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Egg Price Hike: प्याज-चीनी के बाद अब अंडों ने बिगाड़ा बजट! एक झटके में महंगी हो गई आपकी 'प्रोटीन वाली थाली'

Published: Wed, 26 Aug 2026 09:00 AM (IST)

भारत में अंडों की कीमतें एक साल में 35-40% तक बढ़ गई हैं, जिससे आम लोगों का बजट बिगड़ गया है।

एक झटके में इतनी बढ़ गई कीमतें

एक झटके में इतनी बढ़ गई कीमतें

HighLights

  1. पिछले एक साल में अंडों की कीमतों में 35-40% की वृद्धि।

  2. पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण के लिए मक्के का उपयोग मुख्य कारण।

  3. मक्का महंगा होने से पोल्ट्री फीड की लागत में भारी बढ़ोतरी।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: भारत में अंडे और चिकन को प्रोटीन का सबसे सस्ता और सुलभ सोर्स माना जाता है। लेकिन इन दिनों नाश्ते की टेबल से लेकर जिम जाने वालों की डाइट तक, हर जगह अंडे की बढ़ती कीमतों (Egg price hike) ने लोगों का बजट बुरी तरह से बिगाड़ दिया है। जहां कुछ समय पहले तक एक अंडा 5-6 रुपये में मिल जाता था, वहीं अब इसके दाम आसमान छू रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अंडों की इस महंगाई के पीछे कोई मौसमी बीमारी या मुर्गियों की कमी नहीं, बल्कि पेट्रोल में मिलाए जाने वाले 'एथनॉल' (ethanol) की नीतियां हैं।

कितने महंगे हुए अंडे?

बाजार के मौजूदा आंकड़ों और नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) की रिपोर्ट्स पर नजर डालें तो पिछले एक साल के भीतर अंडों की कीमतों में 35% से 40% तक का भयंकर उछाल आया है।
अगर थोक भाव की बात करें तो एक्स-फार्म (पोल्ट्री फार्म से निकलने वाली) कीमत अब बढ़कर लगभग 7 रुपये प्रति अंडा तक पहुंच गई है। वहीं रिटेल भाव की बात करें तो आम जनता के लिए खुदरा बाजार में एक अंडे की कीमत 8.50 रुपये लेकर 9 रुपये तक हो गई है। यानी अब एक क्रेट (30 अंडे) खरीदने के लिए ग्राहकों को पहले के मुकाबले काफी ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है।

एथनॉल उत्पादन से क्या है कनेक्शन?

अब सबसे बड़ा सवाल आता है कि गाड़ियों के ईंधन का अंडों से क्या लेना-देना है? दरअसल, इस पूरी महंगाई की जड़ है मक्का (MAIZE)। मुर्गियों के दाने (Poultry feed) का सबसे मुख्य और अहम हिस्सा मक्का ही होता है।

सरकार इन दिनों पेट्रोल में ब्लेंडिंग के लिए एथनॉल के उत्पादन पर भारी जोर दे रही है। पहले एथनॉल मुख्य रूप से गन्ने से बनता था, लेकिन अब मक्के से भी बड़े पैमाने पर एथनॉल बनाया जा रहा है। जब मक्के की भारी सप्लाई एथनॉल फैक्ट्रियों और डिस्टिलरीज का और मुड़ गई, तो पोल्ट्री उद्योग के लिए मक्के का भीषण संकट पैदा हो गया। मांग ज्यादा और सप्लाई कम होने के कारण खुले बाजार में मक्के के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।

पोल्ट्री किसानों पर पड़ी दोहरी मार!

पोल्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार, मुर्गियों के चारे में लगभग 50 से 60 फीसदी हिस्सा केवल मक्के का होता है। मक्का महंगा होने से पोल्ट्री फीड की लागत में भारी वृद्धि हुई है। फीड महंगा होने के कारण पोल्ट्री किसानों के पास अंडों के दाम बढ़ाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। रिपोर्ट कहती है कि कई छोटे पोल्ट्री फार्म मालिकों ने तो लागत बढ़ने के कारण अपना काम ही समेट लिया है, जिससे बाजार में अंडों की ओवरऑल सप्लाई भी घट गई है।
अंडों की कीमतों के 9 रुपये तक पहुंचने के बाद अब अगली चिंता ब्रायलर चिकन को लेकर है।

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