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क्या GDP के आंकड़ों से हुई है छेड़छाड़? बवाल के बीच केंद्र ने सामने रखी सच्चाई

By Jagran BusinessEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Wed, 02 Sep 2026 08:04 PM (IST)

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों में हेरफेर के दावों को खारिज किया है। ...और पढ़ें

सरकार ने जीडीपी आंकड़ों में हेरफेर के दावों को खारिज किया।

सरकार ने जीडीपी आंकड़ों में हेरफेर के दावों को खारिज किया।

HighLights

  1. सरकार ने जीडीपी आंकड़ों में हेरफेर के दावों को खारिज किया।

  2. वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के आंकड़े पर विवाद।

  3. आधार वर्ष और सीरीज में अंतर के कारण तुलना गलत।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को जीडीपी आंकड़ों को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए कहा है कि 31 अगस्त को जारी किये गये आंकड़ें एकदम दुरुस्त हैं और अर्थव्यवस्था आकलन के सर्वमान्य तरीकों का इस्तेमाल किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2026-27 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर के 7.8 फीसद (India GDP Growth Rate) रहने को बहुत बड़ी उपलब्धि करार करते हुए यह भी कहा था कि, निराशा फैलाने वाले लोग गलत साबित हुए हैं।

विपक्ष ने उठाए सवाल

सरकार के उक्त आंकड़ों पर पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सवाल उठाये और उसके बाद पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने आरोप लगाया था कि पिछले साल के आंकड़ों को घटाकर वर्तमान वृद्धि दर बढ़ाकर दिखाई गई है और असल वृद्धि करीब 2.5 प्रतिशत है।

सरकार ने बतााय सच

सोशल मीडिया पर इस बारे में काफी चर्चा होते देख बुधवार शाम को वित्त मंत्रालय ने जीडीपी डाटा संकलन से जुड़े सारे आंकड़ों को सामने रखा।

इसके अलावा एसबीआइ की रिसर्च टीम ने भी एक पूरी रिपोर्ट जारी कि और बताया कि कैसे अर्थव्यवस्था के पुराने आंकड़ों को समय समय पर संशोधित करना एक सामान्य प्रक्रिया है।

एसबीआइ ने 7.8 फीसद की विकास दर को सही बताया और इस पर उठाये जा रहे सवालों को अनावश्यक करार दिया। यही नहीं नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार, 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरिवंद पाणागढिया ने 7.8 फीसद की विकास दर पर उठे सवालों को खारिज किया है।

नई सीरीज पर आधारित है डेटा

मंत्रालय ने कहा कि पिछले साल की पहली तिमाही की मौजूदा कीमतों पर जीडीपी पहले 86.05 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी। यह आंकड़ा पुरानी 2011-12 श्रृंखला का था। फरवरी 2026 में नई 2022-23 आधार वर्ष श्रृंखला लागू हुई।

नई पद्धति, बेहतर डेटा और संशोधित कवरेज के कारण वही आंकड़ा घट कर 80.32 लाख करोड़ रुपये रह गया। बाद में औद्योगिक उत्पादन से जुड़े नए आंकड़े शामिल करने पर जीडीपी का आकार उक्त तिमाही में 80 लाख करोड़ रुपये हो गया। मंत्रालय के अनुसार यह जानबूझकर की गई कटौती नहीं, बल्कि श्रृंखला संशोधन का परिणाम है।

पुरानी और नई श्रृंखला के आंकड़ों की सीधी तुलना सही नहीं है। मंंत्रालय ने आगे कहा है कि पुरानी 2011-12 श्रृंखला का 86.05 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा नई 2022-23 श्रृंखला के मौजूदा आंकड़ों से सीधे नहीं जोड़ा जा सकता। वृद्धि दर हमेशा एक ही और नई श्रृंखला के आंकड़ों से निकाली जाती है। इसलिए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के 88.27 लाख करोड़ रुपये की तुलना पुराने 86.05 लाख करोड़ से नहीं, बल्कि नई श्रृंखला में संशोधित राशि से होनी चाहिए।

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