 टन के बीच है।

    पूरे सोने से बन सकता है 72 फीट का क्यूब

    अगर दुनिया के पूरे सोने (2,20,000 टन) को एक साथ पिघलाकर एक बड़ा घन (Cube) बनाया जाए, तो इसकी लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई केवल 22 मीटर (लगभग 72 फीट) होगी। यानी यह एक औसत ओलंपिक स्विमिंग पूल के आकार से थोड़ा ही बड़ा होगा।

    आज के आधुनिक ऑफिसों की कांच की खिड़कियों पर सोने की एक बेहद पतली परत चढ़ाई जाती है, जिससे सूरज की गर्मी अंदर नहीं आती और एयर कंडीशनिंग का खर्च बचता है।

    चाहे वह मिस्र के मकबरों में रखा तूतनखामेन का मुखौटा हो या भारतीय शादियों में चमकते हार, सोना आज भी इंसानी तरक्की और खूबसूरती का सबसे बड़ा गवाह है। यह धातु कभी नहीं मरती, क्योंकि अब तक निकाला गया लगभग सारा सोना आज भी किसी न किसी रूप में हमारे बीच मौजूद है।

    Source: Gold- and Historical Introduction (BOOK)