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    जंग के बीच क्या भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम, देश के पास सिर्फ 25 दिन का स्टॉक, अब कहां से आएगा तेल?

    Updated: Tue, 03 Mar 2026 05:58 PM (GMT+05:30)

    ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर चर्चा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत के पास 25 दिनों का कच्चा तेल और रिफाइंड तेल का स्टॉ ...और पढ़ें

    जंग के बीच क्या भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम, देश के पास सिर्फ 25 दिन का स्टॉक, अब कहां से आएगा तेल?

    जंग के बीच क्या भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम, देश के पास सिर्फ 25 दिन का स्टॉक, अब कहां से आएगा तेल?

    नई दिल्ली। ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट (Petrol Diesel Rate) बढ़ेंगे या नहीं, इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इन चर्चाओं के बीच भारत में कच्चे तेल के बचे हुए स्टॉक को लेकर एक खबर है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास अभी कई हफ्तों तक के लिए कच्चे तेल का स्टॉक बचा हुआ है।

    न्यूज एजेंसी ANI ने भारत सरकार के सूत्रों के हवाले से बताया कि भारत के पास 25 दिनों का क्रूड ऑयल और रिफाइंड ऑयल का स्टॉक है। क्रूड ऑयल, LPG और LNG इंपोर्ट करने के लिए दूसरे सोर्स ढूंढे जा रहे हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने का तुरंत कोई प्लान नहीं है। इस रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल भारत सरकार अभी पेट्रोल और डीजल के रेट बढ़ाने पर विचार नहीं कर रही है।

    वहीं, दूसरी ओर केप्लर के अनुसार, भारत के पास लगभग 100 मिलियन बैरल कमर्शियल क्रूड ऑयल का स्टॉक है। स्टोरेज टैंकों, अंडरग्राउंड स्ट्रेटेजिक रिजर्व और देश की ओर आने वाले जहाजों में  जो होर्मुज स्ट्रेट से तेल के बहाव में रुकावट आने पर लगभग 40-45 दिनों की जरूरत को पूरा कर सकता है। यानी अगर भारत के तेल आयात में किसी प्रकार की रुकावट आती है तो 40 से 45 दिनों तक के लिए हमारे पास कच्चे तेल का स्टॉक है।

    भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल इम्पोर्ट करता है। कच्चा तेल, पेट्रोल और डीजल जैसे फ्यूल के लिए कच्चा माल है, जिसमें से 50% से ज्यादा मिडिल ईस्ट के देशों से सप्लाई होता है और यह होर्मुज की पतली स्ट्रेट से होकर गुजरता है, जहां से तेल का फ्लो ईरान संकट के कारण रुक गया है।

    क्या बोले एक्सपर्ट?

    केप्लर में रिफाइनिंग और मॉडलिंग के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रिटोलिया ने कहा कि अगर मिडिल ईस्ट से क्रूड ऑयल की सप्लाई कुछ समय के लिए पूरी तरह रुक जाती है, तो इसका तुरंत असर लॉजिस्टिक और कीमत पर पड़ेगा, और अगर होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही लंबे समय तक रुकी रही तो सप्लाई का खतरा बढ़ जाएगा।

    उन्होंने कहा, "देश रिफाइनर और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के पास मौजूद कमर्शियल इन्वेंट्री के साथ-साथ स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी रखता है। इन बफर्स का मकसद लगातार सप्लाई में रुकावट के बजाय कुछ समय के लिए सप्लाई में आने वाले झटकों को मैनेज करना है।"

    उन्होंने आगे कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाले आयात का औसत लगभग 2.5 मिलियन बैरल प्रति दिन है - जो भारत के 5 मिलियन बीपीडी कुल कच्चे तेल के आयात का लगभग आधा है। ये संयुक्त भंडार सैद्धांतिक रूप से कच्चे तेल की समस्या की स्थिति में लगभग 40-45 दिनों के आयात को कवर कर सकते हैं।

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