गौतम अदाणी मामले में नया मोड़! कानून मंत्रालय ने क्यों उल्टे पांव लौटाया अमेरिकी SEC का समन? बताई ये वजह
SEC ने अब न्यूयॉर्क की संघीय अदालत से ईमेल के जरिए समन भेजने की अनुमति मांगने के बीच अदाणी ग्रुप और अमेरिकी SEC से जुड़ा नया मोड़ आया है। भारत के कानू ...और पढ़ें

अदाणी ग्रुप और अमेरिकी SEC के बीच कानूनी लड़ाई में नया मोड़ आया है।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। अदाणी ग्रुप और अमेरिकी रेगुलेटर सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के बीच चल रही कानूनी लड़ाई में एक नया और दिलचस्प मोड़ सामने आया है। ताजा अदालती दस्तावेजों से पता चला है कि भारत के कानून मंत्रालय ने दो बार गौतम अदाणी (Gautam Adani) और उनके भतीजे सागर अदाणी (Sagar Adani) को अमेरिकी समन तामील करने से मना कर चुका है।
क्यों लौटाए गए अमेरिकी दस्तावेज?
अमेरिकी अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, भारत सरकार के कानून मंत्रालय ने इसके पीछे कुछ तकनीकी और कानूनी कारण बताए हैं। आइए जानते हैं वो क्या कारण हैं।
हस्ताक्षर और सील की कमी
मई 2025 में जब SEC ने पहली बार समन भेजा, तो मंत्रालय ने इसे यह कहते हुए लौटा दिया कि कवर लेटर पर न तो स्याही वाले हस्ताक्षर (Ink Signature) थे और न ही आधिकारिक मुहर (Seal) थी। मंत्रालय का कहना था कि बिना इसके दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि करना मुश्किल है।
क्या था मामला?
नवंबर 2024 में दायर एक शिकायत में , एसईसी ने आरोप लगाया कि अदाणी परिवार ने " अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के संबंध में सितंबर 2021 में जारी किए गए ऋण प्रस्ताव के बारे में जानबूझकर या लापरवाही से झूठे और भ्रामक बयान देकर सिक्योरिटी एक्सचेंज कानूनों के धोखाधड़ी-रोधी प्रावधानों का उल्लंघन किया"। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी और छह संबंधित संस्थाओं पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए जाने के बाद अडानी समूह ने 600 मिलियन डॉलर के बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया वापस ले ली। आपराधिक मामले के अलावा, एसईसी प्रतिभूति कानूनों के कथित उल्लंघन के लिए एक दीवानी मुकदमा भी चला रहा है।
किन नियमों का दिया हवाला?
दिसंबर 2025 में एसईसी ने उसी महीने बाद में दस्तावेज दोबारा प्रस्तुत किए और तर्क दिया कि हेग कन्वेंशन में ऐसी औपचारिकताओं का प्रावधान नहीं है। एसईसी ने सेवा कन्वेंशन के संचालन पर व्यावहारिक हैंडबुक के चौथे संस्करण का हवाला देते हुए तर्क दिया कि कुछ राज्यों द्वारा दस्तावेजो की तामील से इनकार करने की प्रथा, "जब तक उन पर जारीकर्ता न्यायालय की मुहर और स्टाम्प न हो... गलत है।"
इस पर मंत्रालय ने अमेरिकी नियमों (SEC Rule 5(b)) का हवाला देते हुए कहा कि 'समन' जारी करना उन श्रेणियों में नहीं आता जिन्हें भारत इस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाए।
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अब अमेरिका क्या कर रहा है?
भारत सरकार के इस कड़े रुख के बाद, अमेरिकी रेगुलेटर (SEC) ने न्यूयॉर्क की एक फेडरल कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। SEC ने अदालत से कहा है कि चूंकि मानक अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं (Hague Convention) के जरिए समन नहीं भेजा जा पा रहा है, इसलिए उन्हें ईमेल के जरिए अदाणी को समन भेजने की अनुमति दी जाए। SEC का आरोप है कि अदाणी ग्रुप ने सितंबर 2021 के कर्ज जुटाने (Debt Offering) के दौरान निवेशकों को गलत जानकारी दी थी।
बाजार पर क्या पड़ा असर
इस खबर के बीच शुक्रवार को अदाणी ग्रुप के शेयरों में भारी हलचल देखी गई। अदाणी ग्रीन एनर्जी समेत कई कंपनियों के मार्केट कैप में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
अदाणी ग्रुप का क्या कहना है?
वहीं, अदाणी ग्रुप ने इन सभी आरोपों को 'निराधार' बताया है। ग्रुप का कहना है कि यह मामला पूरी तरह से सिविल (Civil) है, न कि आपराधिक है। अदाणी ग्रीन एनर्जी इस मामले में कोई पार्टी नहीं है। ग्रुप के खिलाफ रिश्वतखोरी या भ्रष्टाचार (FCPA) के कोई आरोप नहीं लगाए गए हैं।