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    भारत ने तोड़ा चीन का घमंड, WTO में IND के कड़े रुख के बाद ड्रैगन ने बदले सुर; अब चाहता है मजबूत आर्थिक संबंध

    Updated: Sat, 04 Apr 2026 10:28 AM (IST)

    भारत ने WTO में चीन के निवेश सुविधा समझौते को रोका, जिसके बाद चीन ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग मजबूत करने की इच्छा जताई है। पीयूष ...और पढ़ें

    भारत ने तोड़ा चीन का घमंड, WTO में IND के कड़े रुख के बाद ड्रैगन ने बदले सुर; अब चाहता है मजबूत आर्थिक संबंध

    भारत ने तोड़ा चीन का घमंड, WTO में IND के कड़े रुख के बाद ड्रैगन ने बदले सुर; अब चाहता है मजबूत आर्थिक संबंध

    HighLights

    1. भारत ने WTO में चीन के IFD समझौते को सफलतापूर्वक रोका।

    2. चीन ने भारत के साथ मजबूत द्विपक्षीय व्यापार सहयोग की इच्छा जताई।

    3. पीयूष गोयल ने संतुलित व्यापार और निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया।

    नई दिल्ली। भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले खबर आई थी जिसमें भारत ने चीन की एक अहम योजना को सिरे से खारिज कर दिया था। यह मामला विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) से जुड़ा था, जहां भारत ने चीन के नेतृत्व वाले ‘इनवेस्टमेंट फेसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट’ (IFD) समझौते को WTO के कानूनी ढांचे में शामिल होने से रोक दिया। दिलचस्प बात यह रही कि इस मुद्दे पर भारत अकेला देश था जो अंत तक अपने रुख पर डटा रहा। हिंदुस्तान का साफ कहना था कि यह समझौता WTO के मूल सिद्धांतों को कमजोर करेगा।

    अब उसी सम्मेलन से एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जिसने भारत-चीन व्यापार संबंधों को नई दिशा देने के संकेत दिए हैं। चीन ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत के साथ मिलकर द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापार सहयोग की भूमिका का पूरी तरह से लाभ उठाने के लिए तैयार है, ताकि यह एक "संतुलनकारी तत्व" (ballast) के रूप में काम कर सके; वहीं दूसरी ओर, भारत भी द्विपक्षीय व्यापार को अधिक संतुलित बनाने की दिशा में प्रयास कर रहा है।

    पीयूष गोयल ने की चीन के वाणिज्य मंत्री से मुलाकात

    भारत के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने WTO के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के दौरान चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेंटाओ के साथ मुलाकात की। यह बैठक कैमरून की राजधानी याउंडे में आयोजित सम्मेलन के दौरान हुई, जहां दुनिया भर के देशों के प्रतिनिधि वैश्विक व्यापार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने पहुंचे थे।

    इस बैठक के बाद चीन का रुख कुछ बदला हुआ नजर आया। चीनी वाणिज्य मंत्री ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की इच्छा जताई। चीन ने यह भी कहा कि वह भारत के साथ मिलकर व्यापार को एक स्थिर आधार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है, जिससे दोनों देश वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रभाव डाल सकें।

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    वहीं, पीयूष गोयल ने इस मुलाकात को लेकर साफ किया कि भारत का फोकस सिर्फ व्यापार बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उसे संतुलित बनाने पर भी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने और व्यापार को सुगम बनाने पर चर्चा हुई है। खासतौर पर भारत अपने निर्यातकों के लिए अधिक अवसर चाहता है, जिसमें दवाइयां, इंजीनियरिंग उत्पाद, मछली और कृषि उत्पाद शामिल हैं।

    भारत-चीन के बीच व्यापार 137 अरब डॉलर तक पहुंचा

    गौरतलब है कि मौजूदा समय में भारत और चीन के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है। अप्रैल से फरवरी 2026 के बीच चीन, अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है। इस अवधि में भारत-चीन व्यापार 137 अरब डॉलर (India China Trade Data) तक पहुंच गया, जबकि अमेरिका के साथ यह आंकड़ा 127.8 अरब डॉलर रहा।

    चीन के साथ व्यापार में हुई पूरी बढ़ोतरी आयात की वजह से हुई है, जो पिछले वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में $119.5 अरब तक पहुंच गया। इस बढ़ोतरी के कारण व्यापार घाटा भी $102.1 अरब तक पहुंच गया है।

    GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, "यह अंतर 2025-26 तक बढ़कर $111.4 बिलियन होने का अनुमान है। यह असंतुलन चीन के कंपोनेंट्स और औद्योगिक इनपुट्स पर भारत की निर्भरता को दिखाता है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स, इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरियां और कंपोनेंट्स, सोलर सेल्स और मॉड्यूल्स, मशीनरी, ऑर्गेनिक केमिकल्स और फार्मा सामग्री शामिल हैं।"

    व्यापार के अलावा, चीन भारत में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अधिक खुलेपन की भी मांग कर रहा है। भारत में चीनी निवेश 'प्रेस नोट 3, 2020' द्वारा नियंत्रित होता है, जिसके तहत सरकार से पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य है।

    WTO में चुनौती देकर भारत ने मजबूत की स्थिति

    कुल मिलाकर, एक तरफ जहां भारत ने चीन की योजनाओं को WTO में चुनौती देकर अपनी मजबूत स्थिति दिखाई, वहीं दूसरी ओर चीन अब भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को बेहतर करने की पहल करता नजर आ रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि वैश्विक व्यापार में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और बड़े देश भी अब भारत के साथ संतुलित और सहयोगात्मक संबंध बनाने को मजबूर हो रहे हैं।

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